न्याय की रफ्तार धीमी! पटना जिला आयोग में चार हजार केस पेंडिंग

पटना. जिला उपभोक्ता आयोग में करीब 4 हजार केस पेंडिंग है. ऑनलाइन केस सुनवाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण न्याय की रफ्तार धीमी हो गई है. करीब 15
पटना. जिला उपभोक्ता आयोग में करीब 4 हजार केस पेंडिंग है. ऑनलाइन केस सुनवाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण न्याय की रफ्तार धीमी हो गई है. करीब 15 साल पुराने मामले भी लंबित हैं. वहीं आयोग के अध्यक्ष अतिरिक्त प्रभार के कारण हफ्ते में केवल 4 दिन ही सुनवाई कर पाते हैं. राजधानी पटना के जिला उपभोक्ता आयोग में ऑनलाइन केस सुनवाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण शिकायतकर्ताओं को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. करीब चार हजार से अधिक केस पेंडिंग है. बताया जा रहा है कि उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों की भारी कमी के कारण न्याय की रफ्तार सुस्त पड़ गई है. ताजा स्थिति को देखे तो आयोग में करीब चार हजार मामले लंबित हैं. जिनमें से कई मामले तो करीब 15 साल पुराने हैं. उपभोक्ता आयोग की स्थिति यह है कि आयोग के अध्यक्ष भी अतिरिक्त प्रभार पर हैं. हफ्ते में केवल चार दिन ही होती है सुनवाई जानकारी अनुसार आयोग के अध्यक्ष पर अतिरिक्त प्रभार रहने के कारण वो हफ्ते में केवल चार दिन ही पटना में सुनवाई कर पाते हैं.आयोग में कई पद भी खाली है.बताया जा रहा है कि आयोग में महिला सदस्य का पद रिक्त है और वर्तमान में केवल पुरुष सदस्य रजनीश कुमार ही कार्यरत हैं. उपभोक्ता आयोग की सबसे बड़ी दिक्कत है तकनीकी रूप से पिछड़ापन.आयोग में ऑनलाइन पेशी की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे उपभोक्ताओं को पूरे दिन अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है. ऑनलाइन सुविधा मिलने के फायदे वहीं इसी कारणवश कोई शिकायतकर्ता उपस्थित नहीं हो पाते हैं तो फिर आयोग उन्हें लंबी तारीख दे देती है.माना जा रहा है कि ऑनलाइन व्यवस्था न होने से पारदर्शिता और समय की बचत दोनों प्रभावित हो रही हैं.यदि आयोग ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध करा दे तो लोग घरों से ही कोर्ट में पेश हो सकते हैं.कई बार आयोग के अध्यक्ष या सदस्य भी किसी कार्यक्रम और बैठक में शामिल होते हैं तो वो भी मोबाइल और लैपटॉप के जरिए ऑलाइन फैसला सुना सकेंगे. आयोग में वित्तीय संकट जानकारी के अनुसार आयोग में फंड की भारी किल्लत है। आयोग के पास काम करने के लिए न तो आधुनिक कंप्यूटर हैं और न ही पर्याप्त संख्या में स्टेनोग्राफर.वित्तीय स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आयोग को सुचारू संचालन के लिए प्रति तिमाही करीब पांच लाख रुपये की आवश्यकता है,लेकिन आवंटन के रूप में महज 50 हजार रुपये ही मिल रहे हैं. आयोग की मांगे नहीं हो रही पूरी इसी सीमित राशि में स्टेशनरी,डाक रजिस्ट्री,साफ-सफाई व पुराने पड़ चुके एसी व प्रिंटर का मेंटेनेंस करना पड़ता है.बजट और बुनियादी ढांचे की इस कमी का सीधा असर मुकदमों की सुनवाई पर पड़ रहा है.अगर आयोग को मांग के अनुसार फंड और जरूरी उपकरण मिलें,तो काम की गति को दोगुना किया जा सकता है. सीमित संसाधनों में भी पटना आयोग ने बनाया रिकॉर्ड पटना जिला उपभोक्ता आयोग विपरीत परिस्थितियों व संसाधनों के अभाव के बावजूद कार्यकुशलता की मिसाल पेश की है.साल 2025 में 1050 मामलों का निपटारा कर यह आयोग देशभर में टॉप-10 और बिहार में पहले नबंर पर जिला आयोगों में शामिल रहा.वर्तमान में यहां हर दिन औसतन 50-60 मामलों की सुनवाई होती है,जिनमें से 20-25 मामलों में फैसला सुनाया जाता है. कैसे सुनवाई में आएगी तेजी? हर महीने लगभग 80 से 100 केस का डिस्पोजल किया जा रहा है.जानकारों का मानना है कि यदि आयोग को पूर्णकालिक अध्यक्ष, महिला सदस्य की नियुक्ति व आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर मिल जाए,तो तेजी से सुनवाई हो सकती है.
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