पीरिड्यस के दौरान स्पेन में महिलाओं को हर महीने मिलेगी 3 दिन की छुट्टी, भारत में अभी भी इंतजार

menstrual leave : स्पेन सरकार इस योजना को अगले हफ्ते मंजूरी दे देगी. मासिक धर्म अवकाश योजना के तहत महिलाओं को हर महीने पीरियड्स के दौरान तीन दिन की छुट्टी स्वीकृत की जायेगी.
menstrual leave : पीरियड्स के दौरान अवकाश की घोषणा करने वाला पश्चिमी देशों में स्पेन पहला देश बन गया है. स्पेन सरकार ने महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध कराने के लिए इस योजना की शुरुआत की है.
स्पेन सरकार इस योजना को अगले हफ्ते मंजूरी दे देगी. मासिक धर्म अवकाश योजना के तहत महिलाओं को हर महीने पीरियड्स के दौरान तीन दिन की छुट्टी स्वीकृत की जायेगी. गौरतलब है कि विश्व के कई देश पीरियड्स के दौरान महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए हर महीने अवकाश प्रदान करते हैं, जिनमें जापान, दक्षिण कोरिया, इटली, इंडोनेशिया और जांबिया जैसे देश शामिल हैं.
स्पेन में महिलाओं को उनके अधिकार सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की सुविधा दी जा रही है. इसके लिए सरकार ने एक विशेष पैकेज की घोषणा की है. इसके तहत स्कूलों में भी किशोरियों को सेनेटरी पैड उपलब्ध करायी जायेगी.
गौरतलब है कि भारत में भी मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को विशेष अवकाश दिये जाने की बात हो रही है, लेकिन अभी तक इस ओर गंभीरता से प्रयास नहीं किये गये हैं. संसद में Menstruation Benefits Bill, 2018 पेश किया गया है, जिसमें महिलाओं को पीरियड्स के दौरान दो दिन की छुट्टी देने का प्रावधान है, लेकिन अभी तक यह बिल संसद से पारित नहीं हुआ है. भारत में सिर्फ बिहार सरकार ने महिलाओं को 1992 में पीरियड्स के दौरान दो दिन की छुट्टी देने का ऐलान किया था, जबकि अन्य राज्यों में ऐसा कुछ नहीं हुआ है.
भारत में 25 मिलियन से अधिक महिलाए एंडोमेट्रियोसिस यानी मासिक धर्म के दौरान असहनीय पीड़ा से पीड़ित रहती हैं और शारीरिक के साथ-साथ मानसिक वेदना भी झेलती हैं. चूंकि भारत में पीरिड्स पर बात करना एक टैबू की तरह है, इसलिए महिलाएं आज भी इसपर खुलकर बात नहीं करती हैं और अपनी बीमारी और परेशानी को छुपाती हैं.
भारत में अभी भी मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता की बात को दरकिनार किया जाता है, जिसकी वजह से महिलाएं कई तरह की बीमारियों की शिकार रहती हैं. उन्हें कई तरह का संक्रमण होता है, लेकिन वे इस बारे में किसी से बात नहीं करती हैं और कई बार इस वजह से वे बांझपन और गर्भाशय के कैंसर की शिकार तक हो जाती हैं. बावजूद इसके मासिक धर्म के दौरान उनके स्वास्थ्य को उपेक्षित किया जाता है और अभी तक इस ओर गंभीरता से प्रयास नहीं किये गये हैं. यहां तक कि महिलाओं को सेनेटरी पैड तक उपलब्ध नहीं होते हैं और वे घरेलू कपड़े से काम चलाती हैं.
Posted By : Rajneesh Anand
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