Jharkhand Tourist Destinations: झारखंड का प्रसिद्ध वाटर फॉल है दशम जलप्रपात, ये है परफेक्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन

Published by : Shaurya Punj Updated At : 07 Aug 2023 6:40 AM

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Jharkhand Tourist Destinations, Dasam Waterfall Tourist Spot: दशम फ़ॉल अपनी फोटोजेनिक प्राकृतिक सुंदरता के लिए पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय फॉल्स में से एक माना जाता है. इस झरने का जल बहुत ही साफ और पारदर्शी होता है.

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Jharkhand Tourist Destinations, Dasam Waterfall Tourist Spot: झारखंड की राजधानी राँची को जलप्रपातों की नगरी कहा जाता है. ऐसे तो शहर से सौ किमी की दूरी के अंदर कई झरने हैं पर लोकप्रियता के हिसाब से दशम, हुंडरु और जोन्हा के जलप्रपातों का नाम सबसे पहले आता है. चूंकि ये सारे जलप्रपात बरसाती नदियों के बहाव के मार्ग पर बने हैं इसलिए इनको देखने का आनंद वर्षा ॠतु के ठीक बाद आता है. कुछ लोगो का कहना है की अधिक ऊंचाई की वजह से इस झरने के गिरते समय 10 धाराएं बनती है इन्ही धाराओं की वजह से इस जलप्रपात का नाम दशम जलप्रपात (Dassam Fall) पड़ा. इस झरने का जल बहुत ही साफ और पारदर्शी होता है.

दशम जलप्रपात का भूगोल

कांची नदी का पानी लगभग 144 फीट की ऊंचाई से गिरता है जो एक भव्य झरना बनाता है जिसे दशम फॉल्स कहा जाता है. इस झरने का पानी साफ और सुव्यवस्थित है. प्राकृतिक जलविद्युत धारा उत्पादन के कारण पर्यटकों को पानी में स्नान न करने की चेतावनी दी जाती है. 2001 और 2006 के बीच डूबने की कुछ दुर्घटनाएं हुईं.

दशम जलप्रपात में पर्यटन

दशम फ़ॉल अपनी फोटोजेनिक प्राकृतिक सुंदरता के लिए पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय फॉल्स में से एक माना जाता है. इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता इसके आसपास के स्थान से दोगुनी हो जाती है, जो इस स्थान के चारों ओर घने उष्णकटिबंधीय वनस्पति से आच्छादित है. दशम फ़ॉल विभिन्न आकृतियों, आकारों और रंगों की घिसी-पिटी चट्टानों से घिरा हुआ है जो उत्कृष्ट वातावरण में और अधिक आकर्षण जोड़ते हैं. इसे एक अच्छा पिकनिक या भ्रमण स्थल भी माना जाता है.

दशम जलप्रपात के पास देवरी मंदिर

दशम झरने के पास, एक पुराना हिंदू मंदिर है जिसे देवरी मंदिर कहा जाता है. देवरी मंदिर दक्षिण रांची की ओर लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह हिंदू देवी दुर्गा का बहुत पुराना मंदिर है. मुख्य आकर्षण यह है कि मूर्ति में 16 हाथ हैं, जबकि आम तौर पर देवी के 10 हाथ होते हैं. दशम जलप्रपात के पास स्थित देवरी मंदिर विशाल पत्थरों को एक के ऊपर एक रखकर बनाया गया है, जिनके बीच में कोई सीमेंटिंग सामग्री नहीं है. स्थानीय लोककथाओं के अनुसार कहा जाता है कि यह मंदिर कभी इस क्षेत्र के डकैतों का था.

दशम जलप्रपात के बारे में जानकारी

झारखंड में दशम जलप्रपात टाटा-रांची हाईवे रोड पर तैमारा गांव के पास स्थित है. इस स्थान तक पहुंचने के लिए पर्यटक को झारखंड की राजधानी रांची से 40 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है.

दशम फॉल क्षेत्र की विशेष जानकारी

दशम फॉल का क्षेत्र लाह उत्पादन के लिए भी प्रसिद्ध है. इस छेत्र में पूरे झारखण्ड का 36% लाह का उत्पादन पलास, बेर, साल, सिद्धा, केंदू, कुसुम जैसे पेड़ो पर किया जाता है. दशम फॉल के आस पास के छेत्र में मुख्य रूप से मुण्डा समुदाय के आदिवासी लोग ही रहते है. इस आदिम जनजाति के लगभग 35% लोगो ने धर्म परिवर्तन करकें ईसाई धर्म अपना लिया है लेकिन इसके पश्चात भी इनकी वेश-भूसा और रहन-सहन में कोई बदलाव देखने को नहीं मिलता. यहाँ के लोग मुण्डारी भाषा के साथ साथ टूटी फूटी हिंदी भी बोलते है.

दशम जलप्रपात में क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

अगर आप दशम जलप्रपात घूमने जा रहे हैं तो आपको यहां जाने से पहले वहां की कुछ सावधानियों को विशेष रूप से जान लेना चाहिए जो आपकी यात्रा को सुरछित बना देंगे. दशम जलप्रपात बहुत ऊंचाई से गिरता है इसलिए झरने के आसपास काफी खतरनाक गड्ढे बने होते हैं जो चट्टानों के कटने से बनते हैं. पानी से ढके होने के कारण यह गड्ढे दिखाई नहीं पड़ता जो कई बार दुर्घटना का कारण बन जाते हैं. साथ ही में आपको यह ध्यान रखना होगा कि आप जलप्रपात के तेज बहाव में न नहाए. झरने के थोड़ा आगे बढ़ने के बाद जहां पानी थोड़ा शांत होता है वहां आप स्नान कर सकते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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