किडनी पर असर करता है चेहरे पर लगाने वाला फेयरनेस क्रीम? केईएम अस्पताल के कुछ डॉक्टर तो ऐसा ही कर रहे दावा
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 04 Feb 2023 2:59 PM
महाराष्ट्र में बायोटेक की 20 साल की एक छात्रा ने अकोला के एक ब्यूटीशियन से खरीदकर स्थानीय फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल किया. लोग उनके दमकते चेहरे और खूबसूरत फिगर के कायल होने लगे. उसका गोरापन देखकर उसकी मां और बड़ी बहन ने एक ही गोरापन क्रीम का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. इसका नतीजा गंभीर निकला.
मुंबई : चेहरे को गोरा बनाने के लिए या फिर गोरेपन को बरकरार रखने के लिए अक्सरहां भारत की महिलाएं देसी-विदेशी फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन, क्या हम-आप यह जान सकते हैं कि फेयरनेस क्रीम के इस्तेमाल का किडनी पर गहरा असर पड़ता है? मीडिया में आ रही खबरों की मानें, तो मुंबई के कुछ डॉक्टरों ने दावा किया है कि फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल करने से किडनी पर गहरा प्रभाव पड़ता है.
अंग्रेजी के अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में बायोटेक की 20 साल की एक छात्रा ने अकोला के एक ब्यूटीशियन से खरीदकर स्थानीय फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल किया. लोग उनके दमकते चेहरे और खूबसूरत फिगर के कायल होने लगे. उसका गोरापन देखकर उसकी मां और बड़ी बहन ने एक ही गोरापन क्रीम का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, लेकिन उनकी खुशी तब गायब हो गई, जब तीनों ने 2022 की शुरुआत में अगले चार महीनों में ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस विकसित करना शुरू कर दिया. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गुर्दे में छोटे फिल्टर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, अकोला की इन तीनों महिलाओं के किडनी फेल होने पर डॉक्टर हैरान रह गए. तथाकथित तौर पर फेयरनेस क्रीम के इस्तेमाल से किडनी फेल होने की स्थिति में वे तीनों महिलाएं मुंबई के लोअर परेल स्थित केईएम अस्पताल पहुंचे. घंटों ऑनलाइन मंथन के बाद केईएम में नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ तुकाराम जमाले और अकोला के एक डॉक्टर एक ही नतीजे पर पहुंचे कि तीनों एक ही मेकअप किट का इस्तेमाल कर रही थीं.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि केईएम की आयुर्वेदिक प्रयोगशाला ने फेयरनेस क्रीम सहित विभिन्न उत्पादों का परीक्षण किया. परीक्षण के बाद आए नतीजों ने डॉक्टरों को चौंका दिया. डॉ जमालेह ने बताया कि फेयरनेस क्रीम में पारा का स्तर बहुत ज्यादा है और यह स्वीकार्य स्तर 1 पीपीएम (प्रति मिलियन भाग) से कम है. बायोटेक की छात्रा के रक्त में पारा को स्तर 46 था, जो सामान्य 7 की सीमा से नीचे है.
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रिपोर्ट में कहा गया है कि पारा एक भारी धातु है. यह मनुष्यों के लिए विषैला होता है और मेलानोसाइट्स, रंजकता के लिए आवश्यक कोशिकाओं को अवरुद्ध कर सकता है. डॉक्टर ने कहा कि क्रीम में पारा की मात्रा अधिक थी, जिससे किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और वह कोमल हो गई. हालांकि, बायोटेक की छात्रा अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुई हैं, लेकिन उनकी मां और बहन ठीक हो चुकी हैं. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सौंदर्य प्रसाधनों में भारी धातुओं की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है. 2014 में दिल्ली स्थित सीएसई ने 32 क्रीमों का परीक्षण किया था, जिसमें पाया गया कि सौंदर्य प्रसाधनों में 14 भारी धातु मिश्रित थीं.
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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