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International Labour Day 2023: मजदूर दिवस आज, जानें क्या है इसका इतिहास और इस दिन का महत्व

Updated at : 01 May 2023 6:42 AM (IST)
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International Labour Day 2023: मजदूर दिवस आज, जानें क्या है इसका इतिहास और इस दिन का महत्व

International Labour Day 2023, Majdoor Diwas, Theme, History: अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस हर वर्ष 1 मई को मनाया जाता है. भारत के चेन्नई में 1 मई 1923 में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान की अध्यक्षता में मजदूर दिवस मनाने की परंपरा की शुरूआत हुई. इस दौरान कई संगठनों व सोशल पार्टियों का समर्थन मिला

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International Labour Day 2023, Majdoor Diwas, Workers Day, Theme, History, Significance, Interesting Facts: अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस हर वर्ष 1 मई को मनाया जाता है. जिसे लेबर डे, मई दिवस, श्रमिक दिवस आदि नामों से जाना जाता है. ऐसे में यह दिवस उनके हक की लड़ाई उनके प्रति सम्मान भाव और उनके अधिकारों के आवाज को बुलंद करने का प्रतीक है. आइए जानते हैं कैसे हुई थी मजदूर दिवस की शुरुआत क्या है इसका महत्व व इतिहास…

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस का इतिहास

दरअसल, अमेरिका में एक आंदोलन की शुरुआत 1 मई 1886 में हुई थी. पहले यहां मजदूरों से दिन के 15 घंटे काम लिए जाता था. जिसके खिलाफ 01 मई 1886 के दिन कई मजदूरों अमेरिका की सड़कों पर आ गए और अपने हक के लिए आवाज आवाज बुलंद करने लगे. जिस दौरान पुलिस ने कुछ मजदूरों पर गोली चलवा दी. जिसमें 100 से अधिक घायल हुए जबकि कई मजदूरों की जान चली गयी. इसी को देखते हुए 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की दूसरी बैठक के दौरान 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया. साथ ही साथ सभी श्रमिकों का इस दिन अवकाश रखने के फैसले पर और 8 घंटे से ज्यादा काम न करवाने पर भी मुहर लगी.

भारत में कैसे हुई मजदूर दिवस की शुरुआत?

भारत के चेन्नई में 1 मई 1923 में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान की अध्यक्षता में मजदूर दिवस मनाने की परंपरा की शुरूआत हुई. इस दौरान कई संगठनों व सोशल पार्टियों का समर्थन मिला. जिसका नेतृत्व वामपंथी कर रहे थे. आपको बता दें कि पहली बार इसी दौरान मजदूरों के लिए लाल रंग का झंडा वजूद में आया था. जो मजदूरों पर हो रहे अत्याचार व शोषण के खिलाफ आवाज उठाने का प्रतिक है.

क्या होता है मजदूर दिवस के दिन?

दरअसल, मजदूर दिवस के दिन कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की जाती है.
विभिन्न कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं. सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में समारोह का आयोजन किया जाता है. हालांकि कोरोनावायरस और लॉकडाउन के कारण इस बार यह गतिविधियां संभव नहीं है. आपको बता दें कि महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस भी 1 मई को ही मनाने की परंपरा है.

क्या है इस दिवस का उद्देश्य?

  • इस दिवस का मुख्य उद्देश्य है मजदूरों की उपलब्धियों का सम्मान करना. उनके योगदान की चर्चा करना.

  • उनके अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना.

  • मजदूर संगठन को मजबूत करना आदि.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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