ePaper

एनआईए की विशेष अदालत ने गौतम नवलखा की जमानत याचिका रद्द की, कहा- आपके खिलाफ बेहद गंभीर आरोप हैं

Updated at : 06 Sep 2022 11:04 AM (IST)
विज्ञापन
एनआईए की विशेष अदालत ने गौतम नवलखा की जमानत याचिका रद्द की, कहा- आपके खिलाफ बेहद गंभीर आरोप हैं

गौतम नवलखा (69) को एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में शामिल होने के आरोप में 28 अगस्त 2018 को गिरफ्तार किया गया था. उन्हें शुरुआत में घर में नजरबंद रखा गया, लेकिन बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वह पड़ोसी नवी मुंबई स्थित तलोजा जेल में बंद हैं.

विज्ञापन

मुंबई : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा की जमानत याचिका खारिज कर दिया है. सुनवाई के दौरान एनआईए की विशेष अदालत ने कहा कि गौतम नवलखा के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, मामले में आरोपी संलिप्तता साबित होती है. उन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती.

जमानत के हकदार नहीं गौतम नवलखा

एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश राजेश जे कटारिया ने नवलखा की जमानत याचिका को सोमवार को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ बेहद गंभीर आरोप हैं. अदालत के आदेश की प्रति मंगलवार को शेयर की गई. अदालत ने कहा कि आरोप-पत्र पर गौर करने के बाद आवेदक के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने की बात सामने आई है. प्रथम दृष्टया कथित अपराध में आवेदक की संलिप्तता प्रतीत होती है. अदालत के आदेश में कहा गया है कि अपराध बेहद गंभीर है. अपराध की गंभीरता और प्रथम दृष्टया आवेदक के खिलाफ मौजूद सबूत के मद्देनजर वह जमानत के हकदार नहीं हैं.

कथित उकसावे वाले भाषण से जुड़ा है मामला

बता दें कि गौतम नवलखा (69) को एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में शामिल होने के आरोप में 28 अगस्त 2018 को गिरफ्तार किया गया था. उन्हें शुरुआत में घर में नजरबंद रखा गया, लेकिन बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वह पड़ोसी नवी मुंबई स्थित तलोजा जेल में बंद हैं. यह मामला पुणे के शनिवारवाड़ा में 31 दिसंबर 2017 को हुए एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए कथित उकसावे वाले भाषणों से जुड़ा है.

Also Read: भीमा कोरेगांव मामले में शरद पवार की बढ़ने वाली हैं मुश्किलें, 2 अगस्त को पूछताछ करेगा जांच आयोग
भाषण के बाद भीमा-कोरेगांव में भड़की हिंसा

पुलिस का दावा है कि कथित उकसावे वाले इन भाषणों से शहर के बाहरी इलाके में स्थित भीमा-कोरेगांव युद्ध स्मारक के समीप अगले दिन हिंसा भड़क गई थी. पुणे पुलिस ने यह भी दावा किया था कि माओवादियों ने इस सम्मेलन का समर्थन किया था. एनआईए ने बाद में इस मामले की जांच संभाली और इसमें कई सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा शिक्षाविदों को आरोपी बनाया गया.

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola