Giridih News: जिनके मन में लोभ है उनका सदा अशौच: आगम शास्त्री

Giridih News: जैन धर्म में उत्तम शौच लालच और सांसारिक इच्छाओं को त्यागकर शरीर, मन और वाणी को शुद्ध रखने के महत्व पर जोर देता है. लालच हमेशा दुख और पीड़ा का कारण बनता है. इससे मुक्त होकर व्यक्ति शांति, आनंद और आध्यात्मिक विकास के लिए जगह बना सकता है.
देर शाम को राजस्थान के सांगानेर से आये आगम जैन शास्त्री का लोगों ने अमृतमयी प्रवचन सुना. इस दौरान नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत जी के मोक्ष कल्याणक विषय पर चर्चा की गई. समाज के उपस्थित लोगों ने एक दूसरे को हार्दिक शुभकामनाएं दी. वहीं पर्युषण महापर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म के विषय में आगम शास्त्री जी ने अपना उद्बोधन पेश किया. उन्होंने कहा कि लोभ मूल है पाप का, सौख्य मूल है शौच, जिनके मन में लोभ है उनका सदा अशौच.
बोले- लालच हमेशा दुख का कारण बनता है
उन्होंने कहा कि जैन धर्म में उत्तम शौच लालच और सांसारिक इच्छाओं को त्यागकर शरीर, मन और वाणी को शुद्ध रखने के महत्व पर जोर देता है. लालच हमेशा दुख और पीड़ा का कारण बनता है. इससे मुक्त होकर व्यक्ति शांति, आनंद और आध्यात्मिक विकास के लिए जगह बना सकता है. उन्होंने कहा कि उत्तम शौच धर्म अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह जैसे अन्य जैन गुणों से निकटता को दर्शाता है. इस कार्यक्रम में सरिया के सकल दिगंबर जैन समाज के महिला-पुरुष व बच्चे शामिल हुए.
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