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अभिनेता अक्षय कुमार से खास बातचीत: महिलाओं की जीत की कहानी है ‘मिशन मंगल’

Updated at : 04 Aug 2019 7:44 AM (IST)
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अभिनेता अक्षय कुमार से खास बातचीत: महिलाओं की जीत की कहानी है ‘मिशन मंगल’

अक्षय कुमार की बहुचर्चित फिल्म ‘मिशन मंगल’ 15 अगस्त पर रिलीज होने वाली है. पिछले कुछ समय से रियलिस्टिक कहानियों के बतौर अभिनेता रहे अक्षय कुमार अपनी अगली फिल्म ‘मिशन मंगल’ को लेकर उत्साहित हैं. पेश है उनसे उर्मिला कोरी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश. -आप पहले से ज्यादा दुबले लग रहे हैं? मैंने […]

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अक्षय कुमार की बहुचर्चित फिल्म ‘मिशन मंगल’ 15 अगस्त पर रिलीज होने वाली है. पिछले कुछ समय से रियलिस्टिक कहानियों के बतौर अभिनेता रहे अक्षय कुमार अपनी अगली फिल्म ‘मिशन मंगल’ को लेकर उत्साहित हैं. पेश है उनसे उर्मिला कोरी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश.

-आप पहले से ज्यादा दुबले लग रहे हैं?

मैंने छह किलो वजन घटाया है. अपनी आनेवाली फिल्म ‘बच्चन पांडे’ के लिए. सूर्यवंशी में भी पहले के मुकाबले दुबला दिखूंगा. सूर्यवंशी फिल्म की शूटिंग लगभग खत्म होने वाली है. वजन घटाया इसका मतलब यह नहीं कि मैंने खाना छोड़ दिया है. वर्कआउट ज्यादा करता हूं और बिना डायट किये वजन कम करता हूं. पराठे अभी भी खाता हूं और जम कर खाता हूं.

-‘मिशन मंगल’ में आप अभिनेता होने के साथ-साथ निर्माता भी हैं. कौन सी बातें हैं जो आपको इस कहानी की अपील कर गयी?

सबसे बड़ी वजह थी कि यह फिल्म महिलाओं की जीत की कहानी है. महिलाओं ने होम साइंस को साइंस में अप्लाइ कर सफलता हासिल की. पूरियां तलने की तकनीक इस्तेमाल की गयी. स्लिंग शॉट थ्योरी जैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया है. बता दें कि हमें इस मिशन के लिए बहुत छोटा सा बजट मिला था. फिर भी हमने इस मिशन को पूरा किया. बाकी की दुनिया ने छह हजार करोड़ में किया था. हमने वही काम सिर्फ साढ़े चार सौ करोड़ में कर दिया. इन सभी चीजों ने मुझे काफी इंस्पायर किया. हम इस फिल्म से यह भी जताना चाहते हैं कि इंडियन साइंटिस्ट दुनिया के सबसे बेस्ट साइंटिस्ट हैं. उनका दिमाग बहुत तेज है.वे दूसरों से बेहतर हैं. ये हमने कई बार साबित किया है. नासा में लगभग 27 से 30 प्रतिशत भारतीय हैं, जो वहां काम करते हैं. ये आंकड़े अपने आप में इस बात की गवाही देते हैं. मुझे खुशी है कि यह स्टोरी मेरे पास आयी है. मुझे खुशी है कि मैंने यह फिल्म सिर्फ 32 दिनों में शूट की है.

-इस फिल्म में कई अभिनेत्रियां हैं?

मुझमें कोई इनसिक्योरिटीज नहीं है. मैं तो वीमेन सेंट्रिक शब्द के इस्तेमाल को भी सही नहीं मानता हूं. जब हम मेल सेंट्रिक नहीं कहते तो फीमेल सेंट्रिक क्यों कहते हैं. मैं ग्रेट फिल्मों पर यकीन करता हूं. मुझे फिल्मों में छोटे रोल करने में भी कोई परहेज नहीं है.

-मिशल मंगल के लिए अलग-अलग भाषाओं में कविता आ रही है.उसके पीछे की वजह क्या है?

हमारा उद्देश्य यही बताने का है कि साइंस की कोई भाषा नहीं होती है. कोई धर्म नहीं होता है. इसरो में लोग जाते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप हिंदू हैं कि मुस्लिम हैं या किसी और जाति धर्म के. सबकुछ वहां पर टैलेंट पर निर्भर करता है.

-रियलिस्टिक और अच्छी फिल्में आप लगातार कर रहे हैं. पर कुछ लोगों का कहना है कि अच्छी फिल्में मिलना मुश्किल है. इस पर आप क्या कहना चाहेंगे ?

मैं इसके लिए सारा श्रेय अपनी किस्मत को देना चाहूंगा कि अच्छी फिल्में मेरे पास आ जाती हैं. टॉयलेट एक प्रेम कथा मेरे पास आ गयी थी. चार साल से वो कहानी घूम रही थी लेकिन कोई इस पर काम नहीं करना चाहता था. मिशन मंगल को लेकर मैं गर्व से कह रहा हूं कि मेरी प्रोडक्शन ने भारत की पहली स्पेस फिल्म बनायी है. अब तक स्पेस को लेकर ड्रामा और कॉमेडी बनी हैं. रियलिज्म पर बनी यह पहली फिल्म है.

-मिशन मंगल में महिलाओं की अहम भूमिका रही है,महिलाओं के लिए यह फिल्म कैसे खास है?

कुछ मां-बाप ऐसे होते हैं जिनकी बेटियां अगर कहे कि उन्हें इंजीनियर बनना है तो वह बनने नहीं देते हैं. उनकी सोच है कि इंजीनियरिंग लड़कों का काम है. वैज्ञानिक बनना भी उनके हिसाब से लड़कों का ही काम है. वे अपनी बेटी को डॉक्टर या नर्स बनने को कहते हैं. पर अब समय बदल चुका है. एक महिला पहले घर का फाइनेंस संभालती थी, फिर कॉरपोरेट संभालने लगी और अब देश की फाइनेंस भी संभाल रही हैं. हमारी फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण इसका उदाहरण हैं.

-इस फिल्म का आपके लिए होमवर्क क्या रहा है?

मेरा मानना है कि साइंटिस्ट एक बेहतरीन प्रोफेशन है. जितना मैं जानने लगा हूं इस प्रोफेशन के बारे में. इस फिल्म के होमवर्क के लिए मेरे निर्देशक की बहन जो कि साइंसटिस्ट हैं. मैं उनसे कई बार मिल चुका हूं. उन्होंने काफी कुछ बताया है. हमने इस फिल्म में कोशिश की है बड़े ही साधारण भाषा में पूरी प्रक्रिया को समझाने की. फिल्म को लेकर कोशिश कि गयी है कि हमने इसे डॉक्यूमेंट्री नहीं बल्कि मनोरंजक फिल्म बनाया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस फिल्म से जुड़ सकें.

-साइंस में आपका रुझान कैसा था?

मैं मैथेमेटिक्स में अच्छा था. बचपन की एक बात है. उस वक्त चौथी या पांचवी क्लास में रहा होऊंगा. मेरे पापा ने मुझे एक ट्रांजिस्टर लाकर दिया था. काफी क्रेज था उसका उस वक्त. उसकी कीमत मात्र 175 रुपए थी. उस वक्त के लिहाज से यह कीमत बहुत थी. उस पर गाने आते थे और हम खूब सुना करते थे. मैं कान में लगा कर उसे घूमा करता था. एक दिन मैंने अपने पिताजी को बोला कि देखो डैडी मैंने ये क्या ढूंढ़ा. मैंने जोर से फेंका, तो अलमारी पर जाकर चिपक गया. तो पापा ने कहा कि ये तो मैगनेट है. ये कहां से आया. मैंने कहा मैंने डिस्कवर किया है. मैंने ट्रांजिस्टर से उसे निकाला था. तो पापा ने कहा कि तूने इसे तोड़ क्यों दिया? वह दुखी हुए कि मैंने उस ट्रांजिस्टर को तोड़ दिया था.

-आप फोर्ब्स में सबसे अधिक धनवान सुपरस्टार में शामिल हुए हैं? क्या कहना चाहेंगे?
मैं खुश हूं और गौरवान्वित हूं. साथ ही मैं पैसे को समझदारी से खर्च करने में यकीन रखता हूं और समझदारी से ही खर्च करूंगा. मैं अच्छी फिल्में करूंगा और पैसे बनाऊंगा.

-आप साउथ की फिल्मों के हिंदी रिमेक को बहुत प्रमुखता देते हैं?
ऐसा नहीं है. हिंदी की भी अच्छी फिल्में उधर जाकर रीमेक होती हैं. हमारा हिंदी सिनेमा बहुत अच्छा काम कर रहा है और मुझे उस पर गर्व है.

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