पुण्यतिथि : घोड़े की नाल बनाने से लेकर फिल्मफेयर अवार्ड जीतने तक, महबूब खान की अनसुनी कहानी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 May 2019 11:11 AM
हिंदी सिनेमा के महान फिल्म मेकर महबूब खान को लोग सदियों तक याद रखेंगे. उनकी प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया मानती थी. उनकी महान फिल्म ‘मदर इंडिया’ को कैसे भूला जा सकता है. इस फिल्म ने ऑस्कर तक का सफर तय किया. फिल्म अवॉर्ड लेने में भले ही असफल रही मगर फिल्म ने भारतीय सिनेमा […]
हिंदी सिनेमा के महान फिल्म मेकर महबूब खान को लोग सदियों तक याद रखेंगे. उनकी प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया मानती थी. उनकी महान फिल्म ‘मदर इंडिया’ को कैसे भूला जा सकता है. इस फिल्म ने ऑस्कर तक का सफर तय किया. फिल्म अवॉर्ड लेने में भले ही असफल रही मगर फिल्म ने भारतीय सिनेमा को नई दिशा दिखाई. महबूब खान का जन्म 9 सितंबर 1907 को गुजरात के बिलिमोड़ा शहर में हुआ था. 28 मई 1964 को महबूब खान का निधन हो गया था.
महबूब खान ने 30 साल के करियर में कुल 24 फिल्मों का निर्देशन किया था. उन्होंने औरत, अंदाज, आन, अमर, बहन, तकदीर और अनमोल घड़ी जैसे बेहतरीन फिल्में बनाई. लेकिन मदर इंडिया सबसे ज्यादा चर्चा में रही.
एक्टर बनना चाहते थे
कम ही लोग जानते हैं कि महबूब खान निर्देशक नहीं बल्कि एक्टर बनने का ख्वाब रखते थे. 16 साल की उम्र में ही वे घर से भागकर अपनी किस्मत आजमाने मुंबई आ गये थे. उनके पिता को जैसे ही इस बारे में पता चला तो वे उन्हें वापस घर ले आये. लेकिन उनका एक्टर बनने का सपना अभी तक उनके मन में था. समय बीतता गया. जब वे 23 साल के हुए तो एक इंडस्ट्री के एक जानकार के साथ फिर मुंबई आ गये और तबेले में घोड़ों की नाल ठोंकने का काम करने लगे.
इत्तेफाक से हुई शुरुआत
महबूब खान का निर्देशन के क्षेत्र में आना भी एक इत्तेफाक ही था. एक बार वे एक साउथ फिल्म की शूटिंग के सेट पर घुस गये. फिल्म का निर्देशन चंद्रशेखर कर रहे थे. महबूब खान ने काम करने की इच्छा जताई और उन्हें रजामंदी भी मिल गई. एक छोटा सा रोल मिला और फिर कई सर्पोंटिंग रोल्स ही मिले. यह वो दौर था जब साइलेंट फिल्में चलती थीं.
निर्देशन के क्षेत्र में रखा कदम
साल 1935 में महबूब खान को ‘जजमेंट ऑफ अल्लाह’ फिल्म के निर्देशन करने का मौका मिला. युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया. इसके बाद उन्होंने ‘मनमोहन’ और ‘जागीरदार’ का निर्देशन किया. साल 1937 में आई उनकी फिल्म ‘एक ही रास्ता’ को दर्शकों ने खूब पसंद किया. सामाजिक पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म के बाद वह निर्देशक के रुप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये. इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में बनाई.
चर्चित फिल्में और अवार्ड
उनकी चर्चित फिल्मों में मदर इंडिया, अमर, आन, रोटी, बहन, औरत, एक ही रास्ता, तकदीर, हम तुम और वो और वतन शामिल है. फिल्म ‘मदर इंडिया’ ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ डायरेक्शन का फिल्मफेयर अवार्ड जीता था. साथ ही फिल्म ने दो राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते थे.
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