कानपुर कमिश्नर ने लिया VRS, फिर भी पद पर बरकरार, जानें कौन हैं असीम अरुण और कैसा रहा है अब तक का करियर

Kanpur News: कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने वीआरएस ले लिया है. इसके बावजूद भी वह पद पर बने हुए हैं. असीम अरुण कौन हैं और उनका अब तक का करियर कैसा रहा, जानने के लिए देखें यह खास रिपोर्ट...
Kanpur News: कानपुर के पुलिस आयुक्त असीम अरुण को वीआरएस लेने के बावजूद अभी पद से हटाया नहीं गया है. असीम अरुण न सिर्फ भाजपा नेताओं से मिल रहे हैं, बल्कि बावर्दी में पुलिसकर्मियों को भी संदेश दे रहे हैं. इसे लेकर चुनाव आयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं.
बता दें, कानपुर कमिश्नर असीम अरुण ने 8 जनवरी को VRS के लिए आवेदन किया था और फेसबुक में संदेश जारी कर राजनीति में आने के बारे में भी बताया था. उसके अगले दिन उन्होंने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह से भी मुलाकात की थी. इसके बाद भी उनको पद से नहीं हटाया गया. हालांकि 15 जनवरी को उन्हें वीआरएस की स्वीकृति मिली है.
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यूपी के बदायूं जिले में जन्मे असीम अरुण के पिता भी आईपीएस थे. श्रीराम अरुण उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक भी रहे. उनकी माता शशि अरुण जानी मानी लेखिका और समाजसेविका भी रही. उनकी शुरुआती पढ़ाई सेंट फ्रांसिस स्कूल से हुई. इसके बाद दिल्ली के सेंसिविटी कॉलेज से उन्होंने बीएससी की पढ़ाई की.
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असीम अरुण 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी है. भारतीय पुलिस सेवा में आने का बाद वह कई जिलों में तैनात रहे. टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड से लेकर बलरामपुर, हाथरस, सिद्धार्थ नगर, अलीगढ़, गोरखपुर और आगरा में बतौर पुलिस अधीक्षक एवं उप पुलिस महानिरीक्षक के पद पर उन्होंने सेवाएं दी. इसके बाद कुछ दिनों के लिए वह स्टडी रिलीफ में विदेश चले गए. उसके बाद उन्होंने एटीएस, उत्तर प्रदेश का प्रभार संभाला. वह वाराणसी जोन के आईजी भी रहे. इसके बाद वह ATS के आईजी भी बनाये गए.
असीम अरुण तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा में भी शामिल रहे. एसपीजी में क्लोज प्रोटेक्शन टीम (CPG) का भी नेतृत्व कर चुके हैं.
असीम अरुण ने आईएसआईएस के आतंकवादी सैफुल्लाह का एनकाउंटर ऑपरेशन को लीड किया था. सैफुल्लाह कानपुर का रहने वाला था. असीम अरुण को जानकारी मिली थी कि वह लखनऊ के ठाकुरगंज में छिपा हुआ है. यह पूरा घटनाक्रम पिछले यूपी चुनाव के बिल्कुल आखिरी में 8 मार्च 2017 में हुआ था. 22 साल के सैफुल्लाह के एनकाउंटर के बाद मिशन लगभग 12 घंटे तक चला था.
असीम अरुण के नेतृत्व में कमांडर ने सैफुल्लाह को सरेंडर करने को कहा, लेकिन सैफुल्लाह ने सरेंडर नहीं किया और सुरक्षा टीम पर गोलीबारी जारी रही. जवाबी कार्रवाई में उसे मार गिराया गया. एनकाउंटर के बाद सैफुल्लाह के पास से आईएसआईएस का झंडा भी मिला था.
रिपोर्ट- आयुष तिवारी, कानपुर
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By Prabhat Khabar News Desk
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