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Samastipur: स्कूलों में सिलेबस पूरा नहीं, कैसे अर्द्धवार्षिक परीक्षा देंगे छात्र

Updated at : 31 Aug 2025 6:22 PM (IST)
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Samastipur: स्कूलों में सिलेबस पूरा नहीं, कैसे अर्द्धवार्षिक परीक्षा देंगे छात्र

जिले के सरकारी स्कूलों एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ रहे कक्षा एक से आठवीं के विद्यार्थियों की अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के लिए संशोधित टाइम टेबल जारी कर दिया गया है.

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समस्तीपुर . जिले के सरकारी स्कूलों एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ रहे कक्षा एक से आठवीं के विद्यार्थियों की अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के लिए संशोधित टाइम टेबल जारी कर दिया गया है. जिले में कक्षा एक से आठवीं तक कक्षाओं की 11 से 20 सितंबर तक अर्द्धवार्षिक परीक्षा होनी है. इसको लेकर 31 अगस्त तक हर हाल में 75 प्रतिशत कोर्स पूरा कराने को कहा गया है. इसके लिए शिक्षा विभाग ने सभी क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (आरडीडीई) को निर्देशित किया था. सत्र शुरू होने के बाद 35 प्रतिशत भी सिलेबस छात्र-छात्राओं का पूरा नहीं किया गया है. अधिकांश विद्यालय के एचएम ने इसकी रिपोर्ट शिक्षा विभाग को अबत क नहीं भेजी है. एचएम ने कहा कि मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण में हमारे यहां के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी. इसके बाद स्कूल में पानी आ गया. जिस स्कूल में टैग किया गया था, वहां की दूरी अधिक थी. इससे छात्र पढ़ाई करने नहीं आते थे. शिक्षा विभाग से निर्देश है कि अर्द्धवार्षिक परीक्षा को लेकर सिलेबस की समीक्षा की जायेए. परीक्षा से पूर्व सुनिश्चित किया जाना है कि सभी विद्यालय में सिलेबस पूरा कर लिया गया है. जहां सिलेबस पूरा नहीं हुआ है, वहां विशेष कक्षाएं लेकर पूरा करने का निर्देश दिया गया है. लेकिन जिला में सभी मौन बैठे है और अर्द्धवार्षिक परीक्षा की तैयारी में जुटे है.

बच्चों की पढ़ाई हो रही बाधित

शिक्षकों को मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण कार्य में बीएलओ के रूप में लगाये जाने के बाद अधिकांश स्कूलों में पढ़ाई बाधित है. अधिकांश जगहों पर आधे शिक्षक मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण कार्य में लगे हुये हैं. इस कारण स्कूल की कई कक्षाएं मर्ज कर चलाई जा रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है. स्कूल के प्रधानाचार्यों ने कहा कि शिक्षकों की ड्यूटी इस तरह के कार्यों में लगाना कहीं से उचित नहीं, क्योंकि इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है. ये बच्चे रोजाना स्कूल तो आ रहे हैं, लेकिन, बिना पढ़ाई किये ही दिनभर स्कूल कैंपस व क्लासरूम में खेल कर वापस घर लौट जा रहे हैं. शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने की बजाय अब बीएलओ की भूमिका में अपनी ड्यूटी दे रहे हैं. ये मतदाता गणना प्रपत्र प्रारूप से जुड़े काम में लगे हैं. इससे स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल बिगड़े तो बिगड़े, इससे जिला प्रशासन को कोई मतलब नहीं. प्रशासन का तर्क है कि यह काम राष्ट्रहित में जरूरी है. इधर, शिक्षक संगठनों ने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता संवर्धन संबंधी विभिन्न सर्वे रिर्पोटों और अध्ययनों में शिक्षकों पर गैर अकादमिक कार्यों के बढते बोझ को शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में सबसे बड़ी बाधा बताया गया है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिट्रेशन (नीपा) की रिपोर्ट के मुताबिक देश में स्कूलों के शिक्षकों का काफी समय गैर अकादमिक कार्यों में लग जाता है, जो कि शैक्षिक गुणवत्ता में बड़ी बाधा है. निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 27 के अनुसार शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में लगाने पर रोक है. प्रख्यात शिक्षाविद डा. दशरथ तिवारी ने भी इस संदर्भ में कहा है कि शिक्षकों पर काफी सारी जिम्मेदारी डाल दी गई है. यह मान कर चला जा रहा है कि उन्हें कहीं भी लगा दो, यह ठीक नहीं है. अकादमिक कार्यों पर ध्यान देना जरूरी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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