2019 में ही कर दिया था साफ- बीजेपी के साथ कोई समझौता नहीं, भाजपा से गठबंधन पर शरद पवार

Published by : Agency Updated At : 03 May 2023 8:17 PM

विज्ञापन

महाराष्ट्र में 2019 चुनाव के बाद बीजेपी ने यह संभावना टटोलनी शुरू कर दी थी कि क्या एनसीपी के साथ गठबंधन की कोई संभावना हो सकती है. मैं इस प्रक्रिया में शामिल नहीं था. यह सिर्फ बीजेपी की इच्छा थी और भाजपा के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई थी.

विज्ञापन

भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र में 2019 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ चुनाव-के बाद गठबंधन करने को इच्छुक थी, लेकिन तात्कालीन अध्यक्ष शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को स्पष्ट कर दिया था कि भाजपा के साथ उनकी पार्टी का कोई समझौता नहीं हो सकता है. पवार ने मंगलवार को विमोचित अपनी संशोधित जीवनी ‘लोक माझे संगति’ में यह भी स्वीकार किया कि महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद जब सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता थी तब राकांपा और भाजपा के कुछ नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत हुई थी. पवार की संशोधित जीवनी में 2015 के बाद की घटनाओं पर रोशनी डाली गई है.

शरद पवार ने लिखा है कि बीजेपी ने यह संभावना टटोलनी शुरू कर दी थी कि क्या एनसीपी के साथ गठबंधन की कोई संभावना हो सकती है, लेकिन मैं इस प्रक्रिया में शामिल नहीं था. यह सिर्फ भाजपा की इच्छा थी और भाजपा के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई थी. लेकिन दोनों दलों के चुनिंदा नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत हुई. उन्होंने कहा कि चूंकि एनसीपी की दिलचस्पी कम थी, इसलिए उसने भाजपा के साथ नहीं जाने का फैसला किया और भाजपा को ये साफ-साफ बताना जरूरी था. पवार ने अपनी किताब में लिखा है, इसी के अनुरूप उन्होंने नवंबर 2019 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की.

एनसीपी नेता ने 20 नवंबर, 2019 को मोदी से मुलाकात की और उन्हें महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद किसानों के संकट से अवगत कराया. पवार ने तब टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था कि उनके और मोदी के बीच क्या बातचीत हुई थी, क्योंकि राज्य में सरकार गठन पर अनिश्चितता की स्थिति थी तथा राकांपा, अविभाजित शिवसेना और कांग्रेस गठबंधन की बातचीत कर रहे थे. पवार ने अपनी किताब में कहा है, मैंने मोदी से मुलाकात की और उन्हें बहुत स्पष्ट रूप से कहा कि हमारे (बीजेपी और एनसीपी) के बीच कोई राजनीतिक समझौता नहीं हो सकता है. लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि जब मैं यह कह रहा था तब पार्टी में नेताओं का एक तबका था जो बीजेपी से संबंध चाहता था.

पवार के भतीजे अजित पवार ने पाला बदला और अल्पकालिक देवेंद्र फडणवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. पवार ने दावा किया कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय में भी बीजेपी , एनसीपी के साथ गठबंधन चाहती थी. पवार ने कहा कि 2014 में भी बीजेपी की ओर से एनसीपी को अपने पाले में लाने की कोशिश की गई थी. राज्य में 2014 के विधानसभा चुनावों के बाद बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन उसके पास बहुमत नहीं था. शिवसेना, बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी ने विधानसभा चुनाव में अलग-अलग चुनाव लड़ा था.

Also Read: ड्रोन अटैक कर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को जान से मारने की कोशिश, यूक्रेन ने किया हमले से इनकार

पवार ने कहा, मैं बीजेपी के साथ 2014 में हुई बातचीत के दौरान मौजूद नहीं था, लेकिन मुझे इसकी जानकारी थी. लेकिन अचानक, बीजेपी ने शिवसेना के साथ अपना नाता सुधार लिया और शिवसेना सरकार का हिस्सा भी बन गई. इससे हमारे नेताओं को यह अहसास हुआ कि भाजपा पर भरोसा करना उचित नहीं है. पवार ने मंगलवार को किताब के विमोचन के मौके पर घोषणा की थी कि वह राकांपा के प्रमुख का पद छोड़ देंगे. उन्होंने 1999 में इस राजनीतिक संगठन की स्थापना की थी.

विज्ञापन
Agency

लेखक के बारे में

By Agency

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola