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महिलाओं के मन की बातों को उजागर करती है द एंग्री इंडियन गॉडेसेस

Updated at : 04 Dec 2015 6:18 PM (IST)
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महिलाओं के मन की बातों को उजागर करती है द एंग्री इंडियन गॉडेसेस

।।उर्मिला कोरी।। फिल्म : एंग्री इंडियन गॉडेसेस निर्माता: गौरव ढिंगरा निर्देशक : पैन नलिन कलाकार: साराजेन डायस, संध्या मृदुल, अनुष्का मनचंदा, पवलीन गुजराल, अमृत मघेरा, राजश्री देशपांडे, तनिष्ठा चटर्जी रेटिंग 3 एंग्री इंडियन गॉडेसेस महिलाओं की दोस्ती और उनके मन को उजागर एक अलहदा फिल्म है. जो महिलाओं की दुनिया से रुबरु करवा रही है. […]

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।।उर्मिला कोरी।।

फिल्म : एंग्री इंडियन गॉडेसेस
निर्माता: गौरव ढिंगरा
निर्देशक : पैन नलिन
कलाकार: साराजेन डायस, संध्या मृदुल, अनुष्का मनचंदा, पवलीन गुजराल, अमृत मघेरा, राजश्री देशपांडे, तनिष्ठा चटर्जी
रेटिंग 3
एंग्री इंडियन गॉडेसेस महिलाओं की दोस्ती और उनके मन को उजागर एक अलहदा फिल्म है. जो महिलाओं की दुनिया से रुबरु करवा रही है. इस दुनिया का झरोखा सात लड़कियां बनी हैं. जो अलग अलग बैकग्राउंड और सोच की है.सभी की परेशिनयां भी एक दूसरे से अलग है लेकिन एक चीज समान है सभी समाज और उसकी सोच से त्रस्त हैं. समाज उन्हें अपनी जिंदगी जीने की आजादी नहीं दे रहा है. उनमे काबिलियत है लेकिन समाज अपनी रूढिवादी सोच के आगे उन्हें घुटने टेकने पर मजबूर कर रहा है. शादीशुदा महिलाओं के लिए उनका कैरियर है लेकिन घर और बच्चों को संभालना उनका ही काम है.
वह वर्कहोलिक नहीं हो सकती हैं. लड़कियों की अच्छाई का पैमाना ड्रिकिंक, स्मोकिंग और उनके कपड़े हैं.एक लड़की मां नहीं बन पा रही, तो उसके लिए वो ही जिम्मेदार है उसका पति नहीं ?, बॉलीवुड में विदेशी अभिनेत्रियों का इस्तेमाल शोपीस के तौर पर है. स्त्रियों की समलैंगिकता का मुद्दा भी सामने आता है. इस तरह की कई अलग अलग मुद्दे कहानी के साथ जुड़े हैं. कहानी की बात करें, तो इंडियन गॉडेसेस की कहानी फोटोग्राफर फ्रीडा (सारा-जेन डायस) और उसकी सहेलियों की है. कुछ उसके कॉलेज की सहेलियां है तो कुछ उसके प्रोफेशन से बनें रिश्तें से.
गोवा में फ्रीडा शादी करने जा रही है और उसने सहेलियों को बुलाया है लेकिन यह राज रखा गया है कि वह किससे शादी कर रही है. उसके बाद महिलाओं की आपसी बॉडिंग को बहुत ही खूबसूरती से दृश्यों और संवादों में बांधा गया है. फिल्म के पहला दृश्य बहुत ही खास है.जो फिल्म के मूल सोच को बखूबी उजागर कर जाता है. कुछ दृश्य और संवाद चौंकाते भी हैं खासकर सभी सखियों द्वारा एक लड़के को देखने वाला सीन. वैसे सेंसर बोर्ड ने जमकर कैंची चलायी है. कई शब्दों पर बीप की आवाज ही लगातार सुनायी देती है. फिल्म इंटरवल के बाद एक अलग ही मोड़ ले लेती है. जिससे कहानी के सिरे जुड़ते नहीं हैं. कहानी बिखरती है लेकिन यह एक अलग किस्म की फिल्म है. इससे इंकार नहीं किया जा सकता है. इसके लिए निर्देशक की जरूर तारीफ करनी होगी. फिल्म में सात लड़कियां हैं. फिल्म में ज्यादातर दृश्यों में अभिनेत्रियों ने मेकअप नहीं किया है.
डार्क सर्कल हो या उनके चेहरे के दाग पिम्पल और तिल सभी कैमरे पर नज़र आ रहे थे लेकिन इसके बाद भी सारी अदाकाराएं बहुत खूबसूरत लग रही है. सभी का चरित्र और उनका अभिनय उन्हें खूबसूरत बना देता है. उन में कई ऐसे चेहरे हैं जिनसे हम परिचित भी नहीं है लेकिन सभी का सहज अभिनय हमें बांधे रखता है. फिल्म का हर चेहरा खास है. फिल्म में ज्यादा अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया गया है.फिल्म का संगीत भी उसके विषय की तरह अलहदा है. जो कहानी के साथ पूरी तरह से न्याय करता है. फिल्म के संवाद बोल्ड़ लेकिन रोचक है. गोवा को बहुत ही खूबसूरती से फिल्म में उकेरा गया है. कुल मिलाकर यह फिल्म मुखर और नयी सोच और प्रस्तुति लिए हुए है. जिसकी धुरी पूरी तरह से महिलाएं हैं.
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