मंईयां सम्मान योजना से रांची की 67,752 महिलाएं बनी स्वावलंबी, हर महीने मिलते हैं 2500 रुपये

मंईयां सम्मान योजना के पैसों से बकरी पालन करने वाली महिला. फोटो: प्रभात खबर
Maiyan Samman Yojana: रांची में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से 67,752 महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं. योजना के तहत मुर्गी, बतख, बकरी पालन और अंडा उत्पादन से महिलाओं को जोड़ा गया है. जिला प्रशासन प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने में मदद कर रहा है. वर्ष 2026 तक एक लाख महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
Maiyan Samman Yojana: झारखंड की राजधानी रांची में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है. जिला प्रशासन की पहल से हजारों महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है. जिला कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 67,752 महिलाओं को इस योजना के तहत विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया है. इससे महिलाओं की आय में बढ़ोतरी हो रही है और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
मुर्गी, बतख और बकरी पालन से बढ़ी आय
मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को पशुपालन और पोल्ट्री से जोड़कर आय के नए साधन उपलब्ध कराए गए हैं. योजना के अंतर्गत 27,644 महिला लाभुकों के बीच चूजा का वितरण किया गया, जिससे वे मुर्गी पालन कर आय अर्जित कर रही हैं. इसके अलावा, 21,521 महिलाओं को बतख पालन से जोड़ा गया है, जबकि 16,105 महिलाओं को बकरी पालन के लिए सहायता दी गई है. इन गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाएं अब नियमित आय प्राप्त कर रही हैं.
अंडा उत्पादन से भी मिल रही आजीविका
योजना के तहत केवल पशुपालन ही नहीं, बल्कि अंडा उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार 2,482 महिलाएं अंडा उत्पादन से जुड़कर अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं. यह गतिविधि कम लागत में बेहतर आय का माध्यम बन रही है. इससे महिलाओं को घर के पास ही रोजगार का अवसर मिल रहा है और वे अपने परिवार की जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रही हैं.
प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध
महिलाओं को केवल संसाधन उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें सफल बनाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. जिला प्रशासन की ओर से विशेषज्ञों के माध्यम से महिलाओं को पशुपालन, पोल्ट्री और अंडा उत्पादन से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी जाती है. इससे महिलाओं को उत्पादन बढ़ाने और बेहतर तरीके से व्यवसाय चलाने में मदद मिलती है. साथ ही प्रशासन यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि तैयार उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध हो, ताकि महिलाओं को उचित मूल्य मिल सके.
प्रखंड स्तर पर हो रही योजना की नियमित समीक्षा
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिला प्रशासन लगातार इसकी निगरानी कर रहा है. उपायुक्त की ओर से सभी प्रखंडों के बीडीओ और सीओ को इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं. प्रखंडवार लाभार्थियों की स्थिति और योजना की प्रगति की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या का समय पर समाधान किया जा सके.
इसे भी पढ़ें: डेपुटेशन कैंसिल होते ही फुर्र हो गए पलामू के 11 टीचर, सात महीने बाद भी नहीं लौटे ऑरिजनल स्कूल
वर्ष 2026 तक एक लाख महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य
रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि मंईयां सम्मान योजना के माध्यम से वर्ष 2025 में 67,752 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया गया है. उन्होंने कहा कि महिलाओं को उत्पादन बढ़ाने और व्यवसाय को सफल बनाने के लिए विशेषज्ञों से प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है. जिला प्रशासन का लक्ष्य वर्ष 2026 तक करीब एक लाख महिलाओं को इस योजना से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है.
इसे भी पढ़ेंं: धनबाद में फूड सेफ्टी विभाग की बड़ी कार्रवाई, 1400 किलो नकली पनीर और नेपाली घी जब्त
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




