Kaal Sarp Dosh दूर करने के लिए नागपंचमी के अवसर पर बढ़ जाती है यहां की महिमा, कैसे पहुंचे यहां

Published by : Shaurya Punj Updated At : 01 Aug 2023 1:05 PM

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Kaal Sarp Dosh Nivaran, Nagraj Vasuki Temple, Prayagraj Nagvasuki Temple: ऐसी मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नागवासुकि मंदिर में विग्रह के दर्शन मात्र से पाप का नाश होता है. वहीं, कालसर्प के दोष (Kalsarp Dosh) से भी मुक्ति मिलती है.

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Kaal Sarp Dosh Nivaran, Nagraj Vasuki TemplePrayagraj Nagvasuki Temple: नागपंचमी के अवसर पर प्रयागराज में दारागंज (Daraganj) के नागवासुकि मंदिर की महिमा विशेषरूप से बढ़ जाती है. ऐसी मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन इस मंदिर में विग्रह के दर्शन मात्र से पाप का नाश होता है. वहीं, कालसर्प के दोष (Kalsarp Dosh) से भी मुक्ति मिलती है.

कब है नाग पंचमी? (Nag Panchami 2023 Date and Time)

इस वर्ष सावन शुक्ल पंचमी तिथि 21 अगस्त 2023 को रात 12 बजकर 21 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 22 अगस्त 2023 को दोपहर 2 बजे होगा. ऐसे में नाग पंचमी का त्योहार 21 अगस्त दिन सोमवार को मनाया जाएगा.

गंगा तट पर है स्थित

यह मंदिर कब बना और कितनी बार बना, इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं है. कहा जाता है कि मराठा शासक श्रीधर भोंसले ने वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया. वहीं, कुछ लोग इसका श्रेय राघोवा को देते हैं. जैसे असम के गुवाहाटी में नवग्रह-मंदिर ब्रह्मपुत्र के उत्तर तट पर स्थित है, वैसे ही प्रयागराज में नागवासुकि मंदिर भी गंगा के तट पर अलग स्थित दिखायी देता है. आर्यसमाज के अनुयायी भी इस मंदिर की महत्ता मानते हैं. दरअसल, स्वामी दयानंद सरस्वती ने कुंभ मेले के दौरान कड़ाके की ठंड में कई रातें इस मंदिर की सीढ़ियों पर काटी थीं.

विश्व का प्रतिष्ठित है मंदिर

अपने अनूठे वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध नागवासुकि मंदिर (Nagavasuki Mandir) , विश्व का इकलौता मंदिर है, जिसमें नागवासुकि की आदमकद प्रतिमा है. मंदिर के पूर्व-द्वार की देहली पर शंख बजाते हुए दो कीचक बने हैं, जिनके बीच में लक्ष्मी के प्रतीक कमल दो हाथियों के साथ बने हैं. इसकी कलात्मकता सबसे अधिक आकर्षित करती है, नागवासुकि का विग्रह भी आकार-प्रकार में कम सुंदर नहीं है, इसमें नाग देवता को ही केंद्र में प्रतिष्ठित किया गया हो. इस दृष्टि से नागवासुकि मंदिर असाधारण महत्ता रखता है.

कालसर्प दोष मुक्ति के लिए मंदिर में पूजा

मंदिर के पुजारियों की मानें तो वासुकी मंदिर में भक्त को पूजा का सामान खुद लेकर आना चाहिए. कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए पूजा की विधि भी बताई जाती है. सबसे पहले प्रयाग के संगम में स्नान करना चाहिए. फिर वासुकी नाग मंदिर में मटर, चना, फूल, माला और दूध के साथ जाएं. इसके बाद वासुकी नाग के दर्शन करने के बाद उन्हें पूजन सामग्री अर्पित करें. इसके बाद कालसर्प दोष से मुक्ति की प्रार्थना करें.

औरंगजेब से जुड़ी है ये घटना

कहा जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब ने नागवासुकि मंदिर को तोडऩे का प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हो सका था। मान्‍यता है कि औरंगजेब मंदिर पहुंचा और तलवार से नागवासुकि की मूर्ति पर वार किया तभी नागवासुकि ने अपना विकराल स्वरूप दिखाया जिसे देख औरंगजेब डरकर बेहोश हो गया.

नासिक के मंदिर से जुड़ी है परंपरा

बताया जाता है कि प्रसिद्ध नागवासुकि मंदिर की परंपरा महाराष्ट्र के नासिक की गोदावरी तट पर स्थित पैष्ण तीर्थ से जुड़ती है. ज्ञात हो कि असम के गुवाहाटी में नवग्रह-मंदिर ब्रह्मपुत्र के उत्तर तट पर स्थित है. वैसे ही प्रयागराज में नागवासुकि मंदिर भी गंगा के तट पर स्थित है.

कहां स्थित है नागवासुकि मंदिर

नागवासुकि मंदिर दारागंज मोहल्ले के उत्तरी छोर पर गंगा के किनारे स्थित है. इस मंदिर में नागवासुकि देव का पूजन होता है. नागवासुकि को शेषराज, सर्पनाथ, अनंत और सर्वाध्यक्ष कहा गया है.

काल सर्प दोष निवारण मंत्र

नाग गायत्री मंत्र: ‘ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्। ‘ इस मंत्र को कालसर्प दोष निवराण के लिए प्रभावी माना जाता है. इसके अलावा आप ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ नागदेवताय नम:’ मंत्र का जाप कर सकते हैं. रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करना होता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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