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Six Pocket Syndrome: ज्यादा प्यार से सिक्स पॉकेट सिंड्रोम का शिकार होते बच्चे, जानिए क्या है यह बीमारी

4 Dec, 2025 1:58 pm
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Impact of six-pocket syndrome on children

Impact of six-pocket syndrome on children (Image - Getty)

Six Pocket Syndrome: हर माता पिता अपने बच्चे को खूब लाड़-प्यार देते हैं लेकिन बहुत दुलार भी बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. ज्यादा प्यार की वजह से बच्चा सिक्स पॉकेट सिंड्रोम का शिकार हो जाता है.

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Six Pocket Syndrome: बच्चों में बहुत सारे लोगों के सामने परफॉर्म करने का कॉन्फिडेंस होना तो अच्छी बात है. लेकिन यह भी ध्यान देना जरूरी है कि ओवर कॉन्फिडेंस में बच्चे अपने से बड़े व्यक्ति का सम्मान करना न भूले. बच्चा अगर अपने से बड़ों की इज्जत नहीं करता तो आपकी परवरिश पर ही सवाल खड़े होते हैं. बच्चे की इस आदत को सिक्स पॉकेट सिंड्रोम कहते हैं. इस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चा हर वक्त अपनी मनमानी ही करता है. अब आपके मन में ये सवाल उठता होगा कि यह सिक्स पॉकेट सिंड्रोम होता क्या है. आइए जानते हैं बच्चे के व्यक्तित्व पर इसका क्या असर पड़ता है.

सिक्स पॉकेट सिंड्रोम है क्या?

इस सिंड्रोम के तहत बच्चा आजा के समय में अपने घर वालों से बहुत ज्यादा अटेंशन पाता है. घर के बड़े लोग बच्चे की हर इच्छा को पूरा करते हैं. चाहे बच्चा किसी चीज की डिमांड कर रहा हो या कुछ बेहतर काम नहीं करने पर भी उसकी जमकर तारीफ की जाती है. सीधी सी बात है कि बच्चे को इस बीमारी का शिकार घर के बड़े लोग ही बनाते हैं.

क्या है इस बीमारी के लक्षण

  • अपने हर काम के लिए बड़ों पर निर्भर रहना.
  • किसी काम को लेकर धैर्य की कमी का होना.
  • अपनी चीजें किसी के साथ शेयर करने में परेशानी होना.
  • इच्छा पूरी नहीं होने पर तुरंत गुस्से में आना.
  • हर छोटे काम के लिए बेवजह की तारीफ सुनने की इच्छा.

बच्चों पर प्रभाव

  • बच्चे पर किसी तरह की जिम्मेदारी नहीं दी जाती है जिस वजह से बच्चा लापरवाह बन जाता है और वह किसी की बात नहीं सुनता.
  • इस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे भावनात्मक रूप से बहुत ज्यादा कमजोर होते हैं. इस तरह के बच्चे कभी भी चुनौतियों का सामना नहीं कर पाते.
  • ऐसे बच्चे स्वार्थी तो होते ही है साथ ही जिद्दी भी बहुत ज्यादा होते हैं. इस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों के दोस्त भी ना के बराबर होते हैं.
  • ऐसे बच्चों में आत्मविश्वास की कमी होती है और इसकी वजह घर के बड़े लोग होते हैं जो बच्चे की हर समस्या की तुरंत निपटारा कर देते हैं.
  • इस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे दुनिया में हर किसी से ऐसी अपेक्षाएं रखता है कि उसकी सारी समस्या का समाधान चुटकियों में हो जाएगा.

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Rani Thakur

लेखक के बारे में

By Rani Thakur

बंगाल की धरती पर एक दशक से अधिक समय तक समृद्ध पत्रकारिता अनुभव के साथ, रानी ठाकुर अब बिहार की धरती पर अपनी लेखनी से पहचान बना रही हैं. कोलकाता में कई राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित अखबारों के लिए रिपोर्टिंग और सब-एडिटिंग का अनुभव हासिल करने के बाद, वे अब प्रभात खबर के डिजिटल डेस्क से जुड़ी हैं, जहां वे लाइफ स्टाइल की खबरों के माध्यम से अपनी रचनात्मक सोच और पत्रकारिता कौशल को नई दिशा दे रही हैं.

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