झारखंड में यहां पर है मंदिरों का गांव,  ऐसे करें इस जगह को एक्सप्लोर

Published by : Shaurya Punj Updated At : 31 Jul 2023 9:00 AM

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How to Visit Maluti, the village of temples: मलूटी में लगातार सौ वर्षों तक मंदि‍र बनाये गये. शुरू में यहां सब मि‍लाकर 108 मंदि‍र थे जो अब घटकर 65 रह गये हैं. इनकी ऊंचाई कम से कम 15 फुट तथा अधि‍कतम 60 फुट है.

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झारखंड के दुमका जिले में शिकारीपाड़ा के पास बसे एक छोटे से गांव मलूटी में आप जिधर नजर दौड़ाएंगे आपको हर ओर सिर्फ प्राचीन मंदिर ही मंदिर नजर आएंगे.  पूर्वोतर भारत में प्रचलि‍त लगभग सभी प्रकार की शैलि‍यों का नमूना दि‍खा हमें. मलूटी में लगातार सौ वर्षों तक मंदि‍र बनाये गये. शुरू में यहां सब मि‍लाकर 108 मंदि‍र थे जो अब घटकर 65 रह गये हैं. इनकी ऊंचाई कम से कम 15 फुट तथा अधि‍कतम 60 फुट है. मलूटी के अधिकांश मंदिरों के सामने के भाग के ऊपरी हिस्से में संस्कृत या प्राकृत भाषा में प्रतिष्ठाता का नाम व स्थापना तिथि अंकित है. इससे पता चलता है कि इन मंदिरों की निर्माण अवधि वर्ष 1720 से 1845 के भीतर रही है. हर जगह करीब 20-20 मंदिरों का समूह है. हर समूह के मंदिरों की अपनी ही शैली और सजावट है.

मंदिरों का गांव क्यों है प्रसिद्द

इस गांव को ‘मंदिरों के गांव-मलूटी’ के नाम से जाना जाता है. इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यहां बने हुए टेराकोटा शैली के मंदिर हैं. ये मंदिर अलग-अलग नहीं बने हुए हैं वरन एक पूरी श्रृंखला के रूप में बने हुए हैं. इस आकर्षक झांकी की प्रस्तुति से पूरे देश में यह गांव अपनी पहचान स्थापित कर चुका है. जिसे द्वितीय पुरस्कार भी मिला था.

मंदिरों के गांव का इतिहास

मलूटी में पहला मंदिर 1720 ई में वहां के जमीनदार राखड़चंद्र राय के द्वारा बनाया गया था. राजा बाज बसंत के परम भक्‍त राजा राखड़चंद्र राय तंत्र साधना में वि‍श्‍वास रखते थे. वह मां तारा की पूजा के लि‍ए नि‍यमि‍त रूप से तारापीठ जाते थे. मलूटी से तारापीठ की दूरी महज 15 कि‍लोमीटर है. बाद में मलूटी ननकर राज्‍य के राजा बाज बसंत के वंशजों ने इन मंदि‍रों का नि‍र्माण करवाया. ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, गौड़ राज्य के बादशाह अलाउद्दीन हुसैन शाह (1493-1519) द्वारा दी गई जमीन पर मलूटी ‘कर मुक्त राज्य’ की स्थापना हुई थी.

इन देवताओं के हैं मंदिर

हिंदू धर्म में पूज्य माने गए लगभग सभी देवी-देवताओं के मंदिर यहां पर मिल जाएंगे. मलूटी गांव के चारों ओर भगवान विष्णु, भगवान शिव, काली, दुर्गा, मनसा देवी, धर्मरा तथा मां मौलिक्षा देवी के मंदिर निर्मित किए गए हैं. राज्य सरकार इस गांव को यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल कराने के प्रयासों में जुटी हुई है. वर्ष 2015 में तत्कालीन अमरीकी प्रधानमंत्री बराक ओबामा भी यहां आकर आश्चर्यचकित हो चुके हैं.

पशु बली के लिए भी प्रसिद्ध है मलूटी गांव

मलूटी पशुओं की बली के लिए भी जाना जाता है. यहां काली पूजा के दिन एक भैंस और एक भेड़ सहित करीब 100 बकरियों की बली दी जाती है. हालांकि पशु कार्यकर्ता समूह अक्सर यहां पशु बली का विरोध करते रहते हैं. मलूटी के मंदिरों की यह खासियत है कि ये अलग-अलग समूहों में निर्मित हैं. भगवान भोले शंकर के मंदिरों के अतिरिक्त यहां दुर्गा, काली, धर्मराज, मनसा, विष्णु आदि देवी-देवताओं के भी मंदिर हैं.

कैसे पहुँचें मलूटी गांव

‘रामपुर हाट’ मलूटी गाँव का निकटतम रेलवे स्टेशन है. यहाँ तक दुमका-रामपुर सड़क पर ‘सूरी चुआ’ नामक स्थान पर बस से उतर कर उत्तर की ओर 5 किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचा जा सकता है.

मलूटी के अतिरिक्त और क्या ?

यहाँ मलूटी के अतिरिक्त देखने के लिए बहुत कुछ है. जैसे मसनजोर बांध, बाबा बासुकीनाथ धाम, कुमराबाद, बाबा सुमेश्वर नाथ मंदिर और मयूराक्षी नदी.

मसनजोर बांध: मयूराक्षी नदी पर बना यह बांध और झील पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है.

बाबा बासुकीनाथ धाम: महादेव को समर्पित यह धाम देवघर – दुमका मार्ग पर स्थित है. श्रावण माह में यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है.

कुमराबाद: ऊँची पहाड़ियों से घिरा और मयूराक्षी नदी के किनारे पर बसा कुमराबाद एक खूबसूरत पिकनिक स्थल के रूप में उभरा है.

बाबा सुमेश्वर नाथ मंदिर: यह मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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