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इन देशों ने हमेशा निभायी है भारत से दोस्ती

Updated at : 06 Aug 2023 2:41 PM (IST)
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इन देशों ने हमेशा निभायी है भारत से दोस्ती

दुनिया में सच्चे दोस्त और दोस्ती की भावना का जितना प्रचार-प्रसार होगा, व्यक्ति, परिवार, समाज और पूरी दुनिया में उतनी ही खुशहाली, शांति, प्रेम और भाईचारे की भावना स्थापित होगी. मित्रता दिवस के मौके पर तुम भी अपने कुछ सच्चे दोस्त चुन सकते हो.

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आज दोस्तों का दिन ‘फ्रेंडशिप डे’ है. दोस्ती एक ऐसा सुखद रिश्ता है, जिसे तुम खुद से चुनते हो, जबकि बाकी सारे तुम्हें रिश्ते बने-बनाये मिलते हैं. दोस्ती का यह रिश्ता केवल इंसानों तक ही सीमित नहीं है. जैसे हम इंसानों के दोस्त होते हैं, वैसे ही हर देश के भी कुछ मित्र राष्ट्र होते हैं. कठिन परिस्थितियों में भी साथ खड़े होकर वे अपनी मित्रता को स्थापित करते हैं. खास बात है कि अपना देश वसुधैव कुटुंबकम के विचार को मानता है, यानी हमारे लिए पूरी दुनिया एक परिवार है. बावजूद इसके कुछ देश ऐसे हैं, जो भारत के सच्चे मित्र कहलाते हैं.

अब तक सबसे भरोसेमंद दोस्त रहा है रूस

परिस्थितियां चाहे कैसी भी रही हों, सोवियत संघ के समय से ही रूस ने भारत का साथ दिया है. खास बात है कि यह मित्रता केवल लेन-देन तक सीमित नहीं है. भारत का परमाणु कार्यक्रम हो या अंतरिक्ष कार्यक्रम सभी जगह रूस ने भारत की हरसंभव मदद की है. वर्ष 1962 में जब अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन ने कश्मीर के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में भारत के खिलाफ वीटो का प्रयोग किया था, तब रूस ने ही भारत के पक्ष में वीटो का इस्तेमाल किया था. भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1971 में हुई जंग के समय भी अमेरिका पाकिस्तान की मदद करने को बेताब था. उस समय रूस ने भारत के साथ आकर अमेरिका और ब्रिटेन को करारा जवाब दिया था.

अमेरिकी नौसेना को बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ता देख रूस ने भारत की मदद के लिए अपनी परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बियों व विध्वंसक जहाजों को प्रशांत महासागर से हिंद महासागर की ओर भेज दिया था. रूस ने 1971 में भारत-पाक युद्ध से पहले भारत को आधुनिक हथियार भी दिये थे, जिसमें उस समय का सबसे अत्याधुनिक फाइटर जेट मिग-21 भी शामिल था. भारत व रूस ने 9 अगस्त, 1971 को 20 वर्षीय सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किये थे. इनमें संप्रभुता के प्रति सम्मान और एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखना, अच्छा पड़ोसी बनना और शांतिपूर्ण वातावरण कायम करने जैसे मुद्दे शामिल थे. वर्ष 1993 में इन्हीं मूल सिद्धांतों पर रूस और भारत ने शांति, मैत्री और सहयोग की नयी संधि की. यही कारण है कि आज भी हम रूस को अपने भरोसेमंद मित्र देशों की सूची में सबसे ऊपर रखते हैं.

बेहद खास है भूटान और भारत का रिश्ता

भूटान और भारत का रिश्ता भूगोल, इतिहास और संस्कृति के मेल से मिलकर बना है. सदियों पुरानी यह दोस्ती आज भी वैसी-की-वैसी ही है. हर मुश्किल परिस्थितियों में भूटान अपने देश के साथ खड़ा रहा है. वहीं, भारत ने भी भूटान को कभी पराया नहीं समझा. भारत और भूटान के बीच के इस दोस्ती के महत्व को तुम इसी बात से समझ सकते हो कि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने थिंपू में एक सम्मेलन में कहा था कि अगर कोई देश भूटान पर हमला करता है, तो उसे भारत पर हमला माना जायेगा और भारत उसका मुंहतोड़ जवाब देगा. इतना ही नहीं, भारत में यह रिवाज रहा है कि भारत के लगभग सभी प्रधानमंत्री अपने कार्यकाल में कम-से-कम एक बार भूटान का दौरा जरूर करते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो 2014 में अपनी विदेश यात्रा की शुरुआत भूटान से ही की थी. इसके अलावा 2019 में दूसरे कार्यकाल में भी वे भूटान का दौरा कर चुके हैं. 2017 में अपनी अटूट दोस्ती का परिचय देते हुए डोकलाम विवाद में भारत, भूटान के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर चीन के खिलाफ खड़ा रहा, जिस कारण चीन को डोकलाम से पीछे हटना पड़ा था. मित्र राष्ट्र होने के नाते कोरोना काल में भारत ने भूटान को टेस्टिंग किट और दवाएं उपहार के रूप में दी.

सांस्कृतिक संबंधों ने जापान के साथ मजबूत की है मित्रता

भारत व जापान के बीच दोस्ती का एक लंबा इतिहास है. जापान की संस्कृति पर भारत में जन्मे बौद्ध धर्म का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है. भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान भी जापान की सेना ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज को सहायता प्रदान की थी. स्वतंत्रता के बाद से भी अब तक दोनों देशों के बीच मधुर संबंध रहे हैं. जापान की कई कंपनियां, जैसे- सोनी, टोयोटा, होंडा, सुजुकी इत्यादि ने भारत में अपने प्लांट स्थापित करके हमारे देश के आर्थिक विकास में योगदान दिया है. इसके अलावा जापान ने मेट्रो रेल जैसी परियोजनाओं के लिए भारत को टेक्नोलॉजी भी प्रदान किया है. भारत ने भी समय-समय पर जापान की मदद की है.

कई मोर्चों पर एक साथ मिलकर लड़े हैं इस्राइल-भारत

इस्राइल अपने देश का एक पुराना दोस्त रहा है. इस्राइल ने कई अहम मौके पर भारत की मदद की है. भारत ने 1950 में ही इस्राइल को एक देश के तौर मान्यता दे दी थी. वर्ष 1999 में जब पाकिस्तान ने धोखे से कारगिल में लड़ाई छेड़ दी, तो इस्राइल ने हमें खुफिया जानकारी उपलब्ध करायी थी. इस्राइली सैन्य उपकरणों व हथियारों का भी हमारा देश बड़ा खरीदार है. इस्राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और भारत की रॉ ने एकसाथ मिलकर कई मुश्किल मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है. भौगोलिक रूप से इस्राइल एक छोटा-सा देश है, लेकिन तकनीक के मामले में वह अग्रणी देशों में शामिल है. खेती की आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा आदि क्षेत्र में भारत को इस्राइल से मदद मिल रही है.

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