Chanakya Niti: जीवन में सबसे गहरा आघात तब लगता है, जब दुख और पीड़ा देने वाला कोई अपना हो. ऐसे समय में इंसान भावनात्मक रूप से टूट जाता है और गलत फैसले लेने की संभावना बढ़ जाती है. आचार्य चाणक्य की नीति बतलाती है कि कैसे कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, संयम और आत्मबल बनाए रखा जाए?
Chanakya Niti: भावनाओं में बहकर कोई निर्णय ना लें याद रखें आचार्य चाणक्य की 3 महत्वपूर्ण बातें

1. क्रोध में निर्णय न लें
चाणक्य कहते हैं – क्रोध से बुद्धि नष्ट होती है और बुद्धि के नष्ट होने से विनाश निश्चित है.
क्रोध में लिए गए फैसले क्यों विनाशकारी होते हैं?
जब अपने ही लोग दर्द देते हैं, तब गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन क्रोध में लिया गया निर्णय हमेशा नुकसान पहुंचाता है. शांति बनाए रखना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है.
2. शब्दों से खुद को न तोड़ें
कई बार अपने लोग हमें समझ नहीं पाते और उनके शब्द हमें भीतर तक तोड़ देते हैं. चाणक्य नीति कहती है कि आज जो आपको नहीं समझ रहे, वही कल आपकी अहमियत पहचानेंगे. समय सब कुछ समझा देता है.
चाणक्य नीति के अनुसार, अपनों से मिला दुख भी समय की एक परीक्षा है, जो हमें और मजबूत बनाने आती है.
3. अपनी अच्छाई न छोड़ें
दूसरों की गलतियों के कारण अपने संस्कार और सिद्धांत बदलना कमजोरी की निशानी है.
जो व्यक्ति परिस्थितियों में भी अपने गुण नहीं छोड़ता, वही सच्चा ज्ञानी होता है.
– चाणक्य नीति
अपनी अच्छाई बनाए रखना ही असली शक्ति है.
चाणक्य नीति के अनुसार कठिन परिस्थितियों में दुख देने वालों से जीतना नहीं, बल्कि खुद पर विजय पाना ही सबसे बड़ी जीत है. जब अपनों से पीड़ा मिले, तब धैर्य, आत्मविश्वास और अच्छाई को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं.
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Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.

