Exclusive: BPL को 10 रुपये में मिलनेवाली सोना सोबरन योजना की धोती बाजार में 150 में बेच रहे PDS डीलर
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 15 Jul 2022 3:09 PM
झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी सोना सोबरन योजना से मिलने वाली धोती धनबाद के खुले बाजारों में बेची जा रही है. इनकी कीमत दुकानदारों ने 120 रुपये 150 रुपये तक रखी है. बताते चलें कि इस योजना के तहत बीपीएल कार्डधारियों को साल में दो बार धोती, साड़ी और लूंगी दी जाती है.
प्रदीप कुमार
Special Story: अभी तक राशन और केरोसिन की कालाबाजारी ही पीडीएस दुकानदार कर रहे थे. लेकिन अब वे सरकार की महत्वाकांक्षी सोना सोबरन योजना पर भी पानी फेर रहे हैं. लाभुकों को दी जाने वाली धोती खुले बाजार में बिक रही है. इसकी जगह लाभुकों को निम्न क्वालिटी की धोती दी जा रही है. दुकानदारों के डर से लाभुक आवाज नहीं उठाते, क्योंकि उन्हें लगता है कि दुकानदार कहीं उनका कार्ड कैंसिल न करवा दें.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीपीएल कार्डधारी परिवारों में धोती, साड़ी और लुंगी वितरण के लिए सोना सोबरन धोती-साड़ी योजना की शुरुआत 16 अक्तूबर, 2020 को की थी. वैसे पूर्व में वर्ष 2014 में ही यह योजना शुरू की गयी थी, परंतु एनडीए की सरकार ने वर्ष 2015 में इसे बंद कर दिया. योजना का उद्देश्य राज्य के 57.10 लाख बीपीएल कार्ड धारकों को लाभ पहुंचाना है. योजना के तहत वर्ष में दो बार धोती, साड़ी और लुंगी दी जा रही है. लाभुकों को संबद्ध पीडीएस दुकान से योजना का लाभ देने का प्रावधान है.
सरकार ने गरीबों की परेशानी दूर करने के लिए योजना शुरू की, लेकिन पीडीएस दुकानदारों ने राशन, केरोसिन की तरह इसकी भी कालाबाजारी शुरू कर दी है. हाल यह है कि धोती खुले बाजार में बिक रही है. धनबाद का कुमारधुबी एक प्रमुख बाजार है. यहां काफी संख्या में छोटी-बड़ी दुकानें हैं. इस बाजार की एक खासियत यह है कि यहां सभी वर्गों के लिए सामान उपलब्ध है. इसलिए आसपास के सैकड़ों गांवों के ग्रामीण यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं. यहां रविवार व गुरुवार को हाट भी लगता है. इसी बाजार की दुकान में सोना सोबरन योजना की धोती भी मिल रही है. 10 रुपये वाली धोती यहां दुकानदार 120-150 रुपये में बेच रहे हैं. उन्हें जरा भी डर नहीं कि यदि अधिकारियों को इसकी भनक लगी, तो क्या होगा.
सरकार मफतलाल कंपनी की रियल डायमंड धोती पीडीएस डीलरों को आवंटित कर रही है. इस पर स्पेशली मैन्युफैक्चर्ड फॉर झारखंड गवर्नमेंट और में नॉट फॉर सेल अंकित है. इसकी लंबाई 4.50 मीटर व चौड़ाई 117 सेमी है. यह पॉलिस्टर-कॉटन ब्लीच्ड है. इस धोती को डीलर बाजार में 50-60 रुपये में बेच देते हैं. दुकानदार इसे ग्राहक देखकर 120-150 रुपये में बेच रहे हैं. इसकी जगह अन्य कंपनी की निम्न क्वालिटी की धोती लाभुकों को दी जाती है. इस धोती की लंबाई-चौड़ाई भी काफी कम होती है. इसमें 100 प्रतिशत कॉटन अंकित है. एक लाभुक का कहना था कि उसने जब इसका विरोध किया, तो दुकानदार ने कार्ड कैंसिल करवा देने की धमकी दी. उसने कहा कि जो मिल रहा है, उसे रख लो, नहीं तो परिणाम अच्छा नहीं होगा.
अभी योजना के तहत धोती का वितरण हो रहा है. यदि विभागीय अधिकारी मामले की जांच करें तो बड़ा खुलासा हो सकता है. सवाल यह है कि बड़ी मात्रा में धोती बाजार में कैसे पहुंच रही है? यदि लाभुक धोती बेचते तो कुछ मात्रा में धोती मिलती, लेकिन दुकान में तो जितनी चाहिए, उतनी धोती देने को दुकानदार तैयार रहते हैं. इससे यह साफ हो जाता है कि पीडीएस दुकानदार ही दुकानों में धोती सप्लाई कर रहे हैं.
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