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Dhoom Dhaam Movie Review : टुकड़ों में ही एंटरटेन कर पाती है

Updated at : 16 Feb 2025 6:53 AM (IST)
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dhoom dhaam movie review

dhoom dhaam movie review

नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही यामी गौतम धर और प्रतीक गांधी की फिल्म धूम धाम देखने का प्लान कर रहे हैं तो इससे पहले पढ़ लें ये रिव्यु

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फिल्म :धूम धाम 

निर्देशक -ऋषभ सेठ

निर्माता -आदित्य धर 

कलाकार – यामी गौतम धर ,प्रतीक गांधी, प्रतीक बब्बर,मुकुल चड्ढा ,एजाज खान और अन्य 

प्लेटफार्म -नेटफ्लिक्स 

रेटिंग -दो

dhoom dhaam movie review : 2019 में लेखक और निर्देशक के तौर फिल्म उरी द सर्जिकल स्ट्राइक से अपनी शुरुआत करने वाले आदित्य धर ने फिल्म आर्टिकल 370 से निर्माता के तौर पर भी अपनी पहचान को पुख्ता किया था.इस बार उन्होंने देशभक्ति से लबरेज या संवेदनशील विषय के बजाय अपनी फिल्म के लिए रोमांटिक कॉमेडी जॉनर को चुना.रोमांटिक कॉमेडी फिल्म धूम धाम से उन्होंने लेखक और निर्माता की भूमिका को दोहराया है, लेकिन परदे पर वह कुछ खास रचने से इस बार चूक गए हैं. कहानी और स्क्रीनप्ले जब वी मेट सहित कई पॉपुलर फिल्मों के फॉर्मूले को दोहराती है.

अपोजिट अट्रैक्ट वाली पुराने फॉर्मूले की कहानी 

फिल्म की कहानी कोयल (यामी गौतम )और वीर (प्रतीक गांधी )की है. जिनकी दो हफ़्तों की मुलाकात के बाद अरेंज मैरिज हो रही है. पेशे से जानवरों के डॉक्टर वीर को लगता है कि उसकी पत्नी कोयल एकदम भोली भाली सी है क्योंकि उसके सास ससुर ने कोयल की यही छवि उसके सामने बनायी है. दोनों की शादी भी हो जाती है और सुहागरात को अचानक से उनके फाइव स्टार होटल के कमरे में दस्तक होती है और दो गुंडे टाइप आदमी किसी चार्ली को ढूंढते हुए वहां आये हैं.किसी तरह से वीर, कोयल के साथ वहां से बचकर भागता है,लेकिन इस दौरान उसे मालूम पड़ता है कि जिस कोयल को वह भोली भाली समझ रहा है. वह कोयल कार चलाने में माहिर होने के साथ -साथ  गुंडों के छक्के छुड़ाने में भी आगे है. कोयल का यह वर्जन देख वीर का रिएक्शन क्या होगा.चार्ली कौन है और वह किससे जुड़ा हुआ है. आखिर क्यों गुंडे वीर और कोयल का पीछा कर रहे हैं.ये सब सवालों के जवाब फिल्म आगे देती है.

फिल्म की खूबियां और खामियां

फिल्म के सह लेखक और निर्माता आदित्य धर ने इंटरव्यू के दौरान यह बात बताई थी कि उन्होंने इस फिल्म की कहानी 2014 में लिखी थी. फिल्म देखते हुए आपको इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले में कई फिल्मों की छाप साफ़ तौर पर नजर आती है.कुछ भी नया नहीं परोसती है. फिल्म में फेमिनिज्म का तड़का भी लगाया गया है लेकिन वह भी फिल्म में कुछ खास जोड़ नहीं पायी है. उलटे यह मोनोलॉग मुंबई के परिवेश के लिए थोड़ा अनफिट भी लगता है क्योंकि कहानी मुंबई पर बेस्ड हो गयी है हालांकि जब आदित्य ने कहानी लिखी थी तो दिल्ली कहानी का आधार था. दो अलग अलग लोग हैं, जिनके बीच कुछ भी एक जैसा नहीं है,लेकिन उनका अलग होना ही उन्हें एक दूसरे के लिए और खास बना जाता है. ये पहलू भी अब तक कई फिल्मों में नजर आ चुका है. कुल मिलाकर यह रोमांटिक कॉमेडी फिल्म टुकड़ों में एंटरटेन करती हैं लेकिन पूरी फिल्म एंटरटेनमेंट का पैकेज साबित नहीं होती है. यही कमजोरी  फिल्म के संवाद में भी रह गयी है. किसी कॉमेडी फिल्म की सबसे बड़ी जरुरत संवाद होते हैं. फिल्म की लम्बाई एक घंटे 48 मिनट की है और यह एक रात की ही कहानी है तो फिल्म सीधे ही मूल कहानी पर आ जाती है.यह इस फिल्म के अच्छे पहलुओं में से एक है. फिल्म का गीत संगीत भी प्रभावित नहीं करता है. 

यामी और प्रतीक का अभिनय फिल्म की खूबी

अभिनय की बात करें तो यामी गौतम धर और प्रतीक गांधी अपने अभिनय से इस फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले को मजबूती देते हैं.यामी गौतम धर ने इस तरह का किरदार पहले कभी नहीं किया है. वह अपनी भूमिका के साथ  पूरी तरह से न्याय करती हैं.प्रतीक गांधी भी अपने सहज अभिनय से फिल्म को एंगेजिंग बनाते हैं. प्रतीक बब्बर छोटी सी भूमिका में असरदार रहे हैं.बाकी के किरदार ठीक ठाक रहे हैं.

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Urmila Kori

लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.

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