फिल्‍म रिव्यू:''लेकर हम दीवाना दिल''

Published at :04 Jul 2014 5:53 PM (IST)
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फिल्‍म रिव्यू:''लेकर हम दीवाना दिल''

।।अनुप्रिया।। फिल्म : लेकर हम दीवाना दिलकलाकार : दीक्षा, अरमान जैननिर्देशक : आरिफ अलीरेटिंग : 2 स्टार आरिफ अली इम्तियाज अली के भाई हैं. यह उनकी फिल्म की कहानी से भी स्पष्ट है. जी हां, उनकी कहानी में उनके भाई की कहानियों का ही एक्सटेंशन नजर आ रहा है. प्यार में कंफ्यूजन. लेकर हम दीवाना […]

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।।अनुप्रिया।।

फिल्म : लेकर हम दीवाना दिल
कलाकार : दीक्षा, अरमान जैन
निर्देशक : आरिफ अली
रेटिंग : 2 स्टार

आरिफ अली इम्तियाज अली के भाई हैं. यह उनकी फिल्म की कहानी से भी स्पष्ट है. जी हां, उनकी कहानी में उनके भाई की कहानियों का ही एक्सटेंशन नजर आ रहा है. प्यार में कंफ्यूजन. लेकर हम दीवाना दिल कंफ्यूजन वाले प्यार की अगली कड़ी है. दिनेश निगम, करिश्मा अभी कॉलेज गोइंग स्टूडेंट हैं. दोनों को मस्ती करना पसंद है और दोनों ही चाहते हैं कि वे ताउम्र मस्ती करते रहें. करिश्मा के पेरेंट्स उसकी शादी कर देना चाहते हैं. लकिन करिश्मा ऐसा नहीं चाहती. और तभी दिनेश और करिश्मा तय करते हैं कि वे दोनों घर से भाग जायेंगे. लेकिन साथ साथ रहने पर उनके बीच की कमियां एक दूसरे को नजर आती है और उनकी दूरियां बन जाती है. दोनों वापस आते हैं और उन्हें अपनी गलतियों का एहसास होता है. दोनों अपनी जल्दबाजी और बचकाने में की गयी शादी को तोड़ना चाहते हैं. लेकिन फिर दोनों कंफ्यूज हैं.

प्यार के कंफ्यूजन पर बनी यह फिल्म इम्तियाज अली की फिल्मों के किरदारों की तरह ही नजर आते हैं. बेहतर होता अगर आरिफ अपने अंदाज में इम्तियाज के छाव से निकल कर कुछ अपनी छाप छोड़ने की कोशिश करते. नवोदित कलाकार अरमान जैन और दीक्षा दोनों ही काफी मासूम और फ्रेश नजर आये हैं. लेकिन चूंकि कहानी में नयापन नहीं. इसलिए उनकी मेहनत कुछ खास कमाल नहीं कर पाती. लेकर हम दीवाना दिल को वर्तमान की कयामत से कयामत तक बनाने की कोशिश की गयी है. लेकिन इस कयामत से कयामत तक में एक दूसरे पर जान न्योछावर करने की कोशिश नहीं करते.

वे मनमौजी हैं और अपने मन के मालिक है. आज के दौर में हालांकि दो युवा प्रेमी की सोच यही है. इस फिल्म में एक और खास बात दर्शाई गयी है. एक दृश्य में अभिनेत्री कहती हैं कि मॉर्डन स्कूल में पढ़ाने के बाद जब शादी ही करनी होती है तो फिर ऐसे स्कूल में पढ़ाते ही क्यों है. यह भारत की आधी आबादी के पेरेंट्स पर फिट बैठती है कि वे चाहते हैं कि बच्चे खुलेमिजाज वाले स्कूल और कॉलेज में पढ़ें लेकिन शादी वह सिर्फ उनकी मर्जी से ही करें. फिल्म में एआर रहमान का संगीत अच्छा है. अरमान जैन की मासूमियत परदे पर नजर आती है. उन्हें जो उतावला किरदार मिला है. वे उन्होंने बखूबी निभाया है. धीरे धीरे वे और निखरेंगे. अरमान जैन में उम्मीद नजर आती है. दीक्षा ने भी अपने हिस्से का काम बखूबी किया है. उनसे भी उम्मीद जगती है.

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