गर्मी हो या सर्दी, नीम करोली बाबा ने कभी नहीं छोड़ा अपना कंबल, जानिए क्यों

Edited by Anushka Singh
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नीम करोली बाबा की फाइल फोटो

Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा हमेशा एक कंबल ओढ़े रहते थे. गर्मी हो या सर्दी, उनका यह अंदाज हमेशा लोगों का ध्यान खींचता था. भक्तों का मानना है कि इस कंबल के पीछे सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा था.

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Neem Karoli Baba: भारत में नीम करोली बाबा को लाखों लोग श्रद्धा से याद करते हैं. उनके भक्त उन्हें महाराज जी भी कहते हैं. उनकी पहचान सिर्फ उनके चमत्कारों से नहीं, बल्कि उस साधारण कंबल से भी थी, जिसे वे हर मौसम में अपने साथ रखते थे. गर्मी हो, सर्दी हो या बारिश, बाबा अक्सर उसी कंबल में नजर आते थे. यही वजह है कि आज भी लोग जानना चाहते हैं कि इसके पीछे क्या कारण था.

क्या सच में कंबल से जुड़ी थी कोई खास बात?

नीम करोली बाबा की फाइल फोटो

इस बात का कोई पक्का सबूत नहीं है कि बाबा हमेशा कंबल क्यों ओढ़ते थे. लेकिन उनके भक्त दादा मुखर्जी ने अपनी बातों में बताया है कि बाबा का कंबल उनके जीवन का हमेशा हिस्सा था. लोगों का कहना था कि कभी वह कंबल बहुत हल्का लगता था, तो कभी भारी. कई भक्तों ने यह भी महसूस किया कि उससे एक अलग तरह की अच्छी खुशबू आती थी.

बाबा के दो कंबलों की बात क्यों कही जाती है?

दादा मुखर्जी के अनुसार, बाबा के पास एक कंबल वह था जिसे हर कोई देखता था. वहीं दूसरा कंबल उनकी आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता था. उनका कहना था कि बाबा अपनी बड़ी शक्ति को दिखाना नहीं चाहते थे और हमेशा बहुत साधारण तरीके से रहते थे.

कंबल सादगी और त्याग का संदेश देता था

भक्तों का मानना है कि बाबा का कंबल सिर्फ ठंड से बचने के लिए नहीं था. यह सादा जीवन जीने और किसी भी चीज से ज्यादा लगाव न रखने का संदेश देता था. कहा जाता है कि एक बार किसी भक्त ने उनका कंबल ठीक करना चाहा, तो बाबा ने मना कर दिया और कहा कि चीजों से ज्यादा जुड़ना ठीक नहीं है.

भक्तों की रक्षा से भी जोड़कर देखते हैं लोग

कई भक्तों का विश्वास है कि बाबा अपने भक्तों का दुख अपने ऊपर ले लेते थे. कुछ लोगों का मानना था कि उनका कंबल उसी प्रेम और सेवा का प्रतीक था. यह आस्था से जुड़ी मान्यता है, जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है.

कंबल का रंग भी माना जाता है खास

बाबा अक्सर हल्के या नीले रंग का कंबल ओढ़ते थे. कई लोग इसे शांति, सादगी और मन की साफ सोच का प्रतीक मानते हैं. उनका पूरा जीवन भी यही सिखाता था कि इंसान को बाहर की चीजों से ज्यादा अपने मन पर ध्यान देना चाहिए.

अपनी पहचान को हमेशा रखा साधारण

भक्तों का मानना है कि बाबा के पास कई आध्यात्मिक शक्तियां थीं, लेकिन उन्होंने कभी उनका दिखावा नहीं किया. कहा जाता है कि उनका साधारण पहनावा और कंबल इसी बात की पहचान था कि वे हमेशा सादा जीवन जीना पसंद करते थे.

आज भी लोग कंबल क्यों चढ़ाते हैं?

बाबा के जाने के कई साल बाद भी उनके आश्रम में श्रद्धालु कंबल चढ़ाते हैं. माना जाता है कि यह उनकी सादगी और सेवा की याद में किया जाता है. कई भक्त इसे सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक मानते हैं.

आज भी लोगों को देता है एक खास सीख

नीम करोली बाबा का कंबल आज भी लोगों के लिए सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि सादगी, सेवा, त्याग और मन की शांति का संदेश माना जाता है, हालांकि इतिहास में इसका कोई पक्का कारण नहीं मिलता कि वे हर समय कंबल क्यों ओढ़ते थे, लेकिन उनके भक्त इसे अपनी आस्था और विश्वास से जोड़कर देखते हैं.

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