Parshuram Jayanti 2026:एक्टर विशाल ने परदे पर परशुराम की भूमिका से जुड़ी चुनौतियों को किया याद

parshuram jayanti 2026
एक्टर विशाल आदित्य सिंह ने छोटे परदे पर परशुराम की भूमिका सीरियल परशुराम में निभाई थी. इस इंटरव्यू में उस शो से जुड़े अनुभव और चुनौतियों को उन्होंने किया याद
parshuram jayanti 2026:आज अक्षय तृतीया का पावन पर्व है. इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की जयंती भी मनायी जाती है. हिंदू धर्म में परशुराम जयंती का धार्मिक ही नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक महत्व भी माना जाता है. इस विशेष अवसर पर टेलीविजन पर भगवान परशुराम की भूमिका निभा चुके अभिनेता विशाल आदित्य सिंह से उनके शो से जुड़ी यात्रा पर उर्मिला कोरी की बातचीत के प्रमुख अंश.
आपने परशुराम जैसे शक्तिशाली और जटिल किरदार को निभाने की तैयारी कैसे की?
भगवान परशुराम मेरा पहला मायथोलॉजिकल शो रहा है. उससे पहले और बाद में भी मैंने कोई मायथोलॉजी शो नहीं किया. परशुराम शो इसलिए भी किया, क्योंकि परदे पर कभी भगवान परशुराम की कहानी नहीं आयी थी. यह एकमात्र शो था, जिसमें भगवान परशुराम की यात्रा को दिखाया गया. मगर इससे चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं, क्योंकि कोई रेफरेंस पॉइंट नहीं होता. जब रेफरेंस पॉइंट नहीं था, तो मैंने अपनी सोच के अनुसार भगवान परशुराम के किरदार को परदे पर निभाया. सबसे पहले मैंने लैंग्वेज पर काम किया, फिर लुक पर.
लुक में आने में कितना समय लगता था?
एक से डेढ़ घंटे लग जाते थे. लुक फाइनल हो जाने के बाद भी अगर शूट के वक्त वह सही नहीं लगता था, तो एक-दो दिन उस पर एक्सपेरिमेंट किया जाता था. कभी विग बदले जाते थे, तो कभी अन्य चीजों में बदलाव किया जाता था. हमने परशुराम के लुक में ज्यादा भव्यता नहीं रखी, क्योंकि भगवान परशुराम का व्यक्तित्व अपने आप में ही भव्य है. उन्हें दर्शाने के लिए लुक में अतिरिक्त भव्यता की जरूरत नहीं है, उनका नाम ही काफी है.
सबसे मुश्किल आपके लिए कोई सीन था?
भगवान परशुराम ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे. यह सभी जानते हैं कि उन्होंने अपनी मां का वध किया था. उस सीन को करने से पहले मैं बिल्कुल भी कन्विंस नहीं था. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वे अपनी मां को कैसे मार सकते हैं. किस तरह से मैंने वह सीन किया, यह मैं ही जानता हूं.
क्या आपने इस किरदार के लिए किसी ग्रंथ या इतिहास का विशेष अध्ययन किया?
सच कहूं तो भगवान परशुराम पर बहुत कम लिखा गया है, इसलिए ज्यादा पढ़ने को नहीं मिला. मगर जो भी उपलब्ध था, मैंने वह पढ़ा. मैं सिर्फ स्क्रिप्ट पर निर्भर नहीं रहा. अलग-अलग किताबें पढ़ते हुए मुझे पता चला कि वे अष्टचिरंजीवियों में से एक हैं. कहा जाता है कि उन्होंने महेंद्रगिरि पर्वत पर तपस्या की. भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि को अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा भी उन्होंने ही दी.
भगवान परशुराम के किरदार को निभाते हुए आप किन बातों से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए?
परशुराम भगवान का मतलब सभी को लगता है कि एंग्री मैन, जो हमेशा गुस्से में रहता है. हमारी परेशानी यह है कि हम इंसान ही नहीं, बल्कि देवताओं के भी एक ही पहलू को पकड़ लेते हैं और उसी को बढ़ावा देते रहते हैं. शंकर जी के भांग पर बहुत बात होती है, विष पर नहीं. कृष्ण की सोलह हजार रानियों की चर्चा होती है, लेकिन उन्होंने राधा के लिए अपने प्रेम का त्याग किया, यह भी तो समझिये. इंसान भगवान को अपनी तरह ही दर्शाता है, तभी तो उनके भी दो हाथ और दो पांव दिखाये जाते हैं. क्या सच में भगवान के दो हाथ-पांव होते हैं? भगवान परशुराम गुस्से के नहीं, बल्कि साहस और ज्ञान के प्रतीक हैं. वे वेदों के ज्ञाता होने के साथ-साथ मार्शल आर्ट के भी जानकार थे. वे एक महान गुरु भी थे. उनके शिष्यों में कर्ण, भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य शामिल थे.
इस भूमिका को निभाते क्या शूटिंग में भी दिक्कतें आयी थीं?
इस शो की शूटिंग हमने महाराष्ट्र के जंगलों में की. बारिश के दौरान एक बार बहुत बुरा हाल हो गया था. सेट टूट गया था और चारों तरफ पानी व कीचड़ भर गया था. मच्छर भी बहुत हो गये थे, लेकिन टेलीविजन शो की यही दिक्कत होती है कि आपको हर दिन एपिसोड शूट करना ही पड़ता है. किस तरह से हमने शूटिंग की, मैं उसे शब्दों में पूरी तरह बयां नहीं कर पाऊंगा. यह पूरी तरह ‘शो मस्ट गो ऑन’ वाला मामला था.
आज के युवाओं के लिए परशुराम के जीवन से क्या सीख ली जा सकती है?
वे दृढ़निश्चयी थे, जो उनके आत्म-नियंत्रण को दर्शाता है. अगर वे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होते, तो वे इतने दृढ़निश्चयी नहीं होते. उनसे यह बात युवाओं को सीखनी चाहिए.
दृढ़ निश्चय के साथ-साथ गलत चीजों के खिलाफ खड़े होने की उनकी काबिलियत भी कमाल की है. हैहय वंश या क्षत्रिय वंश के नाश की जो बात सामने आती है, वह इसलिए कि उन लोगों ने उत्पात मचा रखा था, इसलिए उन्हें गलत के खिलाफ खड़ा होना पड़ा.
ये सभी बातें प्रेरणादायी हैं.
इस भूमिका ने आपके निजी जीवन या सोच में क्या बदलाव लाया?
मैं धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक हूं. इस जर्नी में एक ही एंट्री है और एक ही एग्जिट है. मैं पूजा-पाठ से ज्यादा खुद में ईमानदारी, करुणा और सद्भाव के साथ-साथ जिम्मेदारी के साथ अपनी जिंदगी जीना पसंद करता हूं. मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, किसी में भी माथा टेकने से मुझे कोई परेशानी नहीं है, लेकिन कर्म सबसे महत्वपूर्ण है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Urmila Kori
I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




