आरक्षण का लाभ लेकर JTET पास, चयन अनारक्षित वर्ग में! उठे सवाल, क्या रद्द होगी ऐसे छात्रों की उम्मीदवारी

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JSSC objects on JTET hiring

JSSC ऑफिस झारखंड की फाइल फोटो

JTET में आरक्षित वर्ग का लाभ लेकर पास हुए कुछ अभ्यर्थियों का चयन सहायक आचार्य में अनारक्षित कोटि में हुआ है. सवाल यह है कि क्या 60% से कम अंक वाले अभ्यर्थी अनारक्षित वर्ग में नियुक्त हो सकते हैं? JSSC से स्पष्टीकरण मांगा गया है.

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JTET| रांची, सुनील झा : झारखंड में सहायक आचार्य (शिक्षक) पदों पर नियुक्ति को लेकर नया विवाद सामने आया है. जिलों ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से मार्गदर्शन मांगा है, क्योंकि कुछ अभ्यर्थियों का चयन अनारक्षित वर्ग में हुआ है, जबकि उन्होंने JTET में आरक्षित कोटि का लाभ लेकर परीक्षा पास की थी.

जेटेट के क्वालीफाइंग मार्क्स में अंतर

झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) नियमावली 2012 के अनुसार, अनारक्षित वर्ग के लिए न्यूनतम उत्तीर्णांक 60% निर्धारित किया गया है. वहीं अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) एवं दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए यह सीमा घटाकर 52% कर दी गई है.

60% से कम अंक, फिर भी अनारक्षित में चयन?

हाल ही में जारी सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के रिजल्ट में कुछ ऐसे नाम शामिल हैं, जो JTET में केवल आरक्षित श्रेणी के मापदंड पर ही पास हुए थे, लेकिन JSSC ने उनका चयन अनारक्षित वर्ग में कर दिया. इस स्थिति को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या ऐसा संभव है?

जिलों ने मांगा विभाग से मार्गदर्शन

इस विषय में जिलों ने स्कूली शिक्षा विभाग से स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे हैं. विभाग ने भी JSSC को पत्र लिखकर इस स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा है ताकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और नियुक्ति में कोई कानूनी बाधा न उत्पन्न हो.

60% से अधिक अंक वालों को नहीं है परेशानी

शिक्षा विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने स्पष्ट किया है कि जिन अभ्यर्थियों को JTET में 60% या इससे अधिक अंक प्राप्त हैं, उनके चयन पर कोई आपत्ति नहीं है, भले ही वे आरक्षित वर्ग से क्यों न हों. ऐसे अभ्यर्थियों की काउंसेलिंग प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है.

जवाब मिलने के बाद ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

विभाग ने कहा है कि JSSC से स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही आगे की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाएगी. विभाग का उद्देश्य है कि किसी चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो और सभी प्रक्रियाएं नियम के अनुसार संपन्न हों.

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