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सेंसर बोर्ड के सदस्यों में मतभेद, निहलानी पर एकतरफा फैसले का आरोप

20 Nov, 2015 8:57 pm
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सेंसर बोर्ड के सदस्यों में मतभेद, निहलानी पर एकतरफा फैसले का आरोप

नयी दिल्ली: सेंसर बोर्ड के सदस्यों ने संस्था के प्रमुख पहलाज निहलानी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि वह किसी को साथ लिए बिना काम कर रहे हैं और फिल्मों को प्रमाणपत्र देने में मनमाने फैसले कर रहे हैं.जेम्स बांड श्रृंखला की फिल्म ‘स्पेक्टर’ से चुंबन के दृश्य की अवधि को कम करने […]

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नयी दिल्ली: सेंसर बोर्ड के सदस्यों ने संस्था के प्रमुख पहलाज निहलानी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि वह किसी को साथ लिए बिना काम कर रहे हैं और फिल्मों को प्रमाणपत्र देने में मनमाने फैसले कर रहे हैं.जेम्स बांड श्रृंखला की फिल्म ‘स्पेक्टर’ से चुंबन के दृश्य की अवधि को कम करने और कुछ शब्दों को हटाने के बोर्ड के फैसले का खुलासा होने के बाद से सोशल मीडिया में निहलानी की खासी आलोचना हो रही है.

फिल्मकार और बोर्ड के सदस्य अशोक पंडित ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखने की योजना बना रहे हैं ताकि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से जुडे परेशानियों को उनके संज्ञान में लाया जा सके.पंडित ने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को यह आग्रह करते हुए पत्र लिखने जा रहा हूं कि स्थिति में सुधार होना चाहिए। संपूर्ण बोर्ड को विश्वास में लिए जाने की जरुरत है. निहलानी एक मजाक बन गए हैं. संदर्भ के बिना आप शब्दों को नहीं हटा सकते.” उन्होंने कहा कि फिल्म से शब्दों को हटाने के लिए निहलानी की ओर से मौखिक आदेश दिया गया जो नियमों के अनुसार नहीं है.
पंडित ने कहा, ‘‘उन्होंने राजश्री की फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ से भी शब्द काट दिए. इस तरह की साफ-सुथरी फिल्म से कोई शब्द कैसे हटाया जा सकता है? वे साफ-सुथरी फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं, इसके बावजूद इसे सेंसर किया गया.
पंडित ने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय फिलहाल अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म महोत्सव में व्यस्त है, लेकिन वह बहुत जल्द ही इस बारे में लिखेंगे.
सेंसर बोर्ड की एक अन्य सदस्य नंदिनी सरदेसाई ने कहा कि निहलानी के साथ उन्हें समस्याओं का सामना पहली बार नहीं करना पड रहा है, बल्कि वह नियुक्ति के बाद से ही बोर्ड को एकतरफा ढंग से चलाते आ रहे हैं.नंदिनी ने कहा, ‘‘वह सदस्यों को भरोसे में लिए बिना बोर्ड को चलाते हैं और उनके आने के बाद से ही यह समस्या चली आ रही है. आप हिंदी सिनेमा की फिल्मों को पशु कल्याण बोर्ड से स्वीकृति लेने के लिए कह सकते हैं, लेकिन हॉलीवुड के लोग यह कैसे कर सकते हैं? चुंबन तो चुंबन होता है. आप इसकी अवधि को लेकर फैसला कर सकते हैं?” उन्होंने कहा कि बोर्ड के सदस्य चाहते हैं कि इन मुद्दों पर चर्चा के लिए नए सीईओ अनुराग श्रीवास्तव बैठक बुलाएं
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