रेप की बढ़ती घटनाओं पर रांची की लड़कियों ने कहा, लड़के भी तो हॉफ टी-शर्ट में घूमते हैं, हम तो रेप नहीं करते....
Updated at : 30 May 2017 4:01 PM (IST)
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-रजनीश आनंद के साथ बुधमनी- रांची : जब भी हमारे समाज में बलात्कार की घटना होती है, लोग निंदा करते हैं. पीड़िता के साथ सहानुभूति होने का दावा करते हैं, कहते हैं कि लड़की को न्याय मिलना चाहिए, यह भी कहते हैं कि ऐसी घटनाएं थमने चाहिए. बावजूद इसके हमारे समाज में बलात्कार की घटना […]
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-रजनीश आनंद के साथ बुधमनी-
रांची : जब भी हमारे समाज में बलात्कार की घटना होती है, लोग निंदा करते हैं. पीड़िता के साथ सहानुभूति होने का दावा करते हैं, कहते हैं कि लड़की को न्याय मिलना चाहिए, यह भी कहते हैं कि ऐसी घटनाएं थमने चाहिए. बावजूद इसके हमारे समाज में बलात्कार की घटना थम नहीं रही. अभी कल ही बिहार से एक खबर आयी है कि मधुबनी जिले में कक्षा सात की एक लड़की का अपहरण करके उसके साथ बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गयी.
इस घटना के दोषियों को सजा होगी, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन सुनवाई में इतना समय लगेगा कि लोग हताश हो जाते हैं. लड़कियां खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं. उनके अंदर समाज के प्रति एक गुस्सा है, जिसे वह व्यक्त करना चाहती हैं. आज हमने रांची वूमेंस कॉलेज की कुछ छात्राओं से बातचीत की.
ये लड़के भी तो बिना शर्ट के या हॉफ टी-शर्ट में सड़क पर घूमते हैं, तब तो हम उनके साथ रेप नहीं करते. हमारे मन में भी तो भावनाएं हैं, लेकिन हम तो रियेक्ट नहीं करते, फिर ये लड़के क्यों ऐसा करते हैं. रांची वूमेंस कॉलेज की छात्रा स्मृति पांडेय ने उक्त बातें हमारे साथ बातचीत में कही. देश में हो रही बलात्कार की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए स्मृति ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि कोई कमेटी गठित करने या कठोर कानून बना देने से बलात्कार की घटनाएं रूकेंगी. जब तक लोग अपनी सोच नहीं बदलेंगे, तब तक देश में बलात्कार की घटनाएं होती रहेंगी.
वहीं एक अन्य छात्रा मेघा स्मृति केरकेट्टा ने कहा कि बलात्कार की घटनाएं समाज में नहीं थमती इसका सबसे बड़ा कारण है समाज में दी जा रही परवरिश. हमारा समाज पुरुष प्रधान हैं, यहां लड़कियों को इस तरह से पाला-पोसा जाता है कि उनके प्रति समाज में एक अच्छी सोच नहीं बन पाती. जबतक समाज और परिवार में लड़कों को सही परवरिश नहीं दी जायेगी, इस तरह की घटनाओं को रोक पाना मुश्किल है. साथ ही न्याय व्यवस्था में भी सुधार की जरूरत है. बलात्कार पीड़िताओं को न्याय मिलने में काफी देरी होती है. जरूरत इस बात की है कि उन्हें जल्दी न्याय दिलाया जाये.
करीबी लोगों द्वारा बलात्कार किये जाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्राएं कहतीं हैं कि बिना सोच बदले बलात्कार की घटनाएं नहीं थम सकतीं. हमारे समाज को कैंसर हो गया है. छोटी बच्चियों को लोग बहला-फुसलाकर ले जाते हैं और उनके साथ बलात्कार करते हैं. अब इसे क्या कहा जाये. जरूरत इस बात की है कि लोग सोच बदलें.
पार्ट -2 की छात्रा रूकैया और शबनम ने भी यह कहा कि बलात्कार की घटनाएं तब तक नहीं रूकेंगी तब तक कि लोग सोच नहीं बदलेंगे. मेघा का कहना है कि लड़के ‘रिजेक्शन’ बर्दाश्त नहीं कर पाते और बलात्कार करते हैं, इसलिए जरूरत इस बात की भी है कि उन्हें बताया जाये कि हमारी सहमति के भी मायने हैं.
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