Angioplasty :धमनी रोग से पीड़ित मरीजों की भी होती है एंजियोप्लास्टी, जानें क्या कहते हैं डाॅक्टर
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 16 Mar 2024 11:45 AM
Amitabh Bachchan news धमनी और नस शरीर में रक्त प्रवाह का कार्य करते हैं
Angioplasty : हृदय तक जब रक्त का प्रवाह कम होता है तो उस स्थिति में ब्लाॅकेज को हटाने के लिए एंजियोप्लास्टी की जाती है, लेकिन कई बार धमनी रोगों के निदान के लिए भी एंजियोप्लास्टी की जाती है.
एंजियोप्लास्टी हार्ट ब्लाॅकेज को हटाने के लिए किया जाता है
डाॅक्टर विद्यापति ने बताया कि एंजियोप्लास्टी अमूमन हृदय के ब्लाॅकेज को हटाने के लिए किया जाता है, ताकि हृदय तक रक्त का प्रवाह सही तरीके से हो, लेकिन कई बार बाॅडी के कुछ हिस्सों में अगर रक्त का प्रवाह सही तरीके से ना हो रहा हो, तब भी एंजियोप्लास्टी का सहारा लिया जाता है.
धमनी (artery) रोग में एंजियोप्लास्टी क्यों?
धमनी रोग पैरों में रक्त के प्रवाह को रोकता है, इसका मुख्य कारण धमनियों का संकरा होना या फिर उसमें ब्लाॅकेज होना है. अमिताभ बच्चन जिस आयु वर्ग में हैं, यह समस्या है. दरअसल वृद्धावस्था में धमनियों की सतह पर प्लाॅक जमने लगता है जो उसे संकरा या पतला बना देता है, जिसकी वजह से रक्त का प्रवाह बाधित होता है. इसी बाधा या ब्लाॅकेज को हटाने के लिए धमनी रोगों में एंजियोप्लास्टी की जाती है.
क्या है धमनी (artery) और क्या हैं इसके कार्य
धमनी और नस शरीर में रक्त प्रवाह का कार्य करते हैं. धमनियां आॅक्सीजन युक्त रक्त को हृदय से शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंचाती हैं, जबकि नस के जरिये आॅक्सीजन रहित खून हृदय तक पहुंचता है. धमनियों की दीवारें मांसपेशी युक्त होती हैं और मोटी होती है,जिनमें प्लाॅक के जमने से रक्त प्रवाह प्रवाहित होता है और पीड़ित व्यक्ति को परेशानी होती है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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