16 साल पढ़ाया, फिर खुद बनीं स्टूडेंट, मां बेटे ने एक साथ ली IIT की डिग्री

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IIT की डिग्री लेते आदित्य कपाड़िया और उनकी मां जिगीषा

IIT की डिग्री लेते आदित्य कपाड़िया और उनकी मां जिगीषा

IITian Mother and Son: पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती. यह बात आपने कई बार सुनी होगी, लेकिन IIT मद्रास के दीक्षांत समारोह में यह बात सच होती भी नजर आई. यहां 45 साल की जिगीषा टेलर और उनके 21 वर्षीय बेटे आदित्य कपाड़िया ने एक साथ स्टेज पर पहुंचकर डिग्री हासिल की.

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IITian Mother and Son: मां और बेटे दोनों ने IIT Madras के BS in Data Science and Applications प्रोग्राम से एक ही डिग्री ली. यह पल सिर्फ परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए प्रेरणा बन गया जो उम्र या जिम्मेदारियों की वजह से अपने सपनों को पीछे छोड़ देता है. आइए इन IITian मां बेटे के बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

कौन हैं IITian मां और बेटे?

गुजरात के भरूच की रहने वाली जिगीषा टेलर करीब 16 साल तक एक इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स पढ़ाती थीं. साल 2019 में पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी. इसके बाद उनका पूरा समय परिवार को देने में बीतने लगा. इसी बीच उनके बेटे आदित्य ने IIT मद्रास के ऑनलाइन BS in Data Science and Applications कोर्स में दाखिला लिया. बेटे की पढ़ाई और उसके अनुभव को देखकर जिगीषा के मन में भी दोबारा पढ़ाई करने की इच्छा जगी. आखिरकार 2022 के आखिर में उन्होंने भी इसी कोर्स में एडमिशन ले लिया.

शुरुआत आसान नहीं थी

करीब तीन साल बाद दोबारा पढ़ाई शुरू करना जिगीषा के लिए आसान नहीं था. उन्हें गणित और स्टैटिस्टिक्स जैसे विषय फिर से समझने में शुरुआत में काफी दिक्कत हुई. हालांकि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. IIT मद्रास की लाइव डाउट क्लास, बैचमेट्स के WhatsApp ग्रुप और लगातार अभ्यास की मदद से धीरे-धीरे पढ़ाई आसान होती गई. उन्होंने हर सेमेस्टर में सिर्फ एक या दो विषय लिए, ताकि घर और पढ़ाई दोनों को आराम से संभाल सकें.

सुबह 4:30 बजे से शुरू होती थी पढ़ाई

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जिगीषा का रोज का रूटीन काफी अनुशासित था. वह सुबह करीब 4:30 बजे उठकर पढ़ाई शुरू करती थीं और 7 बजे तक अपना स्टडी सेशन पूरा कर लेती थीं. इसके बाद घर के काम करतीं और दोपहर में फिर पढ़ाई में जुट जातीं. दूसरी ओर आदित्य भी डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अपनी रुचि के कारण पूरी लगन से पढ़ाई कर रहे थे.

उन्होंने कोविड के दौरान इस ऑनलाइन कोर्स की शुरुआत की थी और बाद में जब IIT मद्रास ने इस डिग्री को नियमित चार वर्षीय डिग्री के बराबर मान्यता दी, तो उन्होंने अपना दूसरा कॉलेज छोड़कर पूरी तरह इसी कोर्स पर ध्यान दिया.

परिवार बना सबसे बड़ी ताकत

जिगीषा बताती हैं कि कई रिश्तेदार उनसे पूछते थे कि इस उम्र में पढ़ाई करने की क्या जरूरत है. लेकिन उन्होंने हमेशा यही जवाब दिया कि वह कुछ नया करना चाहती हैं. इस सफर में उनके पति, जो खुद कॉलेज में प्रोफेसर हैं, ने हर कदम पर उनका साथ दिया. जब भी उन्हें पढ़ाई का दबाव महसूस हुआ, परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया. ससुर उनके प्रोजेक्ट की जानकारी लेते थे और सास भी उनका उत्साह बढ़ाती थीं.

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रवि मल्लिक

लेखक के बारे में

By रवि मल्लिक

रवि मल्लिक पिछले 7 सालों से डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े हैं. स्कूली शिक्षा से लेकर नौकरी तक की खबरों पर काम करना पसंद है. युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना अच्छा लगता है. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE और NEET एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में जानना पसंद है. युवाओं को प्रेरित करने के लिए उनके बीच के मुद्दों को उठाना और सही व सटीक जानकारी देना ही उनकी प्राथमिकता है.

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