हर जिद पूरी करना नहीं, समझदारी सिखाना है जरूरी, बच्चों को ऐसे बताएं ‘Need’ और ‘Want’ का फर्क
सांकेतिक फोटो (AI Generated)
Wants and Needs for Kids: क्या आपका बच्चा भी हर चीज के लिए जिद करता है. जानिए 5 आसान पैरेंटिंग टिप्स (Parenting Tips) जिनसे बच्चे इच्छा (Want) और जरूरत (Need) में अंतर समझ सकेंगे.
Wants and Needs for Kids: आज के समय में जब बच्चों की हर जिद एक क्लिक पर पूरी हो जाती है, उन्हें ‘इच्छा’ (Want) और ‘जरूरत’ (Need) के बीच का अंतर समझाना माता-पिता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.
बच्चों को शुरुआत से ही पैसों की अहमियत और सही चुनाव करना सिखाना बहुत जरूरी है. अगर हम उन्हें बचपन में ही ‘चाहत’ और ‘जरूरत’ का फर्क समझा देंगे, तो वे बड़े होकर आर्थिक रूप से समझदार बनेंगे. आइए जानते हैं कुछ आसान और व्यावहारिक तरीके, जिनसे आप बच्चों को यह अंतर सिखा सकते हैं.
1. आसान उदाहरणों से समझाएं Wants and Needs का फर्क
बच्चों को किताबी भाषा में समझाने के बजाय रोजमर्रा के उदाहरणों का उपयोग करें. उन्हें बहुत ही सरल शब्दों में बताएं कि ये दोनों चीजें क्या हैं:
जरूरत (Need): यह वो चीजें हैं जिनके बिना हम जीवित नहीं रह सकते या हमारा काम नहीं चल सकता. जैसे भोजन, पानी, रहने के लिए घर, कपड़े और पढ़ाई की किताबें.
इच्छा (Want): यह वो चीजें हैं जिन्हें पाकर हमें खुशी तो मिलती है, लेकिन अगर वे न भी हों, तो भी हमारा जीवन मजे से चल सकता है. जैसे वीडियो गेम, महंगे खिलौने, ब्रांडेड जूते

2. ‘सुपरमार्केट’ या ‘मॉल’ को बनाएं पाठशाला
जब भी आप बच्चों के साथ राशन या घर का सामान खरीदने जाएं, तो उन्हें इस खेल Wants and Needs for Kids) में शामिल करें. जब बच्चे खुद सोचकर जवाब देंगे, तो उनका दिमाग व्यावहारिक रूप से काम करना शुरू करेगा. धीरे-धीरे वे खुद ही समझ जाएंगे कि कौन सी चीज टोकरी में जानी चाहिए और कौन सी नहीं.

3. जिद्दी बच्चों के लिए अपनाएं ’48 Hour Rule
जब आपका बच्चा किसी ऐसी चीज की जिद करे जो उसकी सिर्फ एक ‘इच्छा’ है (जैसे कोई नया गैजेट या महंगा खिलौना), तो तुरंत “ना” कहने के बजाय उसे ’48 घंटे का नियम’ सिखाएं. अक्सर बच्चों का आकर्षण किसी चीज को देखकर तुरंत जागता है और कुछ समय बाद वे उसे भूल जाते हैं. यह नियम उनकी तात्कालिक जिद को शांत करने में मदद करता है.
4. पॉकेट मनी और ‘पिग्गी बैंक’ की आदत डालें
बच्चों को खुद फैसले लेने की आजादी देना बहुत जरूरी है. उन्हें हर महीने एक निश्चित पॉकेट मनी दें और घर में एक गुल्लक रखें. उन्हें सिखाएं कि अगर उन्हें अपनी कोई ‘इच्छा’ पूरी करनी है, तो उन्हें अपनी पॉकेट मनी से पैसे बचाने होंगे. जब बच्चे को अपनी पसंदीदा चीज के लिए खुद के पैसे बचाने पड़ते हैं, तो उसे समझ आता है कि पैसा कमाना और बचाना (Wants and Needs) कितना मुश्किल है. इसके बाद वे फिजूलखर्ची करने से पहले सोचेंगे.
5. खुद एक अच्छा रोल मॉडल बनें
बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं. अगर आप खुद मॉल जाकर बिना सोचे-समझे शॉपिंग करते हैं या हर नई लॉन्च हुई चीज तुरंत खरीद लेते हैं, तो बच्चे भी वही सीखेंगे.

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लेखक के बारे में
By Smita Dey
स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.
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