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Gita Updesh for Women : भगवद् गीता में बताई गई महिलाओं के लिए ये बातें, कीजिए घोर

Updated at : 21 Apr 2025 5:15 PM (IST)
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Gita Updesh for Women

Gita Updesh for Women

Gita Updesh for Women : यहां महिलाओं के लिए भगवद् गीता से जुड़ी खास बातें/उपदेश दिए गए हैं जो उन्हें आत्मविश्वास, कर्तव्य और आत्मज्ञान की राह दिखाते हैं.

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Gita Updesh for Women : भगवद् गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाली ज्ञान की अमूल्य धरोहर है. इसके उपदेश स्त्री-पुरुष सभी के लिए समान रूप से प्रेरणादायक हैं. गीता में महिलाओं के आत्मबल, कर्तव्य और आत्मज्ञान पर विशेष बल दिया गया है. यह उन्हें मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनने की राह दिखाती है. भगवद् गीता के उपदेश समय-काल से परे हैं और स्त्री-पुरुष सभी के लिए प्रेरणादायक हैं, यहां महिलाओं के लिए भगवद् गीता से जुड़ी खास उपदेश दिए गए हैं जो उन्हें आत्मविश्वास, कर्तव्य और आत्मज्ञान की राह दिखाते हैं:-

– आत्मा अमर है

“न जायते म्रियते वा कदाचित्…”
यह श्लोक बताता है कि आत्मा न कभी जन्म लेती है, न मरती है.महिलाएं आत्मिक शक्ति को समझें और खुद को सीमित न समझे.

– कर्म करो, फल की चिंता मत करो

“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”
यह उपदेश महिलाओं को प्रेरित करता है कि वे अपने कर्म पर ध्यान दें, परिणाम अपने आप आएगा.

– समत्व का भाव

“योगस्थः कुरु कर्माणि…”
यह बताता है कि स्त्रियों को सफलता और असफलता दोनों में समान भाव रखना चाहिए.

– आत्म-विश्वास का महत्व

गीता के अनुसार, आत्मा स्वयं में पूर्ण है. महिलाओं को खुद पर विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि आत्मा किसी से कम नहीं.

– मन पर नियंत्रण

“बन्धुरात्मात्मनस्तस्य…”
जो अपने मन को जीत लेता है, वही सच्चा विजेता है. महिलाओं को भावनाओं को दिशा देने की कला सीखनी चाहिए.

– श्रद्धा और भक्ति से सब संभव है

“अनन्याश्चिन्तयन्तो मां…”
जो पूर्ण श्रद्धा से भक्ति करती हैं, भगवान उनका मार्ग स्वयं बनाते हैं.

– डर को त्यागें

“वीतरागभयक्रोधा…”
डर, क्रोध और राग को त्यागकर स्त्रियाँ मानसिक शांति पा सकती हैं और मजबूती से जीवन जी सकती हैं.

– ज्ञान सबसे बड़ा बल है

“न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते”
स्त्रियों को शिक्षा और आत्मज्ञान को प्राथमिकता देनी चाहिए, यही उनका सशक्तिकरण है..

– अपने स्वधर्म का पालन करें “श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः…”

हर महिला को अपने कर्तव्य और स्वभाव के अनुसार कर्म करना चाहिए, यही उसका धर्म है.

– नारी भी है शक्ति का स्वरूप

भगवद् गीता भले सीधे स्त्रियों पर केंद्रित न हो, लेकिन उसके उपदेशों में आत्मा को सर्वोपरि माना गया है — और आत्मा का कोई लिंग नहीं होता. इसका मतलब, स्त्री भी ब्रह्मज्ञान और मोक्ष प्राप्त कर सकती है.

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Ashi Goyal

लेखक के बारे में

By Ashi Goyal

Ashi Goyal is a contributor at Prabhat Khabar.

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