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टाटा स्टील के कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, 20 फीसदी बोनस, 11 सितंबर को अकाउंट में आ जाएंगे पैसे

Updated at : 04 Sep 2023 1:15 PM (IST)
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टाटा स्टील के कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, 20 फीसदी बोनस, 11 सितंबर को अकाउंट में आ जाएंगे पैसे

टाटा स्टील में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. दुर्गा पूजा से पहले बोनस समझौता हो गया है. इस बार उम्मीद से ज्यादा प्रबंधन ने दिया है. इस बार 20 फीसदी बोनस मिलने जा रहा है. हालांकि, इस बार गुडविल अमाउंट नहीं मिलेगा. इस मद में पिछले साल 20 हजार रुपये मिले थे.

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टाटा स्टील के कर्मचारियों की सोमवार को बल्ले-बल्ले हो गई. इस बार उम्मीद से ज्यादा बोनस मिल गया है. जी हां, फॉर्मूला के हिसाब से कर्मचारियों को 17 से 18 फीसदी बोनस मिलना था, लेकिन यूनियन के नेताओं ने प्रबंधन पर दबाव बनाया और इसे 20 फीसदी कराने में सफल रहे. यानी इस बार टाटा स्टील के कर्मचारियों को 20 फीसदी बोनस मिलेगा. टाटा स्टील प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन ने सोमवार को बोनस समझौते का ऐलान किया. टाटा स्टील के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन के साथ सुबह 11 बजे एमडी ऑफिस में सालाना बोनस को लेकर यूनियन के साथ वार्ता हुई. इसके बाद इसकी घोषणा की गई. बताया गया है कि बोनस की राशि 11 सितंबर को कर्मचारियों के खाते में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे.

न्यूनतम 42561 और अधिकतम 4.61 लाख रुपए बोनस

समझौते के मुताबिक, इस बार 11,676 कर्मचारियों को बोनस मिलेगा. इसके लिए कंपनी 314.70 करोड़ रुपए खर्च करेगी. जमशेदपुर और ट्यूब्स के कर्मचारियों को 186.51 करोड़ रुपए बोनस मिलेंगे. एक कर्मचारी को औसतन 1,59,738 रुपए बोनस मिलेगा. फुल अटेंडेंस वाले एनएस सीरीज के कर्मचारियों को न्यूनतम 42,561 रुपए बोनस मिलेगा. वहीं, एक्चुअल अटेंडेंस वाले एनएस सीरीज के कर्मचारियों को अधिकतम 1,21,718 रुपए बोनस मिलेंगे. ओल्ड सीरीज के कर्मचारियों को अधिकतम 4,61,019 रुपए बोनस मिलेगा.

17 से 18 फीसदी बोनस मिलने की थी संभावना

इस साल टाटा स्टील के कर्मचारियों को 17 से 18 प्रतिशत बोनस मिलने की संभावना थी. 17 से 18 प्रतिशत बोनस समझौता होने पर बोनस मद में कर्मचारियों के बीच 280 से 290 करोड़ रुपए बंटते. हालांकि, यूनियन कर्मचारियों को 20 प्रतिशत बोनस दिलाने पर अड़ गई और प्रबंधन को उनकी मांग माननी पड़ी. बोनस की गणना नेट प्रोफिट, प्रोडक्टिविटी और सेफ्टी हैं. इस साल सेफ्टी मानदंड में राशि कटेगी, पिछले साल सेफ्टी में पूरी राशि मिली थी.

पिछले साल मिला था 317.57 करोड़ रुपए

वर्ष 2022 में टाटा स्टील में बोनस की कुल राशि 317.57 करोड़ और 47.42 करोड़ रुपये गुडविल अमाउंट मिलाकर कुल 364.93 करोड़ रुपये बंटे थे. 317.51 करोड़ की राशि टाटा स्टील जमशेदपुर सहित देश के सारे लोकेशन की थी. इन सारे लोकेशनों के कुल कर्मचारियों की संख्या पिछले साल 23710 थी, जिनके बेसिक और डीए की राशि 1587 करोड़ हो रही थी. इस बोनसेवल सैलरी की 20 प्रतिशत राशि 377.51 करोड़ थी. इसमें से टाटा स्टील जमशेदपुर और ट्यूब डिवीजन का बोनस 188.64 करोड़ रुपये था, जबकि 2021 में यह राशि 158.31 करोड़ रुपये थी. इसी तरह जमशेदपुर और ट्यूब्स के कर्मचारियों को पिछले साल बोनस के रूप में 30 करोड़ ज्यादा मिले थे, अभी भी बोनस पुराने फॉर्मले के अनुसार होगा. जबकि 2021 में 270.28 करोड़ रुपये थी.

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पुराने फॉर्मूले के आधार पर होगा बोनस समझौता

इस साल भी टाटा स्टील में बोनस पुराने फॉर्मूले के आधार पर होगा. टाटा स्टील में बोनस फाॅर्मूला वर्ष 2023-2024 तक के लिए बना हुआ है. इसके तहत प्रॉफिट का 1.5 फीसदी, प्रोफिटेबिलिटी पर प्रॉफिट प्रति टन सेलेबल स्टील, प्रोडक्टिविटी प्रति टन क्रूड स्टील का एक व्यक्ति प्रति वर्ष उत्पादन करना और सेफ्टी यानी एलटीआइआर के आधार पर वर्ष 2024 तक का समझौता होगा. वर्ष 2012 के पहले भी प्रतिशत के आधार पर बोनस समझौता होता था. वर्ष 2012 के बाद से फॉर्मूला आधारित बोनस समझौता हुआ. इस फॉर्मूला में एक शर्त थी कि बोनस का अमाउंट (प्रति कर्मचारी) 20 प्रतिशत से ज्यादा होता है, तो फॉर्मूला की बजाय 20 प्रतिशत बोनस लागू होगा. टाटा स्टील में प्रॉफिट शेयरिंग बोनस का प्रावधान है.

20 फीसदी से अधिक बोनस का नहीं है प्रावधान

वित्तीय वर्ष 2021-22 में टाटा स्टील को 41,749 करोड़ बोनस हुआ था. फॉर्मूला के तहत कुल प्रॉफिट का 1.5 प्रतिशत बोनस में दिया गया. यानी बोनस राशि 626 करोड़ रुपये थी. अन्य मद में भी करीब 150 करोड़ रुपये मिलते, जो कुल राशि 50 प्रतिशत से ज्यादा था. कानूनन 20 प्रतिशत से ज्यादा बोनस का प्रावधान नहीं है, इसलिए पुराना फॉर्मूला पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पाया. कंपनी को हुए बेहतर मुनाफा पर बेहतर बोनस के मौके को यूनियन छोड़ना नहीं चाह रही थी, इसलिए प्रबंधन के सामने 20 हजार रुपये प्रति कर्मचारी नकद (गुडविल अमाउंट) गिफ्ट की डिमांड रखी गई, प्रबंधन ने यूनियन के साथ समझौता करते हुए तय किया कि यह फॉर्मूला वर्ष 2023-24 तक लागू रहेगा.

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टाटा ग्रोथ शॉप में भी आज होगा समझौता

पूर्व से चल रही परंपरा के अनुसार, सोमवार को टाटा ग्रोथ शॉप कर्मचारियों के सालना बोनस पर समझौता हुआ है. पिछले साल टाटा ग्रोथ शॉप प्रबंधन और यूनियन के बीच हुए समझौता के अनुसार, कंपनी के 267 कर्मियों के बीच 3.49 करोड़ रुपये बोनस की राशि बंटी थी. जिसमें न्यूनतम बोनस 72,624 रुपये और 20,000 रुपये गुडविल अमाउंट जबकि अधिकतम बोनस राशि 3,35,692 रुपये और 20,000 रुपये गुडविल अमाउंट थी.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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