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Partition Horrors Remembrance Day: तस्वीरों से जानें उस भयावह दिन के किस्से

Updated at : 14 Aug 2023 11:09 AM (IST)
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Partition Horrors Remembrance Day: तस्वीरों से जानें उस भयावह दिन के किस्से

विभाजन भयावह स्मृति दिवस हर साल 14 अगस्त को मनाया जाता है. यह दिन 1947 में भारत के विभाजन के दौरान सामने आई क्रूरताओं और त्रासदियों को याद करने का है. यह भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साझा इतिहास पर विचार करने का दिन है

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विभाजन भयावह स्मृति दिवस हर साल 14 अगस्त को मनाया जाता है. यह दिन 1947 में भारत के विभाजन के दौरान सामने आई क्रूरताओं और त्रासदियों को याद करने का है. यह भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साझा इतिहास पर विचार करने का दिन है, जो अत्यधिक हिंसा, हानि और विस्थापन से ग्रस्त था.

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अगस्त 1947 में, ब्रिटिश भारत दो स्वतंत्र देशों, भारत और पाकिस्तान में विभाजित हो गया. इस विभाजन के कारण इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान और भारतीय गणराज्य का निर्माण हुआ. इससे नागरिकों का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ. अनुमान है कि लगभग 10 से 15 मिलियन लोग अपने घरों से विस्थापित हुए थे. पाकिस्तान (आज का पाकिस्तान) से हिंदू और सिख भारत आ गए, जबकि  से मुसलमान पाकिस्तान चले गए.

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देश के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे, जिससे अनुमानतः 200,000 से 20 लाख लोगों की मौत हो गई. यह इतिहास के सबसे घातक सांप्रदायिक दंगों में से एक है. कई लोगों ने अपने पुश्तैनी घर खो दिए और उन्हें एक अपरिचित क्षेत्र में नए सिरे से अपना जीवन शुरू करना पड़ा. परिवारों ने रातों-रात अपनी ज़मीन, व्यवसाय और संपत्ति खो दी.

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प्रवासियों की आमद को समायोजित करने के लिए दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल और भारत के अन्य हिस्सों में शरणार्थी शिविर स्थापित किए गए थे. विभाजन भयावह स्मृति दिवस हमें इतिहास के इस दर्दनाक अध्याय की याद दिलाने का काम करता है.

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कई भारतीय राज्य विभाजन की हिंसा में मारे गए और प्रभावित लोगों को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए 14 अगस्त को विभाजन भयावह स्मृति दिवस के रूप में मनाते हैं. उत्सव का यह दिन दुखद घटनाओं की स्मृति को जीवित रखने में मदद करता है और शांति, सद्भाव और एकता के महत्व की याद दिलाता है.

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विभाजन भयावह स्मृति दिवस 1947 में भारत के विभाजन के दौरान अनगिनत व्यक्तियों द्वारा किए गए दर्द, पीड़ा और बलिदान को न केवल याद करने का दिन है. बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आने वाली पीढ़ियां नफरत, पूर्वाग्रह और विभाजन के परिणामों को समझें.

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Shradha Chhetry

लेखक के बारे में

By Shradha Chhetry

Shradha Chhetry is a contributor at Prabhat Khabar.

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