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खानाबाड़ी के दुर्गापूजा में झलकती है बंगाल की संस्कृति

Updated at : 25 Sep 2025 7:35 PM (IST)
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खानाबाड़ी के दुर्गापूजा में झलकती है बंगाल की संस्कृति

जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत पौआखाली थाना क्षेत्र के खानाबाड़ी ग्राम में पौराणिक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में अवस्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मां आदिशक्ति की पूजा उपासना जारी है.

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रणविजय सिंह,पौआखालीजिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत पौआखाली थाना क्षेत्र के खानाबाड़ी ग्राम में पौराणिक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में अवस्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मां आदिशक्ति की पूजा उपासना जारी है. गुरुवार को माता के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूरे विधि विधान के साथ पुरोहित विष्णुकांत झा ने पूजा आरती संपन्न की. नवरात्र के प्रारंभ दिन से ही मंदिर में प्रत्येक अहले सुबह चंडीपाठ का वाचन किया जाता है जिसे श्रवण करने काफी संख्या में श्रद्धालु की उपस्थिति रहती है. धूमधाम से पूजा उत्सव मनाने को लेकर मंदिर परिसर को पंडाल आदि से सजाने संवारने का काम भी जारी है.

राजा रजवाड़ों के जमाने से ही है मंदिर का अस्तित्व

खानाबाड़ी दुर्गा मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है. कहा जाता है कि किसी कालखंड में इस इलाके में रानी पद्मावती का राज हुआ करता था और उसी कालखंड में मंदिर का निर्माण भी हुआ और पूजा उपासना का दौर प्रारंभ हुआ। मान्यता है कि यहां जो भी भक्त आते हैं मां आदिशक्ति उनकी मनोकामना अवश्य पूरी करती है.

पूजा में बंगाल की संस्कृति की झलक देखने को मिलती

है

दुर्गापूजा के दौरान इस मंदिर में बंगाल की संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. दरअसल इस मंदिर में बांग्ला पद्धति से मां आदिशक्ति की पूजा की परंपरा रही है यहां तांत्रिक विधि से भी पूजा होती है. गुड़हल फूल और धुनुची से मां की वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा आरती की जाती है. महिलाएं मां के लिए खिचड़ी पूड़ी हलवा आदि प्रसाद घर से तैयार कर भोग लगाती है. मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान दुर्गापूजा उत्सव में माता के उपासकों की भारी संख्या में हाजिरी लगती है. महाअष्टमी और महानवनी के मिलन काल में संधि पूजा के दौरान 108 दीयों को प्रज्वलित करते है. नवमी पूजन में पाठा बलिदान की परंपरा है. इस दिन यहां दूर दराज से भक्त आते हैं और चढ़ावा चढ़ाकर मनोकामना पूर्ति का मां से आशीर्वाद लेते है.

खिचड़ी पूड़ी नारियल के लड्डू का चढ़ता है

भोग

बंगाल का पारंपरिक व्यंजन खिचड़ी चर्चोरी बेगूनी और पूड़ी हलवा नारियल लड्डू का भोग मां को काफी पसंद है इसलिए पूजा के दौरान मां को खिचड़ी बेगुनी पूड़ी आदि का भोग लगाया जाता है. खिचड़ी प्रसाद पाने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहती है. खासकर दशमी पूजन के बाद इस मंदिर में खिचड़ी प्रसाद का महाभोग चढ़ाया जाता है.

सिंदूर और बिंदी लगाकर महिलाएं मां से लेती हैं सदा सुहागन का

आशीर्वाद

पूजा के दौरान सुहागिन महिलाएं माता को सिंदूर बिंदी लगाकर सदा सुहागन होने की कामना करती है. इस दौरान महिलाएं मां को नारियल लड्डू से मुख मिष्टी कर आंचल से मां का मुख पोछ्ती हैं फिर सिंदूर खेल का आयोजन करती है. महिला श्रद्धालु माता को सौलह श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करती है. मां की सेवा में मंदिर के आसपास की महिलाएं दिन रात लगी रहती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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