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UNESCO WHC Site: क्यों खास है उत्तराखंड की Valley of Flowers? ऐसा है भारत की सबसे सुंदर घाटी का राज

Updated at : 12 Jun 2025 2:22 PM (IST)
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UNESCO WHC Site Valley of Flowers

UNESCO WHC Site Valley of Flowers

UNESCO WHC Site: उत्तराखंड की Valley of Flowers, जो चमोली जिले में है, यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है. यह घाटी हर साल जून से अक्टूबर तक ट्रेकर्स और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. सैकड़ों रंग-बिरंगे फूलों से ढकी यह जगह ‘स्वर्ग का द्वार’ कहलाती है और हर नेचर लवर की पसंदीदा डेस्टिनेशन है.

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UNESCO WHC Site: अगर आप ट्रेकिंग के शौकीन हैं या प्रकृति से जुड़ाव महसूस करते हैं तो उत्तराखंड की फूलों की घाटी (Valley of Flowers) आपके लिए एक सपना जैसी जगह है. यह घाटी हर साल जून से अक्टूबर तक सैलानियों के लिए खुलती है और 2025 में भी इसे 1 जून से खोल दिया गया है. बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके बारे में इंटरव्यू में भी सवाल पूछे जाते हैं क्योंकि इसे यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया था. आइए जानते हैं UNESCO WHC Site Valley of Flowers के बारे में विस्तार से.

कहां है फूलों की घाटी? (UNESCO WHC Site Valley of Flowers)

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फूलों की घाटी उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है और इसे साल 2005 में UNESCO द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था. यह घाटी लगभग 87.5 वर्ग किलोमीटर में फैली है और यहां सैकड़ों प्रकार के फूल, औषधीय पौधे और दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं.

ट्रेकिंग के लिए प्रसिद्ध (UNESCO WHC Site Valley of Flowers)

यह घाटी गोविंदघाट से लगभग 16 किलोमीटर के ट्रेक पर स्थित है. रास्ते में बर्फ से ढकी पहाड़ियां, झरने, ग्लेशियर और रंग-बिरंगे फूल मन मोह लेते हैं. जुलाई और अगस्त के महीने में घाटी सबसे ज्यादा खूबसूरत दिखती है जब ब्राह्मकमल, ब्लू पॉपी और कोबरा लिली जैसे फूल खिलते हैं. इसीलिए इसे लोग स्वर्ग का द्वार भी कहते हैं.

संरक्षण और पर्यावरण नियम (UNESCO WHC Site Valley of Flowers)

वर्ष 2005 से यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल में शामिल (UNESCO WHC Site) फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए हर साल जून से अक्तूबर तक खोली जाती है, बाकी साल यह बर्फ से ढकी रहती है. फूलों की घाटी में घूमने के लिए जुलाई-अगस्त का समय सबसे अच्छा माना जाता है. UNESCO की मान्यता मिलने के बाद इस घाटी को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है. यह नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के अंतर्गत आता है. यहां प्लास्टिक ले जाना पूरी तरह से मना है और पर्यटकों से सफाई और शांति बनाए रखने की अपील की जाती है.

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