पुराने जमाने में हर घर के बाहर क्यों होता था चबूतरा? वजह है बेहद दिलचस्प

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पुराने घर के बाहर बने चबूतरे की सांकेतिक फोटो

Why old indian houses had platforms: पुराने समय के घरों के बाहर बना चबूतरा सिर्फ एक डिजाइन का हिस्सा नहीं था. इसके पीछे ऐसी कई दिलचस्प वजहें छिपी थीं, जिनके बारे में आज बहुत कम लोग जानते हैं. आइए जानते हैं आखिर इसे इतना खास क्यों माना जाता था.

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Why old indian houses had platforms: अगर आपने गांवों या पुराने समय के बने मकानों को ध्यान से देखा होगा, तो उनके मुख्य दरवाजे के बाहर एक ऊंचा चबूतरा जरूर नजर आया होगा. आज के आधुनिक घरों में यह डिजाइन कम ही देखने को मिलता है, लेकिन पहले के समय में चबूतरा लगभग हर घर का जरूरी हिस्सा माना जाता था. यह केवल बैठने की जगह नहीं था, बल्कि परिवार और समाज की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाता था.

लोगों के मिलने-जुलने का केंद्र

पहले के समय में लोगों के पास मनोरंजन के साधन बहुत सीमित थे. शाम के समय पड़ोसी और गांव के लोग घर के बाहर बने चबूतरे पर बैठकर बातचीत करते, हालचाल पूछते और दिनभर की बातें साझा करते थे. इस तरह चबूतरा सामाजिक मेल-जोल को बढ़ाने का एक अहम स्थान हुआ करता था.

घर की निजता बनाए रखने में मददगार

पुराने समय में अगर कोई मेहमान या बाहरी व्यक्ति घर आता था, तो उसे सीधे अंदर ले जाने के बजाय चबूतरे पर ही बैठाया जाता था. इससे घर के भीतर रहने वाले लोगों, खासकर महिलाओं की निजता बनी रहती थी. साथ ही घर का कामकाज भी बिना किसी रुकावट के चलता रहता था.

रोजमर्रा के कामों के लिए उपयोगी

चबूतरा महिलाओं के लिए भी काफी काम की जगह था. यहां बैठकर अनाज साफ करना, सब्जियां काटना, अचार या पापड़ सुखाना, सर्दियों में धूप सेंकना और पड़ोस की महिलाओं के साथ बातचीत करना आम बात थी. इसलिए यह घर की दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था.

बारिश और गंदगी से बचाव

ऊंचे चबूतरे का एक व्यावहारिक फायदा भी था. इससे बारिश का पानी, कीचड़ और धूल-मिट्टी सीधे घर के अंदर नहीं पहुंच पाती थी. साथ ही जमीन से ऊंचाई होने के कारण कई छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़ों के घर में आने की संभावना भी कम हो जाती थी.

इसलिए खास था चबूतरा

पुराने समय का चबूतरा केवल घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए नहीं बनाया जाता था. यह सामाजिक जीवन, घर की सुरक्षा, परिवार की निजता और रोजमर्रा की सुविधाओं का अहम हिस्सा था. यही वजह है कि आज भी पुराने घरों की बात होती है, तो उनके बाहर बने चबूतरे की अपनी एक अलग पहचान और महत्व याद किया जाता है.

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पुष्पांजलि

लेखक के बारे में

By पुष्पांजलि

मेरा नाम पुष्पांजलि है. मैं पिछले 2.5 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रही हूं. इस दौरान मैंने मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, हेल्थ, फैशन, ब्यूटी और होम टिप्स से जुड़े कंटेंट पर काम किया है. मुझे ऐसे आर्टिकल लिखना पसंद है जो आसान भाषा में हों और पाठकों के लिए उपयोगी भी हों. मैं ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर रिसर्च करके SEO-फ्रेंडली कंटेंट तैयार करती हूं. इसके साथ ही आकर्षक हेडलाइन लिखना, सही जानकारी जुटाना और डिजिटल ऑडियंस की पसंद के अनुसार कंटेंट तैयार करना मेरी प्रमुख जिम्मेदारियों का हिस्सा रहा है. मैं हमेशा नई चीजें सीखने और अपने लेखन को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. मेरा उद्देश्य ऐसा कंटेंट तैयार करना है जो लोगों तक सही जानकारी सरल और दिलचस्प तरीके से पहुंचाए.

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