जीवन का असली उद्देश्य सिर्फ भौतिक सुख नहीं, बल्कि ज्ञान की खोज है : राज्यपाल

Edited by ANURAG PRADHAN
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शुक्रवार को चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (सीएनएलयू) पटना में पहला चाणक्य स्मृति व्याख्यान और 16वीं संसदीय वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई

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-सीएनएलयू में पहला चाणक्य स्मृति व्याख्यान और 16वीं संसदीय वाद-विवाद प्रतियोगिता शुरू

संवाददाता, पटना

भारतीय धार्मिक परंपराएं संविधान से भी ज्यादा उदार और प्रगतिशील हैं. धर्म का असली अर्थ किसी एक पंथ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता की साझा धरोहर है. हर जीव और हर इंसान में ईश्वर का अंश है और जीवन का असली उद्देश्य सिर्फ भौतिक सुख नहीं, बल्कि ज्ञान की खोज है. ये बातें राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शुक्रवार को चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (सीएनएलयू) पटना में पहला चाणक्य स्मृति व्याख्यान और 16वीं संसदीय वाद-विवाद प्रतियोगिता के दौरान कही. कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान मुख्य अतिथि और वक्ता के रूप में शामिल हुए. राज्यपाल ने विद्यार्थियों से विविधता का सम्मान करने और दूसरों की गरिमा को स्वीकारने का आह्वान किया. उन्होंने स्वामी विवेकानंद के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुविधाओं की प्राप्ति नहीं, बल्कि ज्ञान की खोज है. उन्होंने धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मानव कल्याण की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऋग्वेद, उपनिषद और गीता सभी प्राणियों के कल्याण की बात करते हैं. धर्म का सार समझाते हुए उन्होंने कहा ‘जो आचरण आपको कष्ट दे, वह दूसरों के साथ न करें.’ भारतीय परंपरा में ऐसा कोई आचरण धर्म नहीं माना जाता, जो दूसरों के धर्म का उल्लंघन करे. संस्कृत में धर्म के 14 भिन्न अर्थ बताये गये हैं, इसलिए इसे किसी संकीर्ण परिभाषा में सीमित नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथ किसी एक समुदाय की धरोहर नहीं बल्कि पूरी मानवता की साझा संपत्ति हैं. भारतीय परंपरा विविधता में विश्वास करती है और अनेक पथों को सृष्टिकर्ता तक पहुंचने का साधन मानती है. राज्यपाल ने आगे कहा कि रवींद्रनाथ ठाकुर का राष्ट्रवाद-विरोध उनके वैश्विक दृष्टिकोण का परिणाम था, जिसकी जड़ें वैदिक संस्कृति में निहित हैं. सनातन धर्म का वास्तविक स्वरूप आत्मा और परमात्मा के मिलन तथा आत्म-साक्षात्कार की शिक्षा देता है.

वाद-विवाद प्रतियोगिता का उद्घाटन किया

व्याख्यान के बाद राज्यपाल ने 16वीं संसदीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का उद्घाटन किया. इसमें देशभर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों की 20 से अधिक टीमें तीन दिन तक विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर अपनी बात रखेंगी. इस मौके पर कुलपति प्रो फैजान मुस्तफा ने राज्यपाल के आदर्शों और मूल्यों की सराहना की और प्रतिभागियों से संसदीय परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया. वहीं, कुलसचिव प्रो एसपी सिंह ने भी उपस्थित होकर प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया.

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