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Exclusive: 12 सालों के संघर्ष ने ही यह बेहतर वक़्त लाया है- सत्यजीत दुबे

Updated at : 18 Feb 2022 8:57 PM (IST)
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Exclusive: 12 सालों के संघर्ष ने ही यह बेहतर वक़्त लाया है- सत्यजीत दुबे

अमेज़न प्राइम वीडियो पर वेब सीरीज बेस्टसेलर ने इस शुक्रवार दस्तक दे दिया है. इस वेब सीरीज का अहम हिस्सा अभिनेता सत्यजीत दुबे भी हैं.

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अमेज़न प्राइम वीडियो पर वेब सीरीज बेस्टसेलर ने इस शुक्रवार दस्तक दे दिया है. इस वेब सीरीज का अहम हिस्सा अभिनेता सत्यजीत दुबे भी हैं. जिन्होंने मुम्बई डायरीज में अपने परफॉर्मेंस के लिए वाहवाही बटोरी थी. उनकी इस नयी वेब सीरीज ,कैरियर पर उर्मिला कोरी से हुई बातचीत…

बेस्टसेलर का किस तरह से आप हिस्सा बनें

कविश सिन्हा जिन्होंने मुझे मुम्बई डायरीज में कास्ट किया था. उनका मुझे फ़ोन आया कि सत्या एक हमारे पास शो आया है. उसमें एक अहम किरदार है. हम चाहते हैं कि आप आकर टेस्ट दे दें. मैंने टेस्ट दिया और दो दिन बाद ही सिद्धार्थ मल्होत्रा जो हमारे शो के निर्माता और शो रनर है.उनका मुझे कॉल आया कि हमने तुम्हारा टेस्ट देखा.हमें बहुत पसंद आया.तुम आकर मिल लो.जब हम उनसे मिलने गए तो उन्होंने कहानी सुना दी और चट मंगनी और पट ब्याह वाला मामला हो गया.

एक्टर के तौर पर आपको बेस्टसेलर ने क्या खास मौका दिया है

इस शो में जो किरदार है.वैसा किरदार मैं करना चाहता था और इस शो ने मुझे वो मौका दिया. मैं अपने किरदार के बारे में ज़्यादा बता नहीं सकता हूं क्योंकि वो साइकोलॉजिकल थ्रिलर है. आप जब शो देखेंगी तो आपको पता चलेगा कि मैं क्या कहने की कोशिश कर रहा हूं. बस यही कह सकता हूँ कि बेस्ट सेलर मेरे करियर का महत्वपूर्ण माइलस्टोन फ़िल्म है.

साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है तो क्या खास और अलग तैयारियां थी

आप कहानी औऱ किरदार इतनी दफा पढ़ ले और समझ ले कि वो आपके दिमाग में बैठ जाए तो फिर आप एक्ट नहीं बस रिएक्ट करते हैं .जो आपको एक्शन और कट के बीच करना चाहिए.अगर आप एक्टिंग कर रहे हैं और वो एक्टिंग पकड़ी गयी तो फिर वो बुरी एक्टिंग है. एक्टर के तौर पर मेरे लिए महत्वपूर्ण था कि मैं किरदार के दिमाग में घुसूं.हर इंसान के अंदर सारे इमोशन्स होते हैं.एक एक्टर जानता है कि कैसे उनको बाहर निकालना है. मुझे बहुत ज़्यादा बदलाव खुद में नहीं लाना पड़ा. हां कुछ हिस्सों में किरदार चुनौतीपूर्ण है लेकिन अगर वो ना हो तो फिर मज़ा नहीं आता है

इस वेब सीरीज से मिथुन ओटीटी डेब्यू कर रहे हैं उनके साथ स्क्रीन शेयर करने का अनुभव कैसा था

दादा की इमेज लोगों के दिमाग में डिस्को डांसर की है लेकिन मैं उनको परफ़ॉर्मर के तौर पर देखता हूं.मैंने उनकी फिल्म मृगया भी देखी है.जिनके लिए उन्हें नेशनल अवार्ड मिला.मणिरत्नम की गुरु है. अग्निपथ भी है .वो बहुत ही धुरंधर एक्टर हैं .लीजेंड हैं अगर उनके सामने आपको एक्टिंग करनी है तो आपको बहुत स्ट्रांग रहना पड़ेगा.उनके लाइन्स उनके क्युस, रिएक्शन्स ऐसे होते हैं जैसे कोई गुगली है पूरी तैयारी से जाना पड़ेगा.मैंने वही किया. हमारे बहुत अच्छे सीन्स हुए.बेस्टसेलर के सेट का जो पहला दिन और पहला सीन था.वो मिथुन दादा के साथ था.

बेस्टसेलर में किताबें और लेखन अहम है आप कितना पढ़ते और लिखते हैं

पढ़ना मुझे पसंद है .मैं अपने लिए लिखता हूं .कविताएं लिखना मुझे पसंद है .जैसे जैसे इंडस्ट्री में वक़्त गुजरता जा रहा है. मैं महसूस कर रहा हूं कि मुझे फिल्में बनानी है .कहानियां भी कहानी हैं. मेरी पहचान भले एक्टर की है लेकिन मैं डांसर और सिंगर भी हूं .

कैरियर के शुरुआती दौर में आपने कहा था कि नानी के पेंशन के पैसों से आपको मुम्बई में गुजारा करना पड़ा था अब ज़िन्दगी कितनी बदल गयी है

मेरी जर्नी 2018 से बेहतर होने लगी थी जब मेरे पास प्रस्थानम आयी. प्रस्थानम के बाद मैंने मुम्बई डायरीज शूट की और फिर पेंडेमिक आ गया प्रोजेक्ट्स रुक गए. पेंडेमिक नहीं होता तो चीज़ें बेहतर होती थी लेकिन सिर्फ मेरे लिए नहीं.हर किसी के लिए तो मैं चीजों को नेगेटिव नहीं बल्कि पॉजिटिव तौर पर लेना चाहूंगा कि इस वक़्त ने मुझे बेहतर बनाया. मुझे लगता है कि दिक्कतें बेहतर ही बनाती हैं . मेरा विल पावर बहुत मजबूत रहा है जब लोगों ने मुझे कहा था कि क्या तू विलासपुर का रहने वाला एक्टर बनने की सोच रहा है .आखिर एक्टर बन ही गया .शुरुआत में जब मुम्बई आया था तो नानी के पेंशन के पैसों से गुजारा किया.आज अपनी माँ को साथ रखता हूं.दो बिल्लियां एक कुत्ता है.ढेर सारे पौधे हैं .रोटी कपड़ा और मकान की दिक्कत खत्म हो गयी है. अब जुहू किसी प्रोड्यूसर से मिलने जाना है तो कार में जा सकता हूं.बस या ऑटो के धक्के नहीं खाने पड़ते हैं. 12 सालों की मेहनत का यह फल है.

आपकी आनेवाली फिल्में

एक साइंस फिक्शन फ़िल्म कर रहा हूं.रेवती मैम के निर्देशन में ये ज़िन्दगी फ़िल्म कर रहा हूं.जिसमें लड़के को पता चलता है कि वो छह महीने में मरने वाला है. काफी अलग अलग फिल्में हैं खास बात है कि मैं इनका चेहरा हूं.

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कोरी

लेखक के बारे में

By कोरी

कोरी is a contributor at Prabhat Khabar.

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