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Sarhul 2022: सूर्य व धरती के विवाह का पर्व सरहुल को लेकर उल्लास, शोभायात्रा से पहले पूजा की ये है तैयारी

Updated at : 04 Apr 2022 11:46 AM (IST)
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Sarhul 2022: सूर्य व धरती के विवाह का पर्व सरहुल को लेकर उल्लास, शोभायात्रा से पहले पूजा की ये है तैयारी

Sarhul 2022: फाखू बैंगा ने कहा कि हम इसे सूर्य और धरती के विवाह के रूप में मनाते हैं. सरहुल महोत्सव के बाद महुआडांड़ में गांव सरहुल मनाया जायेगा. अलग-अलग दिन निर्धारित कर लोग अपने-अपने गांव में नाचते-गाते गांव सरहुल उत्सव मनायेंगे.

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Sarhul 2022: प्रकृति पर्व सरहुल आदिवासियों का सबसे बड़ा त्योहार है. झारखंड के लातेहार जिले के महुआडांड़ में इस वर्ष सरहुल पर्व को लेकर उल्लास है. अनुमंडल क्षेत्र की सरना समिति के द्वारा महोत्सव की तैयारी पूरी कर ली गयी है. सरहुल पर्व चैत्र महीने के तीसरे दिन चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है. ये महोत्सव वसंत ऋतु के दौरान मनाया जाता है. आदिवासी प्रकृति की पूजा करते हैं. इस समय सखुआ (साल ) पेड़ों की शाखाओं को नए फूल मिलते हैं. फाखू बैंगा ने कहा कि हम इसे सूर्य और धरती के विवाह के रूप में मनाते हैं. सरहुल महोत्सव के बाद महुआडांड़ में गांव सरहुल मनाया जायेगा. अलग-अलग दिन निर्धारित कर लोग अपने-अपने गांव में नाचते-गाते गांव सरहुल उत्सव मनायेंगे.

अपने-अपने घरों में भी करेंगे पूजा

सरना समिति के अध्यक्ष अजय उरांव ने कहा कि पिछले दो वर्षों से महुआडांड़ में सरहुल महोत्सव की शोभायात्रा करोना संक्रमण के कारण नहीं निकल पायी थी. इस वर्ष पारंपरिक वेश-भूषा और वाद्य यंत्रों के साथ लोक नृत्‍य करते हुए महुआडांड़ में सरहुल जुलूस और शोभायात्रा निकाली जायेगी. इसकी तैयारी पूरी हो गई है. घर की फूलवार बगीचा में पहान सरना स्थलों की साफ-सफाई कर ली गयी है. सरना स्थल में सोमवार को परंपरा के अनुसार पूजा पाठ किया जाएगा. बैंगा पहान द्वारा सरना स्थल में पूजा करने के बाद गांव के लोग अपने-अपने घरों में पूजा पाठ करेंगे.

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सरहुल के बाद मनेगा गांव सरहुल

फाखू बैंगा ने कहा कि हम इसे सूर्य और धरती के विवाह के रूप में मनाते हैं. नये फल एवं फूल जैसे कटहल, जोकी, डहु, पुटकल आदि का तब तक सेवन नहीं करते, जब तक पूजा नहीं हो जाती क्योंकि धरती बंसत ऋतु में शृंगार करती है. नये-नये फल, फूल, पत्ते से पूरी धरती सुन्दर हो उठती है. पर्व के दिन कई प्रकार की सब्जी बनाई जाती है. अपने इष्टदेव अपने पूर्वजों को पकवान अर्पित किया जाता है. सरहुल महोत्सव के बाद महुआडांड़ में गांव सरहुल मनाया जायेगा. अलग-अलग दिन निर्धारित कर लोग अपने-अपने गांव में नाचते-गाते गांव सरहुल उत्सव मनायेंगे.

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रिपोर्ट: वसीम अख्तर

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