SPG और NSG में क्या है अंतर? जानिए किसका काम है सबसे ज्यादा टफ
Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 31 May 2026 12:20 PM
कमांडो की AI जेनरेटेड तस्वीर
SPG VS NSG: भारत में SPG और NSG दो हाई लेवल के सुरक्षा बल हैं. दोनों के काम करने के तरीके में अंतर है.
SPG VS NSG: जब भी देश की सुरक्षा व्यवस्था की बात आती है तो कई तरह के सुरक्षा बल की बात आती है. सबसे हाई-प्रोफाइल सुरक्षा बल में SPG और NSG का नाम आता है. आम लोगों को नहीं पता होता है कि ये सुरक्षा बल किस लिए हैं और इनमें क्या अंतर है. आइए, जानते हैं SPG और NSG के बीच का फर्क.
SPG और NSG का फुलफॉर्म
SPG का फुलफॉर्म Special Protection Group है और NSG का फुलफॉर्म National Security Guard है. दोनों ही फोर्स बहुत सी ट्रेनिंग से होकर गुजरती है. इनके ऊपर विशेष जिम्मेदारियां होती हैं. हालांकि, इनके काम, सेलेक्शन प्रोसेस और ट्रेनिंग में काफी अंतर होता है.
SPG और NSG का क्या है काम?
SPG का गठन वर्ष 1985 में किया गया था. इसका मुख्य काम भारत के प्रधानमंत्री और उनके साथ रहने वाले करीबी परिवार की सुरक्षा करना है. SPG को देश की सबसे विशेष सुरक्षा इकाइयों में गिना जाता है.
वहीं NSG का गठन 1984 में किया गया था. इसे आमतौर पर “ब्लैक कैट कमांडो” के नाम से जाना जाता है. इसका मुख्य काम आतंकवाद-रोधी अभियान (Anti-terrorist operation) चलाना, बंधक बचाव ऑपरेशन करना और विशेष परिस्थितियों में VVIP सुरक्षा प्रदान करना है.
कैसे होती है भर्ती?
SPG में सीधी भर्ती नहीं होती. इसमें CRPF, CISF, BSF, SSB जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और IPS अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर लिया जाता है. चयन के दौरान सर्विस रिकॉर्ड, फिजिकल और मेंटल फिटनेस देखी जाती है. साथ ही सुरक्षा जांच जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है.
NSG में भी सीधी भर्ती नहीं होती. यहां भारतीय सेना और विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से चयन किया जाता है. उम्मीदवारों को कठिन फिजिकल टेस्ट, दौड़, मेंटल फिटनेस टेस्ट जैसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.
ट्रेनिंग कितनी कठिन होती है?
SPG कर्मियों को क्लोज प्रोटेक्शन, मार्शल आर्ट्स, एडवांस सेफ्टी टेक्निक और विशेष ऑपरेशन की ट्रेनिंग दी जाती है. इनका फोकस VIP सुरक्षा पर होता है.
दूसरी ओर NSG की ट्रेनिंग दुनिया की सबसे कठिन सुरक्षा ट्रेनिंग में मानी जाती है. इसमें Anti Terrorist ऑपरेशन, शहरी युद्ध, बंधक बचाव और संकट प्रबंधन जैसी विशेष ट्रेनिंग शामिल होती है. रिपोर्ट्स के अनुसार शुरुआती ट्रेनिंग में बड़ी संख्या में उम्मीदवार बाहर हो जाते हैं.
कितनी मिलती है सैलरी?
SPG कर्मियों को बेसिक वेतन के साथ जोखिम भत्ता, विशेष ड्यूटी भत्ता, मेडिकल सुविधा और अन्य सरकारी लाभ दिए जाते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी महीने की सैलरी लगभग 84 हजार रुपये से 2.4 रुपये लाख तक हो सकती है.
NSG में सैलरी रैंक और जिम्मेदारी के अनुसार तय होती है. कमांडो लेवल से लेकर सीनियर ऑफिसर तक अलग-अलग वेतनमान और भत्ते दिए जाते हैं.
कौन है ज्यादा खास?
SPG और NSG दोनों के रोल्स अलग-अलग होते हैं. इसलिए किसी एक को दूसरे से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं कहा जा सकता. SPG प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है, जबकि NSG देश के बड़े आतंकवाद-रोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाती है. 26/11 मुंबई हमले जैसे ऑपरेशन में NSG की भूमिका काफी चर्चित रही है.
SPG और NSG में से कौन सा है टफ?
SPG के जवान हर समय VVIP सुरक्षा में लगे रहते हैं, वहीं NSG कमांडो को शहरी युद्ध, आतंकियों से मुकाबला और संकट की स्थिति में कार्रवाई जैसे बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य करने पड़ते हैं. इसी वजह से NSG की ट्रेनिंग और ऑपरेशन को अधिक कठिन माना जाता है, जबकि SPG पर देश के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है.
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