अगर डायट में नहीं ले रहें ये फूड्स तो Kidney पर हो सकता है असर, होमियोपैथ में है कारगर इलाज
Author : sumitkumar1248654 Published by : Prabhat Khabar Updated At : 12 Mar 2020 1:27 PM
World Kidney Day किडनी शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है. इसका मुख्य कार्य रक्त के अंदर पैदा होनेवाले विषैले पदार्थ को छानना है. प्रतिदिन करीब 170 लिटर रक्त को दोनों किडनी शुद्ध करती है, लेकिन किडनी फेल होने का सबसे प्रमुख कारण डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन करना है. किडनी की समस्या के अन्य कारण में नमक का अधिक सेवन करना भी है.
किडनी शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है. इसका मुख्य कार्य रक्त के अंदर पैदा होनेवाले विषैले पदार्थ को छानना है. प्रतिदिन करीब 170 लिटर रक्त को दोनों किडनी शुद्ध करती है, लेकिन किडनी फेल होने का सबसे प्रमुख कारण डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन करना है. किडनी की समस्या के अन्य कारण में नमक का अधिक सेवन करना भी है. स्वस्थ जीवनशैली को अपना कर ही किडनी को स्वस्थ रख सकते हैं. इस साल की थीम है ‘ स्वस्थ किडनी, हर कहीं हर किसी के लिए
किडनी की बीमारी का मुख्य कारण हमारी असंतुलित जीवनशैली है. हमारी दिनचर्या सही नहीं है. सोने व उठने का समय भी गलत है. इसके अलावा हम पारपंरिक खानपान के अलावा फास्टफूड का उपयोग ज्यादा करने लगे हैं. फास्टफूड में ज्यादा नमक की मात्रा होती है, जिसका सीधा असर हमारी किडनी पर पड़ता है. नतीजा यह है कि कम उम्र में लोग किडनी की चपेट मेें आ रहे हैं.
किडनी मरीज को जैसे ही डायलिसिस की नौबत आती है, तो लोगों को लगता है कि अब जिंदगी चली जायेगी़ लेकिन किडनी के सैकड़ों मरीज हैं, जो 16 से 20 वर्ष से डायलिसिस कराने के बाद भी स्वस्थ हैं.
विदेशों में 30 से 35 साल तक नियमित डायलिसिस कराने के बाद किडनी के मरीज सामान्य जीवन व्यतीत करते हैं. रांची के एक किडनी रोगी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उनका 17 साल से डायलिसिस चल रहा है, लेकिन वह पूरी तरह स्वस्थ हैं. स्वस्थ रहने के लिए जीवनशैली को सुधार लिया है. किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ एके वैद्य ने बताया कि किडनी के वैसे मरीज जिनका डायलिसिस हो रहा है और उनको हार्ट, लीवर सहित अन्य बीमारी होती है उनको ज्यादा समस्या होती है.
जिनका नियमित डायलिसिस होता है उनका डायट प्लान संतुलित हाेना चाहिए. पोटैशियम युक्त खाना से परहेज रखना चाहिए. नारियल पानी, दाल का पानी, सब्जी व फल जिसमें पोटैशियम की मात्रा ज्यादा हो उसका सेवन नहीं करना चाहिए. किडनी स्वस्थ रखने के लिए जागरूकता जरूरी है.
किडनी हानिकारक रक्त में एकत्र सोडियम पोटैशियम को शुद्ध करती है. भारत में हर साल दो लाख लोग किडनी रोग पीड़ित होते हैं. इसमें एक लाख किडनी के मरीजों को डायलिसिस कराने की नौबत होती है.
जानकारी के अनुसार झारखंड में करीब 30 लाख लोग किडनी की विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं, जिसमें करीब आठ फीसदी लोगों को डायलिसिस करानी पड़ती है. विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार 60 फीसदी किडनी के मरीज गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचते हैं. ऐसे में किडनी के कई मरीजों की जान चली जाती है. अगर किडनी का मरीज सही समय पर किडनी सेंटर में पहुंच जाये, तो उसकी जान बचायी जा सकती है.
राज्य में किडनी के डॉक्टरों की संख्या मरीजों के हिसाब सेे बहुत कम है. राज्य के विभिन्न जिलों में करीब 20 डॉक्टर हैं, जो विभिन्न जिलाें में सेवा दे रहे हैं. किडनी रोग विशेषज्ञ डाॅ वैद्या ने बताया कि राज्य में कम से कम 80 किडनी रोग विशेषज्ञ की होना चाहिए. हालांकि डायलिसिस की सुविधा राज्य में बढ़ी है. राजधानी में ही 25 डायलिसिस सेंटर है, जहां नियमित मरीजों का डायलिसिस होता है.
किडनी की बीमारी का सबसे बड़ा कारण ज्यादा मात्रा में नकम का सेवन है. एक स्वस्थ व्यक्ति को दो से तीन ग्राम नमक का उपयोग करना चाहिए, लेकिन हमारा खानपान ऐसा है कि हम प्रतिदिन आठ से 10 ग्राम नमक का सेवन करते हैं. खाद्य पदार्थ के अलावा हम अपने खानपान में अचार, पापड़ और मिक्सचर को शामिल कर चुके हैं. इसमें अधिक मात्रा में नकम होता है. अगर पारंपरिक खाना : दाल, चावल, रोटी, हरी सब्जी का सेवन किया जाये, तो किडनी की बीमारी से बचा जा सकता है.
किडनी को स्वस्थ रखना है तो अल्कोहल, कैफीन व चॉकलेट जैसी चीजों के सेवन से बचना चाहिए. अल्कोहल, कैफीन (चाय-कॉफी), चॉकलेट व प्रोसेस्ड फूड के सेवन से किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. युवाओं में किडनी खराब हाेने का मुख्य कारण यही है.
नियमित ग्रीन टी का उपयोग शरीर के मेटाबोलिज्म को ठीक रखता है. रिम्स की डायटिशियन डॉ मीनाक्षी कुमारी ने बताया कि ग्रीन टी किडनी को स्वस्थ रखता है. इसके अलावा तुलसी चाय के अलावा ऑर्गेनिक चाय भी किडनी को स्वस्थ बनाये रखने में मदद करता है.
लगातार उल्टी आना
भूख नहीं लगना
थकान और कमजोरी
पेशाब की मात्रा कम होना
खुजली की समस्या होना
नींद नहीं आना
कम मात्रा में पानी पीने से
अधिक मात्रा में नमक का इस्तेमाल
दर्दनाशक दवाओं का अधिक सेवन
अधिक शराब पीना
मांस का अधिक सेवन
धूम्रपान करना व अधिक सॉफ्ट ड्रिक्स पीना
स्वस्थ किडनी के लिए जरूरी
मिठाइयों, चॉकलेट, केक-पेस्ट्री, वेफर्स, प्रोसेस्ड फूड, अचार, पापड़ और चटनी जैसी चीजों का सेवन सीमित मात्रा में करें
नॉनवेज, मशरूम और दालों का सेवन भी संतुलित मात्रा में करना चाहिए
गोभी में फाइटोकेमिकल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं जो कि फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाले नुकसान को रोकता हैं. इसमें पोटाशियम कम होने के कारण यह डायलिसिस के मरीज के लिए भी काफी फायदेमंद हैं.
इसमें मैंगनीज, विटामिन सी, फोलेट और फाइबरकाफी मात्रा में पाए जाते हैं जो कि किडनी को स्वस्थ रखते हैं.
मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होता है इसके अलावा इसमें बहुत मात्रा में प्रोटीन भी पाया जाता है. जो किडनी के मरीजों के लिए लाभदायक है.
इसमें बहुत मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. जो किडनी को स्वास्थ्य रखने में सहायक है.
An Apple in a day keeps Doctor away. अंग्रेजी का ये लाइन वाकई में सही है क्योंकि सेब में मौजूद फाइबर किडनी को साफ करने में मदद करते ही हैं साथ हार्ट प्रॉब्लम्स, कैंसर जैसी कई बीमारियों में कारगार है.
इसमें मौजूद ओलेक एसिड और एंटी-इन्फ्लेमेटरी फैटी एसिड्स हमारे शरीर में ऑक्सीडेशन को कम करते हैं. जो किडनी के लिए काफी लाभदायक हैं.
लहसुन में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट किडनी समेत कई बीमारियों में लाभदायक हैं.
इसे खाने से शरीर में विटामिन ए, बी6 और सी, फोलिक एसिड और फाइबर भरपूर मात्रा में प्राप्त होता हैं.
एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन 10 से 12 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए. यह शरीर में जमे टॉक्सिन को बाहर निकाल देता है. शरीर मेें पर्याप्त पानी है इसका संकेत साफ पेशाब का निकलना है. हालांकि विशेषज्ञों को यह भी कहना है कि शरीर को अगर पानी की अावश्यकता होती है वह खुद मांग करने लगता है. व्यक्ति के कामकाज व उसके तरीके पर पानी की आवश्यकता होती है. अगर व्यक्ति ज्यादा मेहनत वाला काम करता है, तो उसको ज्यादा पानी की जरूरत होती है़ वह भी एयर कंडिशन में काम करने वाले की अपेक्षा.
एंटीबायोटिक दवा का अनावश्यक उपयोग किडनी को क्षति पहुंचाता है. अक्सर देखा जाता है कि लोग हल्की बीमारी में भी एंटीबॉयोटिक व दर्द की दवा का सेवन करने लगते हैं. दवा का डोज पूरा नहीं होने से एंटीबाॅयोटिक का शरीर के महत्वपूर्ण अंग पर दुष्प्रभाव पड़ता है. ऐसे में बिना डाॅक्टरी परामर्श एंटीबायोटिक दवा का उपयोग नहीं करना चाहिए.
किडनी की बीमारी गलत जीवनशैली और खानपान के कारण होती है. मरीज डॉक्टर के पास अंतिम स्टेज में पहुंचता है, जिससे इलाज में परेशानी होती है़ होम्योपैथी में किडनी के मरीजों के लिए अब कारगर दवाइयां उपलब्ध हैं. अगर मरीज शुरुआती लक्षण होने पर होमियोपैथी दवा का उपयोग करता है, तो डायलिसिस की जरूरत नहीं होती है़
-डॉ यूएस वर्मा, होमियोपैथ रोग विशेषज्ञ
किडनी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. राज्य में जनसंख्या के करीब 10 फीसदी लोग किडनी की विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं. समय पर परामर्श के लिए नहीं पहुंचते हैं, इसलिए डायलिसिस की स्थिति आ जाती है. हालांकि डायलिसिस वाले मरीज भी काफी दिन तक सामान्य जीवन जी सकते हैं. उनको अपना खानपान सही रखना होता है.
-डॉ एके वैद्य, किडनी रोग विशेषज्ञ
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