विद्यापति ने रचनाओं से लोक संस्कृति को किया अमर
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 28 Apr 2024 11:01 PM
<P>जमशेदपुर. मिथिला सांस्कृतिक परिषद जमशेदपुर के तत्वावधान में रविवार को गोलमुरी स्थित विद्यापति परिसर में विद्यापति की मूर्ति का अतिथियों ने अनावरण किया. इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि
जमशेदपुर. मिथिला सांस्कृतिक परिषद जमशेदपुर के तत्वावधान में रविवार को गोलमुरी स्थित विद्यापति परिसर में विद्यापति की मूर्ति का अतिथियों ने अनावरण किया. इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि विद्यापति ने रचनाओं से लोक संस्कृति को अमर बना दिया.
मुख्य अतिथि विधायक सरयू राय ने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण है. वे जब 10वीं-11वीं क्लास में थे, तो पाठ्यक्रम में विद्यापति की कविता होती थी. विद्वानों ने बहुत सोच-समझकर पाठ्यक्रम में विद्यापति की कविता रखी थी. क्योंकि, उनकी रचना में लोक संस्कृति दिखाई देती है. उन्होंने विद्यापति की अवहट्ट भाषा में लिखे कृति लता और कृति पताका की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें मैथिली, भोजपुरी, ओडिशी, मगही जैसी भाषाओं का समन्वय है. उन्होंने कहा कि उनकी रचनाओं को पढ़ने से लगता है कि उन्हें लोक दर्शन की गहरी समझदारी थी. श्री राय ने कहा कि साहित्य में साहित्यकार अपने इष्ट को साध लेते हैं. तुलसी, सूर ऐसे ही कवि हुए. इस श्रेणी में विद्यापति का नाम भी आता है. बल्कि, विद्यापति को इन दोनों से भी ऊपर रखा जाये तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. विद्यापति की कविता में शृंगार रस भी दिखाई देता है. इसके लिए उन्होंने पदावली का जिक्र किया.कृति लता व कृति पताका में संपूर्ण भारत की झलक
डॉ अशोक अविचल ने कहा कि राजतंत्र के समय में विद्यापति आमजन को लेकर चले. उन्होंने संस्कृत से अलग आमजन की भाषा में रचना की. लोक को कैसा होना चाहिए, उनमें कौन-कौन से गुण होने चाहिए यह विद्यापति की रचना में दिखायी देता है. उनकी कृति लता और कृति पताका संपूर्ण भारत की अवस्था को जानने का स्रोत है. यह साहित्य में इतिहास है. 13हीं-14वीं शताब्दी में विद्यापति की काव्य परंपरा चली. उन्हाेंने कहा कि विद्यापति मैथिली के हैं कि नहीं, भाषा के अतिक्रमण को लेकर विमर्श चल रहा है. क्योंकि, उनकी रचनाओं में मैथिली, बांग्ला, ओड़िया, असमिया आदि भाषाओं के शब्द दिखायी देते हैं. कार्यक्रम को प्रभात खबर जमशेदपुर के संपादक संजय मिश्र, प्रकाश झा, अशोक कुमार दास रवींद्र झा व अन्य ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम का संचालन संस्थान के महासचिव सुजीत कुमार झा ने किया. अध्यक्ष शिशिर कुमार झा ने स्वागत भाषण दिया. पंकज कुमार राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
विद्यापति की रचनाओं की हुई प्रस्तुति
इससे पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने विद्यापति की रचनाओं को प्रस्तुत किया. स्निग्धा झा, दिव्य रत्न, नीलांबर चौधरी, तृषा झा व अन्य ने गीत प्रस्तुत किये. इसका संचालन पंकज झा ने किया. दोपहर एक बजे पंडित विपिन झा की देखरेख में रुद्राभिषेक किया गया. यजमान अनिल झा, अमर झा, रंजीत झा, गोपाल झा व अन्य ने पूजा की. आरती की गयी. मौके पर सभी अतिथियों का पाग, गुलदस्ता और शॉल से स्वागत किया गया. विद्यापति के मूर्तिकार कैलाश चंद्र दास को भी पाग, गुलदस्ता और शॉल देकर सम्मानित किया गया. इस दौरान मोहन ठाकुर, मुक्केबाज, अरुणा झा, शंकर पाठक, धर्मेश झा परिषद के सभी सदस्य व अन्य मौजूद रहे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










