National Legal Services Day 2023: आज मनाया जा रहा है राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस, जानें क्यों खास है ये दिन
Published by : Shaurya Punj Updated At : 09 Nov 2023 6:35 AM
National Legal Services Day 2023: हर साल भारत में 9 नवम्बर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस मनाया जाता है. इस दिन देश के सभी नागरिकों को उचित, निष्पक्ष और न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित करने हेतु जागरूक किया जाता है.
National Legal Services Day 2023: सभी नागरिकों के लिये उचित निष्पक्ष और न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित करने हेतु जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 9 नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस मनाया जाता है. राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस (NLSD) की शुरुआत पहली बार 1995 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिये की गई थी.
क्यों खास है ये दिवस
इस दिन को विधिक सेवा के तहत प्राधिकरण अधिनियम और वादिकारियों के अधिकार को विभिन्न प्रावधानों से अवगत कराने के लिए मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों के लोगों के लिए नि: शुल्क, प्रवीण और कानूनी सेवाओं की पेशकश करना है. यह कमजोर वर्गों के लोगों को मुफ्त सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने का प्रयास भी करता है.
कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987
राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस के इतिहास के बारे में जानने से पहले आपके लिए ये जानना आवश्यक है कि कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 क्या है, क्योंकि राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस कि शुरुआत के पिछे इस अधिनियम की महत्वपूर्ण भूमिका है.
इनको मिला मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने का अधिकार
भारत के संविधान अनुच्छेद 39 ए और इसकी समिति द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा कानून सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 को अधिनियमित किया गया था. इस अधिनियम को 1994 के संशोधन अधिनियम के बाद 9 नवंबर 1995 में लागू किया गया. इसके बाद से मुख्य अधिनियम के लिए कई संशोधन पेश किए. आपको बता दें कि इस अधिनियम के माध्यम से पिछडे़ हुए वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विकलांग व्यक्तियों को मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है. अधिनियम के कारण किसी भी प्राकर से किसी विकलांग या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं रखा जा सकता है. न्याय प्राप्त करने का जिनता अधिकार एक अमीर व्यक्ति या किसी समान्य वर्ग के व्यक्ति को है उतना ही अधिकार एक आम व्यक्ति को है. न्याय प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार का भेद-भाव नहीं है, सभी को उसके समान अवसर दिए जाना इस अधिनियम के अंतर्गत शामिल किया गया है.
निःशुल्क विधिक सेवाएं प्रदान करने वाले विधिक सेवा संस्थान
राष्ट्रीय स्तर पर- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण
राज्य स्तर पर- राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण. इसकी अध्यक्षता राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जाती है जो इसका मुख्या संरक्षक भी होता है. उच्च न्यायालय के एक सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश को इसके कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नामांकित किया जाता है.
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जिला स्तर पर- राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण. जिला न्यायाधीश इसका कार्यकारी अध्यक्ष होता है.
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तालुका स्तर पर- तालुक विधिक सेवा प्राधिकरण. इसकी नेतृत्व वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश करता है.
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उच्च न्यायालय- उच्च न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरण.
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सर्वोच्च न्यायालय- सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरण.
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण क्या है?
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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एक स्वायत्त संगठन है जो समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है. NALSA की स्थापना 1995 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई थी.
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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नालसा का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत समाज के कमज़ोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सेवाएँ प्रदान करने के लिये और विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिये लोक अदालतों का आयोजन करने के उद्देश्य से किया गया था.
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भारत का मुख्य न्यायाधीश इसका मुख्य संरक्षक होता है है और भारत के सर्वोच्च न्यायालय का द्वितीय वरिष्ठ न्यायाधीश प्राधिकरण का कार्यकारी अध्यक्ष होता है.
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संविधान के अनुच्छेद 39 A अवसर की समानता के आधार पर न्याय को बढ़ावा देने के लिये समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने का प्रावधान करता है. अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 22 (1), विधि के समक्ष समानता सुनिश्चित करने के लिये राज्य को बाध्य करता है.
राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के उद्देश्य
राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के उद्देश्य हैं :
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कानूनी मामलों के बारे में आम जनता में जागरूकता फैलाना.
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समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करना.
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यह सुनिश्चित करना कि अपराध पीड़ितों को उनका मुआवजा मिले.
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सुलह, मध्यस्थता और न्यायिक निपटान जैसे वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) की पेशकश.
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लोक अदालतों का आयोजन.
राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस का महत्त्व
भारत में हाशिए पर रहने वाले समुदायों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों सहित समाज के कमजोर वर्गों के लोगों के पास कानूनी सेवाओं तक पहुंच नहीं है. उन्हें राहत प्रदान करने के लिए, भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम पारित किया गया था. इस दिवस का महत्त्व कुछ इस प्रकार है:
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यह समाज के कमजोर वर्ग के लोगों के लिए कानूनी सुरक्षा और प्रावधानों का वादा करता है.
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इससे विवादों के निपटारे में मदद मिलती है.
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जिस दिन यह अधिनियम पारित किया गया था उस दिन नागरिकों के बीच कानूनी जागरूकता फैलाने के लिए कानूनी सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है.
राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस का इतिहास
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1995 में कानूनी सेवा दिवस की स्थापना की गई. तब से यह हर साल 9 नवंबर को मनाया जाता है. उस समय, भारत में कानूनी सेवाएं प्रदान करने के लिए कोई व्यापक तंत्र नहीं था. गरीब और कमजोर वर्गों के लोग अक्सर कानूनी सहायता के लिए संघर्ष करते थे.
इस दिवस की शुरुआत के बाद, भारत में कानूनी सेवाओं की पहुंच में काफी सुधार हुआ है. NALSA की स्थापना की गई, जो समाज के कमजोर वर्गों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है. NALSA के तहत, राज्य और जिला स्तर पर विधिक सेवा प्राधिकरण और समितियां भी गठित की गई हैं.
राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस आयोजन
राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के मौके पर, देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इन कार्यक्रमों में आम लोगों को कानूनी सहायता के बारे में जागरूक किया जाता है. इस दिवस को निम्नलिखित तरीकों से मनाया जाता है –
इस दिन निम्नलिखित उत्सव मनाये जाते हैं
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लोक अदालतों का आयोजन.
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कानूनी सहायता शिविर
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कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता फैलाना.
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कानूनी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना.
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जरूरतमंद लोगों तक सीधे पहुंचने के लिए कानूनी सहायता शिविरों का आयोजन करना.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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