अंग्रेजों की क्रूरता का गवाह है खूंटी का डोंबारी बुरू, जालियांवाला बाग से पहले हुई थी यहां हत्याकांड, सैकड़ों आदिवासियों ने गंवाई थी अपनी जान
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 08 Jan 2021 9:52 PM
Jharkhand News, Khunti News, खूंटी : झारखंड के खूंटी जिला अंतर्गत मुरहू प्रखंड के डोंबारी बुरू अंग्रेजों के दुर्दांत करतूत का गवाह है. यहां निहत्थे आदिवासियों पर अंग्रेजों ने गोलियों की बौछार कर दी थी. जिसमें सैकड़ों आदिवासियों ने अपनी जान गंवाई थी और सैकड़ों घायल हुए थे. डोंबारी बुरू में यह घटना जालियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919 ) से भी पहले हुई थी. डोंबारी बुरू में 9 जनवरी, 1899 को घटना घटित हुई थी. सैकड़ों आदिवासियों की शहादत को हर साल याद की जाती है. इसी क्रम में शनिवार (9 जनवरी, 2021) को खूंटी के सांसद सह केंद्रीय आदिवासी जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा मुख्य अतिथि के तौर पर शनिवार को उपस्थित होकर शहीदों को नमन करेंगे.
Jharkhand News, Khunti News, खूंटी : झारखंड के खूंटी जिला अंतर्गत मुरहू प्रखंड के डोंबारी बुरू अंग्रेजों के दुर्दांत करतूत का गवाह है. यहां निहत्थे आदिवासियों पर अंग्रेजों ने गोलियों की बौछार कर दी थी. जिसमें सैकड़ों आदिवासियों ने अपनी जान गंवाई थी और सैकड़ों घायल हुए थे. डोंबारी बुरू में यह घटना जालियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919 ) से भी पहले हुई थी. डोंबारी बुरू में 9 जनवरी, 1899 को घटना घटित हुई थी. सैकड़ों आदिवासियों की शहादत को हर साल याद की जाती है. इसी क्रम में शनिवार (9 जनवरी, 2021) को खूंटी के सांसद सह केंद्रीय आदिवासी जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा मुख्य अतिथि के तौर पर शनिवार को उपस्थित होकर शहीदों को नमन करेंगे.
अंग्रेजों के खिलाफ उलगुलान को लेकर 9 जनवरी, 1899 को भगवान बिरसा मुंडा अपने अनुयायियों के साथ सभा कर रहे थे. सभा की सूचना मिलने पर अंग्रेज सैनिक वहां आ धमके और सभा स्थल को चारों ओर से घेर लिया. अंग्रेजों ने सभा पर गोलियां बरसाना शुरू कर दिया. बिरसा मुंडा और उनके साथियों ने भी काफी संघर्ष किये. इस गोलीबारी के बीच से बिरसा मुंडा किसी तरह से निकलने में सफल रहे, लेकिन सैकड़ों लोग शहीद हो गये. इस हत्याकांड में शहीद हुए लोगों की याद में यहां हर साल 9 जनवरी को मेला लगाया जाता है. लेकिन, इस बार कोरोना वायरस संक्रमण के कारण लोगों की भीड़ कम देखने को मिलेगी. जिस स्थल पर अंग्रेज सिपाहियों ने सैकड़ों आदिवासी को मौत के घाट उतार दिया गया था, वहां 110 फीट ऊंची एक विशाल स्तंभ का निर्माण किया गया है.
डोंबारी बुरू में शहीद हुए सैकड़ों शहीदों में से अब तक सभी की पहचान नहीं हो पायी है. शहीद हुए लोगों में मात्र 6 लोगों की ही पहचान हो सकी है. इसमें गुटूहातू के हाथीराम मुंडा, हाड़ी मुंडा, बरटोली के सिंगराय मुंडा, बंकन मुंडा की पत्नी, मझिया मुंडा की पत्नी और डुंगडुंग मुंडा की पत्नी शामिल हैं.
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डोंबारी बुरू में मेला आयोजित करने के लिए अखाड़ा, भवन और भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा बनायी गयी. उक्त निर्माण के लिए भूमि देने वाले बिसु मुंडा को आजतक जमीन का मुआवजा नहीं मिला है. उक्त स्थल की देखरेख के लिए उन्हें ही नौकरी पर रखा गया था. शुरुआत में उन्हें जिला परिषद से वेतन दिया जा रहा था, लेकिन नवंबर 1996 से वेतन भी बंद हो गया. बिसु के मुताबिक, उन्हें दिया गया आश्वासन पूरा नहीं किया गया है. उन्होंने कुल 80 डिसमिल जमीन दी है.
खूंटी के सांसद सह केंद्रीय मंत्री अर्जुन बुंडा डोंबारी बुरु में शहादत दिवस के अवसर पर शामिल होंगे. इस दौरान डोंबारी बुरु में शहीद हुए लोगों को याद किया जायेगा. उन्हें श्रद्धांजलि दी जायेगी और भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा में माल्यापर्ण किया जायेगा. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री सह खूंटी सांसद अर्जुन मुंडा और विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा उपस्थित रहेंगे. इससे पहले केंद्रीय मंत्री सालेहातू में स्थित स्कूल की दीवार का शिलान्यास करेंगे. वहीं, सामाजिक बैठक में भी हिस्सा लेंगे.
डोंबारी बुरु में आयोजित कार्यक्रम की तैयारी पूरी कर ली गयी है. वहां पुलिस जवानों ने सुरक्षा-व्यवस्था का जायेजा लिया. वहीं, रंग-रोगन तथा साफ-सफाई पूरी कर ली गयी है. पार्किंग की भी व्यवस्था की गयी है. खूंटी डीसी शशि रंजन ने कहा कि डोंबारी बुरु में हर वर्ष की भांति ही इस साल भी कार्यक्रम आयोजित होगी. लेकिन, कोरोना महामारी को देखते हुए अधिक भीड़ नहीं होने दी जायेगी. जो भी लोग आयेंगे उन्हें सामाजिक दूरी का पालन करना होगा. स्वास्थ्य विभाग द्वारा कैंप भी लगाया जायेगा.
Posted By : Samir Ranjan.
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