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Golden Temple: संगमरमर और तांबे से बना यह मंदिर है सिख धर्म का पवित्र तीर्थ स्थल

Updated at : 12 Aug 2024 9:13 AM (IST)
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Golden Temple, Amritsar

Golden Temple: अमृतसर का स्वर्ण मंदिर सिख धर्म का पवित्र तीर्थ स्थल है. इस गुरूद्वारे का जुड़ाव प्रसिद्ध सिख शासक महाराणा रणजीत सिंह से भी रहा है. इस गुरुद्वारे में मिलने वाला लंगर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित है. तो चलिए आज आपको बताते हैं स्वर्ण मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें.

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Golden Temple: अमृतसर का स्वर्ण मंदिर सिख धर्म के प्रसिद्ध गुरुद्वारों में से एक है. इस पवित्र स्थान को श्री हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है. स्वर्ण मंदिर की वास्तुकला, नक्काशी, सालों पुराना इतिहास और लंगर, इसे खास बनाते हैं. स्वर्ण मंदिर सर्वधर्म एकता का प्रतीक है. यह पवित्र तीर्थ स्थल न केवल सिख धर्म बल्कि अन्य धर्म के लोगों के लिए भी आस्था का केंद्र है. इस पवित्र तीर्थ स्थल से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जो आपको स्वर्ण मंदिर आने पर विवश कर देंगी. अगर आप भी पंजाब के खेतों की खुशबू का एहसास लेने का प्लान बना रहे हैं, तो जरूर आएं विश्व प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर.

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सिखों का आध्यात्मिक केंद्र है स्वर्ण मंदिर

अमृतसर का स्वर्ण मंदिर सिख धर्म के समृद्ध इतिहास और विकास का प्रतीक है. सफेद संगमरमर और तांबे से बने इस गुरुद्वारे की स्थापना सिख धर्म के चौथे गुरु रामदास ने की थी. जबकि इस पवित्र स्थल का निर्माण कार्य सिखों के पांचवे गुरु अर्जन देव ने पूरा किया था. स्वर्ण मंदिर की शानदार स्थापत्य कला सिख धर्म के मूल सिद्धांतों को दर्शाती है, जिसमें विनम्रता, समानता और आध्यात्मिकता शामिल है. इस पवित्र गुरुद्वारे के चार दरवाजे सभी वर्गों के लिए खुले रहते हैं. स्वर्ण मंदिर के प्रति सिख धर्म के अनुयायियों में अपार आस्था और विश्वास है. इस खूबसूरत और प्राचीन गुरुद्वारे का जुड़ाव महाराजा रणजीत सिंह से भी है.

सिख धर्म के प्रसिद्ध और प्रमुख शासक रहे महाराजा रणजीत सिंह ने स्वर्ण मंदिर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण में अहम भूमिका अदा की थी. महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल के दौरान इस पवित्र गुरुद्वारे पर सोने का पानी चढ़ाया गया था. सिख विरासत का प्रमाण स्वर्ण मंदिर अपने आध्यात्मिक महत्व और खूबसूरत वास्तुकला के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है.

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यहां का लंगर है खास

लंगर और गुरुद्वारे का नाता सालों पुराना है. गुरु नानक देव का कहना था कि भूखे को खाना खिलाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता. नानक देव की इसी बात को ध्यान में रखते हुए सदियों से अमृतसर के स्वर्ण मंदिर सहित अन्य गुरुद्वारों में लोगों को लंगर की सेवा दी जाती है.

सिख धर्म में लंगर सामुदायिक रसोई को संदर्भित करता है. अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में दुनिया की सबसे बड़ी सामुदायिक रसोई है, जहां हर दिन 50,000 से लेकर 1,00,000 लोगों को मुफ्त में प्रेम भाव के साथ गर्म खाना परोसा जाता है. लंगर सिख धर्म की वो सेवा है जिसमें लोगों की धर्म, जाति, लिंग और स्थिति की परवाह किए बगैर खाना खिलाया जाता है, जो मुफ्त होता है. स्वर्ण मंदिर में लंगर की परंपरा सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव के समय से चली आ रही है.

स्वर्ण मंदिर में सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे चलने वाला लंगर सिख समुदाय और अनेकों नेक दिल लोगों के दान से चलाया जाता है. इस भोजन में शाकाहारी खाना शामिल होता है. स्वर्ण मंदिर में लंगर बनाने के लिए कई खास मशीनों का उपयोग किया जाता है. स्वर्ण मंदिर के लंगर सेवा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रशंसित किया जा चुका है.

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Rupali Das

लेखक के बारे में

By Rupali Das

नमस्कार! मैं रुपाली दास, एक समर्पित पत्रकार हूं. एक साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं. यहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पहले दूरदर्शन, हिंदुस्तान, द फॉलोअप सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी काम करने का अनुभव है.

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