Independence Day 2023 Trip: स्वतंत्रता दिवस पर करें साबरमती आश्रम की सैर, बढ़ जाएगा देशभक्ति का जज्बा
Published by : Shaurya Punj Updated At : 11 Aug 2023 8:31 AM
Independence Day 2023 Trip: स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर आप अहमदाबाद के साबरमती आश्रम (Sabarmati Ashram) जरूर घूमने जाएं. यहां गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हजारों पर्यटक घूमने आते हैं.
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अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हजारों पर्यटक घूमने आते हैं
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साबरमती आश्रम को गांधी आश्रम और सत्याग्रह आश्रम के नाम से भी जाना जाता है
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देशभक्ति के उसी दौर को महसूस करना हो तो अहमदाबाद में स्थित साबरमती आश्रम जरूर जाएं
Independence Day 2023 Trip: भारत को अंग्रेजों से आजाद कराने में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के योगदान को भला कौन भूल सकता है. स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर आप अहमदाबाद के साबरमती आश्रम (Sabarmati Ashram) जरूर घूमने जाएं. यहां गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हजारों पर्यटक घूमने आते हैं.
भारत की आजादी की बात हो और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम न आए, ऐसा मुमकिन नहीं. महात्मा गांधी ने देश की आजादी के लिए बड़ा योगदान दिया. उनकी कई यात्राएं, अंग्रेजी सामान का बहिष्कार, उनका चरखा, उनका जीवन सब कुछ एक आदर्श बन गया. ऐसे में आपको देशभक्ति के उसी दौर को महसूस करना हो तो अहमदाबाद में स्थित साबरमती आश्रम जरूर जाएं. साबरमती आश्रम को गांधी आश्रम और सत्याग्रह आश्रम के नाम से भी जाना जाता है.
साबरमती आश्रम की स्थापना
गांधीजी ने साबरमती आश्रम से नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया, जिसे दांडी मार्च भी कहा जाता है. इसे सत्याग्रह आश्रम, साबरमती आश्रम भी कहा जाता है. साबरमती आश्रम को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर इस मार्च के महत्वपूर्ण प्रभाव की पहचान के लिए भारत सरकार द्वारा एक राष्ट्रीय स्मारक नामित किया गया है.
एक वकील और गांधी मित्र जीवनलाल देसाई ने 25 मई, 1915 को गांधीजी के भारत आश्रम के लिए पहले स्थान के रूप में कोचरब बंगला खोला. उस समय आश्रम का नाम सत्याग्रह आश्रम था. दूसरी ओर, गांधी खेती और पशुपालन सहित विभिन्न प्रकार की गतिविधियों में संलग्न होना चाहते थे, जिसके लिए बड़ी मात्रा में उपयोगी भूमि की आवश्यकता होती थी.
इस प्रकार, दो साल बाद, 17 जून, 1917 को, आश्रम को साबरमती नदी के तट पर 36 एकड़ की जगह पर स्थानांतरित कर दिया गया और साबरमती आश्रम के रूप में जाना जाने लगा.
गांधी स्मारक संग्रहालय, एक संग्रहालय, अब आश्रम के भीतर स्थित है. यह मूल रूप से आश्रम, हृदय कुंज में गांधी की अपनी झोपड़ी में स्थित था.
संग्रहालय का निर्माण 1963 में वास्तुकार चार्ल्स कोरिया के डिजाइन के बाद किया गया था. इसके बाद संग्रहालय को खूबसूरती से निर्मित और सुसज्जित संग्रहालय भवन में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसे 10 मई, 1963 को भारत के प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा खोला गया था. फिर, स्मारक सेवाएं चल सकती थीं.
राष्ट्रीय स्मारक
गांधीजी का देहांत होने के बाद उनकी स्मृतियों को जीवित रखने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय स्मारक को भी यही स्थापित किया गया है. गाँधी स्मारक निधि नाम के संघठन ने भी यह फैसला किया है कि वे आश्रम में गांधीजी से सम्बंधित भवनों को सुरक्षा देगे.
इसी कारण से साल 1951 में साबरमती आश्रम सुरक्षा एवं स्मृति न्यास की शुरुआत हुई. ये न्यास गांधीजी के आवास, ह्रदयकुञ्ज, उपासनाभूमि (प्रार्थना स्थल) एवं मगन आवास के लिए सुरक्षा के काम करता है.
निवास स्थान
1915 से 1933 तक गाँधीजी इस आश्रम में रहे थे. उस समय वे एक छोटी सी कुटिया में रहा करते थे जिसको अब ‘हृदय-कुञ्ज’ कहते है. ये इतिहास की दृष्टि से भी बहुत महत्व का स्थान है चूँकि यही पर उनकी मेज, पत्र, खादी का कुर्ता इत्यादि मिलते है.
हृदय-कुञ्ज के दाई तरफ ‘नंदिनी’ है. ये अब ‘अतिथि-कक्ष’ भी है जहाँ पर देश-विदेश के आने वाले मेहमान रुकते है. इसी के पास विनोबा भावे की कुटिया ‘विनोबा कुटिया’ भी है जिसमे वे एक समय ठहरे थे.
ह्रदय कुंज
ये कुटिया आश्रम के मध्य स्थान पर स्थित है जिसका नाम ‘काका साहब कालेकर’ ने दिया था. 1919 से 1930 के मध्य का समय गांधीजी ने इसी स्थान पर व्यतीत किया था. इसी जगह से गाँधीजी ने अपनी दांडी यात्रा भी शुरू की थी.
विनोबा-मीरा कुटीर
1918 से 1921 के मध्य इसी स्थान पर आचार्य विनोबा भावे में कुछ माह तक निवास किया था. इसी प्रकार से गाँधीजी की विचारधारा से प्रभावित हुई ब्रिटिश महिला मेडलीन स्लेड भी इसी स्थान पर रही थी. गाँधीजी ने इस महिला का नाम ‘मीरा’ दिया था. ऐसे ही इन दोनों ही लोगो के नाम पर इस कुटिया को इसका नाम दिया गया था.
प्रार्थना भूमि
यहाँ पर आकर हर दिन आश्रम में रहने वाले लोग प्रातः एवं साय काल की प्रार्थना करते है. ये भूमि गाँधीजी के ऐतिहासिक फैसलों की भी गवाह रह चुकी है.
नंदिनी अतिथिगृह
इस आश्रम से ही कुछ दूरी में गेस्ट हाउस नंदिनी है. इस स्थान पर देश के विभिन्न स्वतंत्रता सेनानी जैसे – जवाहर लाल नेहरू, राजेन्द्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी, दिनबंधु एंड्रयूज एवं रविंद्रनाथ इत्यादि अहमदाबाद आने पर रुका करते थे.
उद्योग मन्दिर
गाँधी जी ने देश को स्वतंत्र करने के लिए हाथो से बने खादी को तैयार करने की योजना बनाई थी. ऐसे उन्होंने मानवीय परिश्रम को ही आत्मनिर्भरता एवं आत्मसम्मान का प्रतीक बताया था. इसी स्थान पर रहकर गांधीजी ने अपने वित्तीय सिद्धांतो को व्यवहारिक रूप प्रदान किया था. इसी जगह पर उन्होंने चरखे पर सूत कातने के काम के द्वारा कपडा बनाने को शुरू किया था.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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