International Yoga Day 2021: कोरोना वायरस के थर्ड लहर के दौरान बच्चों की इम्यूनिटी बनाए रखने के लिए करें ये 5 योगा, जानें योग शिक्षिका राफिया नाज से कुछ टिप्स...

International Yoga Day 2021: पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर जारी है. अब कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरा बताया जा रहा है. वहीं, अभी तक जितने बच्चे कोरोना से संक्रमित हुए हैं उन बच्चों में कोरोना के हल्के लक्षण ही नजर आए हैं. जबकि कुछ बच्चों में कोरोना से संक्रमित होने के बाद भी कोई लक्षण नजर नहीं आए. वहीं, झारखंड की योग शिक्षिका रफिया नाज का कहाना है कि आपको इस समय बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.
International Yoga Day 2021: पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर जारी है. अब कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरा बताया जा रहा है. वहीं, अभी तक जितने बच्चे कोरोना से संक्रमित हुए हैं उन बच्चों में कोरोना के हल्के लक्षण ही नजर आए हैं. जबकि कुछ बच्चों में कोरोना से संक्रमित होने के बाद भी कोई लक्षण नजर नहीं आए. वहीं, झारखंड की योग शिक्षिका रफिया नाज का कहाना है कि आपको इस समय बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. झारखंड की योग शिक्षिका रफिया नाज ने इस दौरान कोरोना की थर्ड लहर से बच्चों को बचाने के लिए योग का अभ्यास करा रही है. वहीं, रफिया नाज ने बताया कि थर्ड लहर से बच्चों को बचाने के लिए कई योगासन है, जिन्हें करके इम्यूनिटी बढ़ाई जा सकती है, जो किसी भी सक्रामक रोग से बचाने में काफी हद तक मदद करेगा. आइए जानते है योग से इम्यूनिटी बढ़ाने के कुछ टिप्स…

सरल आसनों से शुरुआत करें
पहले वार्म अप जरूर करें
प्राणायाम सीखें
योग करने से पहले सही कपड़े चुनें
योग करने से पहले कुछ भारी न खाएं

अर्धमत्स्येन्द्रासन
बद्ध पद्मासन
भद्रासन
भुजंगासन
चक्रासन
धनुरासन
गोमुखासन
हलासन

प्राणायाम श्वास संबंधी योग है. इसमें सांस छोड़ने और लेने की क्रिया की जाती है. इसमें श्वसन के साथ ही हृदय और तंत्रिका तंत्र की एक्सरसाइज होती है. इससे भावनात्मक स्थिरता और मन की शांति आती है.

मन को शांत करने वाली मुद्राओं में से एक बालासन भी है. इसे अंग्रेजी में चाइल्ड पोज भी कहा जाता है. यह आसन शरीर को फायदा पहुंचाने के साथ ही स्ट्रेस को कम करके मस्तिष्क स्वास्थ्य को बेहतर कर सकता है. सकारात्मक विचार लाने को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है. इससे बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत होती है.
मेरुदंड को मजबूती मिलती है.
छाती को फैलाने से फेफड़ो को ऑक्सीजन ठीक मात्रा में मिलती है.
अर्ध मत्स्येन्द्रासन रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ाता है, किस से उसकी कार्यकौशलता में सुधार होता है.
पीठ में दर्द और कठोरता से राहत दिलाता है.
छाती को खोलता है और फेफड़ों में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ जाती है.
ध्यान में बैठने के लिए एक उपयोगी आसन हैं.
एकाग्रता शक्ति बढ़ती हैं और दिमाग तेज होता हैं.
मन की चंचलता कम होती हैं.
प्रजनन शक्ति बढ़ाता हैं.
पाचन शक्ति ठीक रहती हैं.
पैर के स्नायु मजबूत होते हैं.
सिरदर्द, कमरदर्द, आँखों की कमजोरी, अनिद्रा और हिचकी जैसे समस्या में राहत मिलती हैं.
यह आसन करने रक्त का प्रवाह तेजी से होता है.
मेरुदंड तथा शरीर की समस्त नाड़ियों का शुद्धिकरण होकर योगिक चक्र जाग्रत होते है.
छाती, कमर और पीठ पतली और लचीली होती है साथ ही रीड़ की हड्डी और फेफड़ों में लचीलापन आता है.
मांसपेशियों मजबूत होती है जिसके कारण हाथ, पैर और कंधे चुस्त दुरुस्त होते है.
इस आसन के करने से लकवा, शारीरिक थकान, सिरदर्द, कमर दर्द तथा आंतरिक अंगों में होने वाले दर्द से मुक्ति मिलती है.
पाचन शक्ति बड़ती है. पेट की अनावश्चयक चर्बी काम होती है और शरीर की लम्बाई बढ़ती है.
Posted by: Radheshyam Kushwaha
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