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Sawan Somwar Vrat 2021: सावन के पहले सोमवार पर बन रहा है ये खास योग, जानें तिथि, मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व

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Sawan Somvar Vrat 2021, Vrat Katha: हिंदी पंचांग के अनुसार इस साल सावन का महीना 25 जुलाई से शुरू हो रहा है जो 22 अगस्त तक रहेगा. सावन का पहला सोमवार 26 जुलाई को पड़ रहा है. जो कोई भक्त सावन में पड़ने वाले सोमवार का व्रत सच्चे मन से करता है भोलेनाथ उसकी सारी मुरादें पूरी करती हैं.

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पहली सोमवारी को सूना रहा बाबा का दरबार

सावन महीने में सोमवार को खास महत्व है. देवघर में हर साल लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती थी. लेकिन इस बार कोरोना के कारण बाबा बैद्यनाथ मंदिर बंद रहने के कारण भक्त निराश हैं. सोमवारी पर उन्हें पूजा करने की इजाजत नहीं है. बाबा बैद्यनाथ मंदिरि में सिर्फ सरकारी पूजा हो रही है. सरकारी पूजा सुबह और शाम होती है. भक्त बाबा बैद्यनाथ की ऑनलाइन पूजन-दर्शन कर सकते हैं.

आज का अशुभ मुहुर्त

राहुकाल- सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक.

यमगंड- सुबह 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक.

दोपहर- 01 बजकर 30 मिनट से 03 बजे तक गुलिक काल.

दुर्मुहूर्त काल- दोपहर 12 बजकर 55 मिनट से 01बजकर 49 मिनट तक। इसके बाद 03 बजकर 38 म‍िनट से 04 बजकर 32 म‍िनट तक.

पंचक- पूरा द‍िन

भद्रा- दोपहर 03 बजकर 24 म‍िनट से 27 जुलाई सुबह 02 बजकर 54 म‍िनट तक.

सावन के पहले सोमवार पर विशेष उपाय

आज सावन के पहले सोमवार है. आप प्रयास करें कि शिव जी की पूजा प्रदोष काल में की जाए, इस समय शिवलिंग पर बेलपत्र और जल की धारा अर्पित करें. इसके बाद शिव जी के मंदिर में एक घी का दीपक जलाएं. इसके बाद शिवलिंग की परिक्रमा करें. शिव जी से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें.

आज भूलकर भी न करें ये काम

भूलकर भी शिव की पूजा में शंख ना बजाएं.

शिवलिंग की जलाधारी को ना लांघे.

शिवलिंग की पूरी परिक्रमा ना करें.

पूजा के दौरान काले रंग के कपड़े ना पहनें.

भगवान शिव को भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीज

भगवान शिव को तुलसीदल का पत्ता ना चढ़ाएं.

शिवजी को नारियल ना चढ़ाएं.

शिवजी को हल्दी ना चढ़ाएं.

कुककुम और रोली ना लगाएं.

उन्हें खंडित अक्षत ना चढ़ाएं.

शिवपूजा में सिंदूर ना चढ़ाएं.

शिवपूजा में तिल का प्रयोग ना करें.

आज इस तरह करें पूजा

सोमवार को सबसे पहले स्नान करें, फिर शिव-पार्वती का जलाभिषेक करें.

इसके बाद उनपर चंदन लगाकर उन्हें खुश करें.

फिर शिवलिंग पर दूध, फूल, धतूरा आदि चढ़ाएं.

इसके बाद मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान शिव को सुपारी, पंच अमृत, नारियल एवं बेलपत्र चढ़ाएं.

मां पार्वती को सोलह श्रृंगार चढ़ाएं.

इसके बाद दीपक, धूप और अगरबत्ती जलाकर उनकी आरती करें.

कुछ देर 21, 101, 108 बार ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें.

पूजा के अंत में शिव चालीसा और शिव आरती अवश्य करें.

दिन में दो बार (सुबह और सायं) भगवान शिव की पूजा करें.

संध्यापूजा करना भी बेहद जरूरी होता है.

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