FILM REVIEW: फिल्म देखने से पहले जानें कैसी है ''जब हैरी मेट सेजल''
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Aug 2017 3:26 PM
II उर्मिला कोरी II फ़िल्म: जब हैरी मेट सेजल निर्माता: रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट निर्देशक: इम्तियाज़ अली कलाकार: शाहरुख खान, अनुष्का शर्मारेटिंग: ढाई फ़िल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ में एक संवाद है हाई होप इस फ़िल्म से भी यही बात जुड़ी थी. इम्तियाज़ अली, शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा जैसे चेहरों के एक साथ होने से […]
II उर्मिला कोरी II
फ़िल्म: जब हैरी मेट सेजल
निर्माता: रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट
निर्देशक: इम्तियाज़ अली
कलाकार: शाहरुख खान, अनुष्का शर्मा
रेटिंग: ढाई
फ़िल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ में एक संवाद है हाई होप इस फ़िल्म से भी यही बात जुड़ी थी. इम्तियाज़ अली, शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा जैसे चेहरों के एक साथ होने से फ़िल्म से उम्मीदें बढ़नी स्वाभाविक ही थी लेकिन यह फ़िल्म उस हाई होप पर खरी नहीं उतरती है. सबसे ज़्यादा निराश निर्देशक इम्तियाज़ अली करते हैं. मौजूदा दौर के फिल्मकारों में प्रेमकहानी बनाने में इम्तियाज़ को महारत है लेकिन वह एक बार फिर अपनी पिछली फिल्मों को इस फ़िल्म में दोहराते दिखे हैं. फ़िल्म कई बार आपको ‘जब वी मेट’, ‘लव आजकल’, ‘तमाशा’ और ‘रॉकस्टार’ की याद दिलाता है. फ़िल्म का फर्स्ट हाफ मोमेंट्स के ज़रिए फिर भी आपको एंगेज करके रखता है और उम्मीद भी जगाता है. लेकिन सेकंड हाफ में कहानी औंधे मुंह गिर जाती है और फ़िल्म का रटा रटाया ठंडा सा क्लाइमेक्स फ़िल्म को खत्म कर देता है. फ़िल्म की कहानी में कुछ भी नयापन नहीं है.
फ़िल्म की कहानी टूरिस्ट गाइड हैरी (शाहरुख खान) की है जिसकी मुलाकात सेजल (अनुष्का शर्मा) से होती है. उसने ट्रिप में अपनी सगाई की अंगूठी खो दी है. वह उसे ढूंढने यूके आयी है इसमें हैरी को भी उसकी मदद करनी पड़ती है. अंगूठी खोजते खोजते दोनों एक दूसरे में अपना प्यार ढूंढ लेते हैं क्या सेजल अपने मंगेतर को छोड़कर हैरी पास चली जाती है. इसके लिए आपको फ़िल्म देखनी होगी.
निर्देशक इम्तियाज़ की ख्वाइश रोमांस के बादशाह शाहरुख खान के साथ फिल्म बनाने की थी उनकी ख्वाइश इस फ़िल्म से पूरी हुई है लेकिन उन्होंने बिना एक सशक्त कहानी के क्यों वही पुरानी घिसी पिटी कहानी को दोहराया है. शाहरुख खान को अब स्क्रिप्ट में सीरियस होकर चयन करने की ज़रूरत है क्योंकि एक कमज़ोर कहानी को उनका अच्छा अभिनय भी एंगेजिंग और एंटेरटेनिंग नहीं बना सकता हैं.
अभिनय की बात करें तो शाहरुख खान का अभिनय इस फ़िल्म की यूएसपी है. वह इस फ़िल्म ड्रामा, कॉमेडी और रोमांस तीनों में रंग जमाने में कामयाब रहे हैं. अनुष्का शर्मा ने भी उनका बखूबी साथ दिया है. इरशाद कामिल के गीत और प्रीतम का संगीत इस फ़िल्म की सिनेमेटोग्राफी की तरह ही उम्दा है. कुलमिलाकर यह एक औसत फ़िल्म बनकर रह गयी है.
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