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हम जैसे एक्टर्स की हालत पहले भी खराब थी, अभी भी है,जानिए ऐसा क्यों कहा मुक्काबाज फेम एक्टर विनीत कुमार ने

Updated at : 21 Jul 2022 2:22 PM (IST)
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हम जैसे एक्टर्स की हालत पहले भी खराब थी, अभी भी है,जानिए ऐसा क्यों कहा मुक्काबाज फेम एक्टर विनीत कुमार ने

एक्टर विनीत कुमार इन दिनों वेब सीरीज रंगबाज को लेकर चर्चा में है. एक्टर इसे लेकर प्रमोशन में लगे हुए है. इसमें उन्होंने हारून अली शाह बेग का किरदार निभाया है, जो एक गैंगस्टर के साथ-साथ पॉलिटिशियन है.

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Vineet Kumar interview: मुक्काबाज़, सांड की आंख, बेताल, बार्ड ऑफ ब्लड फेम एक्टर विनीत कुमार जल्द ही ज़ी5 की वेब सीरीज रंगबाज डर की राजनीति में नज़र आएंगे. वे इस सीजन इस सीरीज का चेहरा हैं, विनीत बताते हैं कि यह सीजन भी बेहतरीन है. उम्मीद है कि दर्शकों को भी खूब पसंद आएगा. उर्मिला कोरी से हुई बातचीत.

रंगबाज़ सीरीज में आपके किरदार में क्या खास है?

सीरीज में मेरे किरदार का नाम हारून अली शाह बेग जिसे प्यार से सभी साहेब बुलाते हैं. इस किरदार की जर्नी कमाल की है. ये गैंगस्टर है साथ में पॉलिटिशियन भी है. जिस वजह से उसके पास पावर एक अलग ही लेवल की है. उसके एक इशारे पर सरकारें बन सकती हैं और गिर भी सकती है. ये रूटीन गैंगस्टर ड्रामा नहीं होने वाला है. इसमें पॉलिटिक्स बहुत अच्छे से मिक्स होने वाली है.

कुछ खास किरदार के लिए तैयारी भी करनी पड़ी?

20 साल के किरदार से 50 साल तक के किरदार को पर्दे पर दिखाना था. मेरे लिए यह एक बहुत अच्छा मौका था,जो मैं हमेशा खोजता हूं. 30 से अधिक उम्र के लिए मैंने 10 किलो वजन बढ़ाया है,बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन के साथ -साथ मानसिक तौर पर भी मैंने अपने किरदार की बारीकियों को समझने की कोशिश की. मैंने किरदार को पूरी तरह से घोट लिया था. यह कहना गलत ना होगा.

इस सीरीज की शूटिंग से जुड़ी कोई दिलचस्प घटना जिसे आप साझा करना चाहेंगे?

फ़िल्म की शूटिंग के वक़्त असल पुलिस मौके पर आ गयी थी. दरअसल रात का एक सीक्वेंस था,जिसमें पुलिस और गैंगस्टर्स के बीच मुठभेड़ को फिल्माया जा रहा था. गोलियों की आवाज़ सुनकर लोगों को लगा कि कुछ गलत हो रहा है. लोगों ने पुलिस को फ़ोन करना शुरू कर दिया।असली पुलिस मौके पर आ गयी (हंसते हुए) कमाल तब हो गया जब वे नकली पुलिस के साथ मिक्स हो गयी. तू यहां क्यों आया. तुझे वहां पर होना था. ऐसी बातें शुरू हो गयी. आखिरकार थोड़ी देर बाद सारा कंफ्यूजन क्लियर हुआ और शूटिंग फिर से शुरू हुई.

एक एक्टर के तौर पर रियलिस्टिक या फिक्शन स्पेस किसमे में एक्टिंग ज़्यादा खुशी देती है?

मुझे अगर अच्छी स्क्रिप्ट लिखी गयी हो. किरदार बहुत खूबसूरत हो. उसका दिल दिख गया तो सबसे ज़्यादा मुझे वही आकर्षित करता है. उसके बाद मेरे लिए ये बात मायने नहीं रखती है कि रीयलिस्टिक स्पेस में है या फिक्शन है या दोनों के मिक्स जॉनर में है. मैं एक एक्टर हूं तो मेरा काम है हर किरदार को बखूबी ढंग से निभाना फिर चाहे वह रियलिस्टिक हो या फिर फिक्शन.

मौजूदा समय लार्जर देन लाइफ सिनेमा का है,क्या ये ट्रेंड एक्टर के तौर पर आपकी सोच को प्रभावित करता है?

मुझे क्या प्रभावित करेंगी. हमारी हालत पहले भी खराब थी. अभी भी खराब है. हम थिएटर में भिखारी का कटोरा हाथ में लेकर जाते हैं. छोटा-छोटा चव्वनी अट्ठनी मिल गया, तो मिल गया. हमने अपने सिनेमा को उतना नर्चर नहीं किया है,इसलिए हमारी जमीन खिसक रही है. हमने अपने कलाकारों को प्यार दिया ही नहीं है. अभी सफलता का मतलब बॉक्स ऑफिस हो गया है. जो गड़बड़ चीज़ है. सक्सेस से मेरा मतलब एक कलाकार ने खुद पर कितना काम किया है. एक कलाकार किसी किरदार को कितनी बारीकी से निभाता है. वो महत्वपूर्ण है. हमने उन कलाकारों को वो स्पेस दी ही नहीं,जो उन्हें मिलनी चाहिए. अपनी कहानियां कही जाएंगी,तो कोई दिक्कत नहीं होगी,बाकी आपने जो थिएटर की बात तो वो हमेशा से दिक्कत थी. कब मेरी कोई फ़िल्म 2 हज़ार स्क्रीन पर रिलीज होगी. फ़िल्म चाहे कितनी भी कमाल की बनी हो ,लेकिन थिएटर के गणित से जूझना पड़ता ही है.

आनेवाला समय में क्या हालात और बुरे होने वाले हैं?

ये फेज है. वैसे इससे पहले भी कमल हसन जी की फिल्मों ने यहां अच्छा किया है,लेकिन इस बार असर पड़ेगा,क्योंकि पहले और अभी के दर्शकों में सबसे बड़ा फर्क ये आया है कि अभी के दर्शक डब फिल्मों को देखने के आदि हैं. इसके लिए ज़रूरी है कि हम अपनी कहानियों को लेकर आए, तभी हम टिके रह पाएंगे.

एक एक्टर के तौर पर आपकी चुनौतियां अब क्या है?

मुक्काबाज़ के बाद चीज़ें बदली हैं. अब मैं इस मुकाम पर हूं कि मुझे किसी प्रोजेक्ट को हां या ना कह सकूं,लेकिन साढ़े चार साल में मेरी कोई सोलो रिलीज ही नहीं हुई है. आधार मेरी फिल्म थी .जो रुक गयी. मेरी लिए वो सिर्फ फ़िल्म नहीं मेरी ज़िंदगी का हिस्सा थी. 18 साल लगे थे मुक्काबाज़ बनने में. उसके बाद कुछ अलग करने की कोशिश की. जो मुझे एक एक्टर के तौर पर खास मुकाम दे सकती थी. यह मेरे करियर के लिए ज़रूरी फ़िल्म थी,लेकिन फ़िल्म थिएटर में रिलीज ही नहीं हो पायी. यह फ़िल्म थिएटर में कब रिलीज होगी अब ये इसके निर्माता ही बता पाएंगे.

आनेवाले प्रोजेक्ट्स?

सिया और दिल तो ग्रे है.

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कोरी

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By कोरी

कोरी is a contributor at Prabhat Khabar.

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